सवरती शिवपुरी और सियासी दंश, सच से कोसो दूर श्रेय को लेकर छिड़ी जंग

विलेज टाइम्स समाचार एजेन्सी, म.प्र. शिवपुरी- अब योजनायें जो भी हो आखिरकार किसी न किसी के प्रयास तो योजनाओं को लाने से लेकर उन्हें मूर्तरुप देने तक होते ही है। मगर जब श्रेय की जंग में सच धुंधला होने लगे तो फिर सवाल तो बनते ही है। इस सबके बावजूद अगर सवरने के बीच किसी शहर में सियासी दंशो का अंबार आ टिका हो, तो निश्चित ही श्रेय की जंग भी र्निविवाद नहीं रह पाती। शायद लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह के सवालों को इस व्यवस्था का या फिर इस व्यवस्था में रहने वालो का सौभाग्य या फिर र्दुभाग्य ही कहा जायेगा कि उसके आंखों के सामने दिखता या मेहसूस होता सच उसे धूमिल नजर आये। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेबसी कहे या सियासी श्रेय लेने वालो का अन्धापन जो सब कुछ साफ-साफ और सच होने के बावजूद भी उस पर मिट्टी डाल लोगों को एक नया सच दिखाने या बताने का प्रयास करते है। 

वैसे भी लोकतंत्र में यह कहावत काफी चर्चित है कि जनता सब कुछ समझती है उसके सामने सच को झुठलाया नहीं जा सकता। वर्षो से समय-समय पर पहाड़ तोड़ समस्याओं का दंश और मुफत में नसीब सुविधायें बटोरने वाले इस शहर ने यूं तो अपनी सुन्दरता और बदशकली के कई पड़ाव देखे है। मगर जब भी इस शहर को नया स्वरुप मिलने की बारी आती है तो सडक़ पर ही श्रेय की जंग छिड़ जाती है। 

इसमें किसी को संदेह और इस कटु सच से शिकायत नहीं होना चाहिए कि सरकारों के निर्धारित बजट के अलावा अगर कई ऐतिहासिक योजनाओं की शुरुआत और जड़ीय समस्याओं के समाधान की दिशा में अगर कोई कार्य शुरु हो मूर्तरुप ले चुके या ले रहे है तो इसमें इस सुन्दर शहर को बसाने वाले पूर्व सिंधिया राजवंश के उत्तराधिकारियों के प्रयासों का इस लेाकतांत्रिक व्यवस्था के बीच बड़ा योगदान रहा है। 

फिर चाहे वह देश में सर्वप्रथम भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ की प्रथम सडक़ का भूमिपूजन जिले भर में राजीव गांधी जल ग्रहण मिशनों की बाढ़, कृषि भूमि सुधार, ग्रामीण आवास सहित फोरलेन निर्माण, खेल मैदान से लेकर मु यमंत्री सडक़ों का जाल नई बड़ी रेल लाईन, रेल्वे स्टेशन निर्माणाधीन देश का दूसरा एनटीपीसी इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज के अलावा जिला चिकित्सालय के जीर्णोद्वार के साथ नवीन भवन, झील सरंक्षण से लेकर सिंध जलावर्धन जिसका जल फिल्टररेशन के बाद बिसलरी के जल से भी उम्दा दर्ज का लोगों को केवल पीने ही नहीं नहाने धोने भी नसीब हो सकेगा।

पॉलेटेनिक कॉलेज से लेकर शहर भर में महानगरों जैसी सडक़ो का जाल एवं कुटीर उघोग से लेकर सेवा क्षेत्र से जुड़े रोजगार ही नहीं, प्राकृतिक स पदा दोहन के क्षेत्र में 5 वृहत व्यापारिक पत्थर क्षेत्रों की खदानों की शुरुआत इस बात के प्रमाण है कि शहर को सवारने और लोगों की हालत में सुधार सहित सेवा का पैमाना क्या हो, इस सच से सभी को अवगत होना आवश्यक है। न कि ऐसे सियासी षडय़ंत्रों के साक्षी बनना जो सिर्फ और सिर्फ स्वयं का विकास कर झूठे सुगूफो अफवाहों के सहारे सियासत करना चाहते है। अब इसे इस शहर का सौभाग्य कहे या र्दुभाग्य कि यहां सक्रिय सियासी एक वर्ग विशेष जिनका न तो किसी एक विचारधारा में कोई आस्था और विश्वास है और न ही जनसेवा, राष्ट्र सेवा से कोई वास्ता। अघोषित रुप से दल विहीन इस वर्ग पर आज ताकत, धन और अफवाह फैलाने वालो का पूरा नेटवर्क तैयार है जिसके सहारे वह दो दशक से सत्ता में गलवईया कर, स्वयं की स्वार्थ पूर्ति और स्वयं को सक्षम सफल बनाने के लिये ऐसी शख्सियतों के खिलाफ षड़ंयत्र कर अफवाह फैलाते रहते है, जो जनसेवा और शहर सेवा सहित राष्ट्र सेवा में जुटे रहते है।

फैसला उन शहर वासियों को करना है जो समय-समय पर इस तरह के सियासी दंश और षडय़ंत्रों का शिकार हो, हैरान-परेशान खून के आंसू रोते है। बेहतर हो कि शहर वासी ही नहीं आम नागरिक को भी इस सच्चाई से बाकिफ होना चाहिए जिससे उनका सुनहरा भविष्य और यह सुन्दर शहर और सुन्दर बन सके।

SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment