चरित्र हनन, कभी प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं हो सकता- मुख्य संयोजक स्वराज

 व्ही.एस.भुल्ले से जे.पी. शर्मा की सीधी बात- चरित्र हनन कभी प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं हो सकता फिर चाहे वह व्यक्ति, समाज राजनैतिक दल, नेता हो या अन्य, हम वैचारिक लोग है हमारी संपूर्ण आस्था विश्वास हमारे महान राष्ट्र, मातृ भूमि में है, जिसे सुरक्षित, संपन्न, खुशहाल बनाना हमारा कर्म भी है और धर्म भी। जिसके निर्वहन का प्रयास हम, सार्वजनिक जीवन करने की कोशिश करते है। हम न तो कोई संस्था है, न दल, न ही कोई संगठन, हमारी अपनी एक पारंपरिक वैचारिक मान्यता है, कि इस महान राष्ट्र का आम नागरिक जहां भी, जिस भी स्थिति में हो, वह राष्ट्र व समाज सहित परिवार की सेवा पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ करें, ऐसे लोग सत्ता, संस्था, संगठन किसी भी दल, समूह या व्यक्ति भी हो सकते है। 

उक्त बात स्वराज के विचार को जीवंत बनाने में जुटे स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान पत्रकार जेपी शर्मा से कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्र तभी सुरक्षित, खुशहाल, संपन्न बन सकता, जब राष्ट्र का हर नागरिक अपने-अपने संसाधनों के बीच पूर्ण निष्ठा ईमानदारी से जैसी भी स्थिति में हो, अपने कत्र्तव्य उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें। वह भी अपने महान राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति और पर परा अनुसार, क्योंकि इस महान राष्ट्र की धरोहर उसका आध्यात्मिक, गणितीय ज्ञान के साथ राष्ट्र में मौजूद अपनी पर परा, संस्कृति और शैक्षणिक शिक्षा है जिसके माध्यम से वह नवीन तकनीक व जुगाड़ तकनीक को नई दिशा, नाम, दे, सशक्त, सुरक्षित, खुशहाल, संपन्न राष्ट्र का निर्माण कर सके। 

जब उनसे पूछा गया कि समाज में लोगों के बीच धैर्य और सन्तुष्टि का सन्तुलन बिगड़ रहा है लोग अपनी महत्वकांक्षा पूर्ति हेतु व्यक्तिगत या सामूहिक रुप से ऐसे ऐसे कदम व तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे है। यहां तक कि लोग एक दूसरे का चरित्र हनन का भी इस्तेमाल अपनी-अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने और दूसरे की घटाने के लिये विभिन्न माध्यमों  का सहारा लेने से भी नहीं चूक रहे है। 

इस पर उनका सीधा सा जबाव था कि चरित्र हनन कभी भी किसी की प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं बन सकता। हां यह अनैतिक आधार स्वार्थ परख सत्ता लोलुप प्रतिस्पर्धा का माध्यम अवश्य हो सकता है। जिस तरह से हमारे महान राष्ट्र में छवि चमकाऊ, व्यापार की बाढ़-सी आयी है जिसमें हर येक अहम व्यक्ति, संस्था, दल, सोशल मीडिया या फैक न्यूज के माध्यम से जीवन्त व सत्य व समाज को निर्जीव समझ अपने मंसूबे पूरे करना चाहते है। हो सकता है कुछ सफल हो चुके या हो रहे हो। मगर वह न तो सत्य, सेवा और सच्ची आस्था को पा सकते, जब भी देश की महान जनता को इस भ्रम के सच का एहसास होगा, ऐसे लोगों का एक अलग इतिहास होगा।  क्योंकि अभी तक का महान भारतीय इतिहास जीवन्त व आस्थाओं जनाकांक्षाओं का हामी रहा है। सो जो लोग दूसरों का चरित्र हनन कर स्वयं की झूठी प्रतिष्ठा बनाना चाहते है, शायद ऐसे लोगों को न तो इतिहास, न ही देश की महान संस्कृति, पर पराओं का ज्ञान है, फिर वह जो भी हो। जब अन्त में उनसे पूछा गया कि आखिर आप किस स्वराज की बात करते है आखिर क्या है स्वराज?

इस पर श्री व्ही.एस. भुल्ले जी ने कहा कि स्वराज नाम से ही स्वराज का अर्थ स्पष्ट है हम वैचारिक है न कि कोई दल, संस्था, संगठन हमारा स पूर्ण विश्वास राष्ट्र कल्याण व नवनिर्माण में है और हमारा मानना है कि हमारी महान संस्कृति पर परा, आध्यात्म और अहिंसा ही वह मार्ग और हमारे संसाधन है जिनके माध्यम से हम अपने अन्तिम लक्ष्य, सुरक्षित, संपन्न, खुशहाल भारत को पा सके। इसके अलावा स्वराज के नाम किसी के कर्म, वचन, विचार , भाषा, बोली, आचरण में अगर कहीं भी हिंसा का भाव नजर आये तो समझे, वह स्वराज का भाग नहीं, न ही उसका स्वराज में कोई विश्वास है और न ही उसकी स्वराज में कोई आस्था। जो जहां भी है जैसी भी स्थिति, संसाधनों के बीच है अपने कर्तव्य, उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर अपने महान राष्ट्र, समाज व परिवार की सेवा के लिये पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ  कर राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे सकता है, कहते है कि सृजन ही प्रकृति का नियम है। 
जय स्वराज
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