सरकार की निर्दयी व्यवस्था देख, बोले, सिंधिया, आज मेरा सर शर्म से झुक गया

व्ही.एस.भुल्ले, विलेज टाइम्स: म.प्र. शिवपुरी- भीषण गर्मी, 43 डिग्री पारे में दोपहर 2 बजे जिला चिकित्सालय का हाल जानने पहुंचे पूर्व केन्द्रीय मंत्री लोकसभा में कॉग्रेस के सचेतक सांसद श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अस्पताल परिसर में ही पत्रकारों के सवालों के बीच, निर्दयी सरकार की व्यवस्था देख, कहा कि सांसद के रुप में आज मेरा सर शर्म से झुक गया। इस बीच 19 करोड़ की लागत से बन रहे नवीन जिला चिकित्सालय भवन के निरीक्षण पश्चात, अचानक वह पुराने चिकित्सालय में भर्ती मरीजों का हाल एवं चिकित्सीय व्यवस्थाओं को जानने जा पहुंचे, जहां उन्होंने उपस्थित चिकित्सीय स्टाफ से चिकित्सीय व्यवस्थाओं की जानकारी ली। 

वहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों से भी बात की। जब वह चिकित्सालय भ्रमण पश्चात वापस लौट रहे थे तभी पत्रकारों ने अस्पताल की सीढिय़ों पर अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्थाओं का हाल और नवजात शिशु की अंगुली चूहों द्वारा कुतरे जाने पर सवाल किया। तो सरकार की निर्दयी व्यवस्था से आहत, सिंधिया बोले कि सांसद के रुप में मेरा सर आज शर्म से झुक गया है। 

उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुये कहा कि वह उनके केन्द्र में मंत्री रहते जिला चिकित्सालय के नवीन भवन के लिये केन्द्र सरकार से 17 करोड़ रुपये लेकर आये। जिसके तहत नवीन जिला चिकित्सालय भवन का निर्माण किया जा रहा है। मगर म.प्र. सरकार आज तक न तो नवीन चिकित्सालय के लिये कोई संसाधन जुटा पाई, न ही समय से कोई व्यवस्था कर पाई। मुझे दु:ख है कि शिवपुरी जिले के प्रभारी मंत्री, स्वास्थ मंत्री होने के बावजूद भी इस चिकित्सालय में जरुरत के मुताबिक न तो डॉक्टर है, न ही अन्य स्टाफ, न ही जरुरत अनुसार पर्याप्त मशीनरी जो मौजूद है वह भी बन्द पड़ी है। दवायें बाहर से मरीजों को खरीदना पड़ रही है। मंत्री दौरा करने आते है चले जाते है मगर व्यवस्था करने कोई तैयार नहीं। 

उन्होंने कहा कि आज ही वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखेगें जिससे जिले के लगभग 18 लाख के करीब लोगों को न्याय पूर्ण और समय से चिकित्सीय सुविधायें मुहैया हो पाये। जब सिंधिया से पूछा गया कि क्या आपको नहीं लगता कि प्रतिशोध की राजनीति हो रही है, इस पर उन्होंने पलटवार करते हुये कहा कि हम किसी से भीख नहीं, अपना अधिकार चाहते है। क्योंकि जनता के टेक्स से सरकार चलती है और जनता को चिकित्सीय सुविधा मिलती है इसमें न तो किसी का कोई एहसान है न ही किसी की कृपा। 
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