दुराग्रह, दहन, दहशत से थर्राया प्रदेश

व्ही.एस. भुल्ले: सत्ता के लिये जिस तरह का संघर्ष म.प्र. की राजनीति में छिडऩे जा रहा है उसमें दुराग्रह से लेकर पुतला दहन, दहशत का खुलकर प्रदर्शन किया जाना, इस प्रदेश की राजनीति को नीति छोड़, राजसुख कहां ले जाकर छोड़ेगा यह तो सत्ता के लिये इस तरह के हतकंडे अपमाने वाले राजनेता और उनके दल ही जाने। फिलहाल तो राजनैतिक दलो के इस तरह के प्रदर्शन को लेकर शान्ति के टापू कहे जाने वाले म.प्र. ही नहीं, समुचे प्रदेश की राजनीति थर्रायी हुई है।  

यूं तो म.प्र. की हवा में सर चढक़र बोलता भ्रष्टाचार, राजनीति में राजनेताओं का अहम, अहंकार और स्वार्थ  क्या कम था जो गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों के सब्र को भी नहीं छोड़ा जा रहा। अगर यूं कहे कि म.प्र. के गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों को सीधा ललकारा जा रहा है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। बैसे भी राजनीति के शब्द ही अपने आप में समुचे अर्थ समेटे है कि एक अच्छे राज के लिये अच्छी नीतियों का क्रियान्वयन और नागरिकों के प्रति सेवा एवं उत्थान का भाव होता है। जिसके लिये किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्यवस्थागत तरीके से अपने दलों के वैचारिक आधार पर जनता के बीच अपनी नीतियां लेकर जाता है या फिर सत्ता में रहते उन नीतियों का पूर्ण निष्ठा ईमानदारी से क्रियान्वयन कराता है। 

मगर गत दिनों से जिस तरह से दुराग्रही आरोप-प्रत्यारोप म.प्र. में बगैर पुख्ता प्रमाण के चल रहे है और आरोप-प्रत्यारोप के सहारे कभी पुतला दहन, तो कभी दहशत पूर्ण माहौल तैयार हो रहे है। उससे प्रदेश की राजनीति भले ही थर्रा जाती हो, मगर गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित लोग अवश्य सहमे हुये है। 

कहने को सत्ता के पूरे 15 वर्ष करने जा रहे दल की फिलहाल म.प्र. में भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त म.प्र. का नारा देने वाली मजबूत सरकार है तो वहीं सरकार की नीतियों और आचरण को दमनकारी, शोषणकारी ठहराने वाले विपक्ष का आक्रोश और विभिन्न आन्दोलन है। मगर धन्यवाद के पात्र है म.प्र. के ऐसे राजनेता जो छूटे व दुराग्रह पूर्ण आरोपों से निवटने कानूनी नोटिस देने या आरोप लगाने वालो को न्यायालयों में घसीटने से नहीं चूक रहे। 

फिलहाल तो म.प्र. में एक के बदले दो, तो दो के बदले, चार-चार पुतलों का दहन म.प्र. के दोनों ही प्रमुख दलों द्वारा किया जा रहा है। न तो विगत 13 वर्षो सत्ता सुख भोग रही भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त म.प्र. बनाने वाली सरकार को गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों की कोई परवाह है और न ही फिलहाल विपक्ष के पास ऐसे सवाल, संगठन, संसाधन जो सरकार का सामना कर सके। बहरहाल जो भी हो जनता का ध्यान बटाने झूठे आरोप-प्रत्यारोप और एक दूसरे का पुतला फूकने का क्रम म.प्र. में पूरे जोर-शोर से जारी है। 
जय स्वराज
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