सेवा, सत्य, सुचिता के नाम स्वार्थो का नंगा नाच, घातक- मुख्य संयोजक स्वराज

विलेज टाइम्स : मूल्य विहीन समाज सुखी, संपन्न, समस्या मुक्त नही हो सकता विचार बपौती और व्यक्ति संगठन नहीं होता विचार कल्याणकारी तो समूह संगठन होता है खुशहाल, संपन्न, वैभवशाली, परिवार, समाज, राष्ट्र का निर्माण तभी हो सकता है जब व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र का हर नागरिक बच्चा, युवा, बुजुर्ग निर्धारित उच्च नैतिक मूल्यों की प्राप्ति हेतु अच्छे, पवित्र, सर्वमान्य संसाधनों का उपयोग कर व्यक्तिगत, सार्वजनिक तौर पर पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ अपने कत्र्तव्य, उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें, और यह तभी स भव जब हम स्वयं और सर्वकल्याण हेतु प्रकृति अनुसार प्राकृतिक सिद्धान्तों में अपनी गहरी आस्था रख शिक्षित और जागरुक बने। क्योंकि शिक्षा का अर्थ केवल स्वयं या स्वयं के परिवार, समाज के लिये किसी भी भाषा, तकनीक या रोजगार को प्राप्त कर लेने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह किसी भी खुशहाल मानव जीवन की वह पद्धति का माध्यम होती है। जो मानव सहित समस्त जीव, जगत के साथ प्रकृति व उच्च जीवन मूल्यों को संरक्षित कर सभी का जीवन, संपन्न, खुशहाल तथा वैभवशाली बनाती है। 

मगर किसी भी महान सभ्यता, संस्कृति से सराबोर व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र की बिड बना तब बढ़ जाती है जब वह नंपुसक, बौद्धिक अस्यासो की फौज के बीच, जहां सरेआम नैतिकता की खिल्ली और जीवन मूल्यों की अहम अंधकार, अहंकार, स्वार्थो के आगे हत्या की जाती है और व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र में एक अस्वीकार्य नई सभ्यता, संस्कृति की ईवारत लिखी जाती है। 

ऐसे में हर नागरिक बच्चा, युवा, बुजुर्ग की व्यक्तिगत जबावदेही बन जाती है कि वह स्वयं परिवार, समाज, राष्ट्र के लिये, सच को सामने रख, अपने निर्धारित सर्वमान्य जीवन मूल्य, नैतिकता, सभ्यता, संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और उनकी रक्षा में जुटे। और यह तभी संभव होगा जब नागरिक अपनी हैसियत, स्थिति अनुसार व्यक्तिगत, संगठनात्मक, व्यवस्थागत उन संस्थाओं की और कूच का मार्ग प्रस्त करे, जहां पहुंच, पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ इनकी रक्षा, संरक्षण, संवर्धन किया जा सके। 

क्योंकि विचार किसी की बपौती और व्यक्ति संगठन नहीं हो सकता सो समान सोच विचारों के साथ स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र व सर्वकल्याण की शुरुआत करें, तभी उस राष्ट्र के व्यक्ति, परिवार, समाज का संपूर्ण कल्याण संभव होगा और वह राष्ट्र स पन्न, खुशहाल, वैभवशाली बन अपने उच्च नैतिक मूल्य स्थापित कर सकेगा। 
जय स्वराज
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