जबावदेही से भागते, जबावदेह लोग सृजन कर्ताओं के देश में सम्मान और स्वाभिमान का संकट

खबर का असर आखिर मीरा कुमार बनी यूपीए की ओर से राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी   
ज्ञात हो कि विलेज टाइम्स बेवसाईट द्वारा अपनी 22 जून की खबर में विपक्षी दलो की ओर से प्रस्तावित नामों की स भावनाओं में मीरा कुमार का नाम भी प्रकाशित किया था और अब वह यूपीए की ओर से राष्ट्रपति के प्रत्याशी के रुप में मैदान में है 

व्ही.एस.भुल्ले: स्वयं की जबावदेही से भागता वह समाज, परिवार, नागरिक, राष्ट्र तब तक स्वाभिमानी, सफल स पन्न खुशहाल जीवन नहीं जी सकता, जब तक कि वह अपनी जबावदेही पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ अपनी संस्कृति, पर परा अनुसार निभाने का प्रयास नहीं करता। क्योंकि हमारी महान संस्कृति में ही हमारी महान पर परा और सृजन का राज छिपा है। जिसके रहते हम कभी सबसे अधिक खुशहाल संपन्न राष्ट्र कहे जाते थे वह हमारा अमूल्य धन ही था जिसे हम स्वाभिमान कहते है। 

मगर आज हमारा स्वाभिमान, हमारी महान संस्कृति तो हमारे संस्कारों में दूर की कोणी, हम मौजूद माहौल के चलते मान-स मान, स्वाभिमान ही नहीं सृजन के भी मोहताज होते जा रहे है। अब यहां यक्ष सवाल यह है कि इस महान भू-भाग पर स्वयं शासित संपन्न स प्रभु राष्ट्र में आखिर ऐसी स्थिति क्यों हो रही है और आज भी है। कि हम इन 70 वर्षो में ऐसा माहौल क्यों नहीं बना पाये जो हम स्वयं के सृजन से अपनी पूर्व प्रतिष्ठा और वर्तमान खुशहाल, संपन्न जीवन सुनिश्चित कर जी पाये। 

कारण साफ है जो जबावदेह संस्थायें या सत्तायें रही वह हमारे अपने मान-सम्मान को नहीं रख पायीं न ही स्वयं की प्रतिष्ठा मानवीय जीवन मूल्यों के संरक्षण हेतु बना पाई। र्दुभाग्य हमारा यह है कि हमारे महान राष्ट्र में जिन्होंने भी  अपनी जबावदेही पूर्ण निष्ठा ईमानदारी से निभाई, उन्हें हम याद नहीं रख पाते। न ही हम उस शिक्षा नीति से दो-दो हाथ कर पाते जो हमारी बदहाली का कारण साबित हो रही है न ही अपनी संस्कृति पर परा ही सुरक्षित रख पाये, जो महान भारत वर्ष की महानता का आधार रही है। 

कारण साफ है कि हम विगत 3 दशकों से सत्ता के लिये अंधे हो, अघोषित वोट नीति के जिस दंश से आज हताहत है और हम एक महान राष्ट्र के महान नागरिक होने के बावजूद भी अज्ञानता बस जो दंश भुगत रहे है। बेहतर हो कि हम अपने अधिकारों की अंधी दौड़ छोड़, जबावदेही का ऐसा सैलाब अपने महान राष्ट्र में लाये, जिससे पुन: हम स पन्न खुशहाल राष्ट्र का निर्माण कर सके। क्योंकि सृजन ही हमारी महान संस्कृति का प्रतीक है और पहचान भी। जो स्वाभिमान के रुप में हमें और हमारे राष्ट्र को महान बनाती है।   
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