नैतिक मूल्यों की पराकाष्ठा का नाम है कॉग्रेस

वीरेन्द्र शर्मा, विलेज टाइम्स, समाचार एजेन्सी : यूं तो ओयू हयूम, स्व. सुभाष चन्द्रबोस, स्व. महात्मा गांधी, स्व. पं. जवाहर लाल नेहरु, स्व. इन्दिरा गांधी, स्व. राजीव गांधी, स्व. नरङ्क्षसहराव, डॉ. मनमोहन सिंह तक कॉग्रेस का उच्च नैतिक मूल्यों को तय करने का सफर रहा है। मगर अफसोस कि बड़े-बड़े काठी, कद नेताओं के रहते कॉग्रेस अभी भी सच बोलने से मोहताज बनी हुई है। यहीं यक्ष प्रश्र आज समुचे भारतवर्ष और महान कॉग्रेसी विचार के सामने है। मगर सार्थक जबाव फिलहाल किसी के पास नहीं। अब इसे इस महान दल का सौभाग्य कहे या फिर र्दुभाग्य कि जो कॉग्रेस अपने नैतिक मूल्यों को छोड़, आज भी विरोधी दलों के काल्पनिक सवालों जबाव देने में जुटी रहती है। देखा जाये तो कॉग्रेस न तो कोई व्यक्ति है, न ही बगैर आधार के  कोई संगठन वह तो भारत का वह सर्वमान्य विचार और विचारधारा है। 

जिसे सुभाष बाबू, पूज्य महात्मा गांधी, पं. नेहरु ने अपना सारा ऐश्वर्य, हस्ती मिटा बड़ी ही त्याग तपस्या के बाद खड़ा किया था और स्व. इन्दिरा, स्व. राजीव ने शहादत दें, जिसके नैतिक मूल्यों व राष्ट्र की एकता, अखंण्डता की रक्षा के लिये अपना सर्वस्य न्यौछावर किया। मगर इस महान त्याग तपस्या शहादतों की चर्चा का देश के आम लोगों के बीच के ओझल हो जाना आज कॉग्रेस जैसी महान विचारधारा व दल के लिये बड़ी ही र्दुभाग्य की बात है। 

बेहतर हो कॉग्रेस अपने सुनहरे इतिहास वर्तमान हैसियत को देख, भविष्य का लक्ष्य तय कर, अपनी शुरुआत करे, तभी महान कॉग्रेस के अस्तित्व को बचाया जा सकता है।
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