भावुक मुख्यमंत्री की व्यथा दिमाग से इतर, दिल से ही सही, दर्द तो निकला

विलेज टाइम्स समाचार एजेन्सी, दिल व दल में संघर्ष से आहत, मुख्यमंत्री जब भी बोलते है बैबाक ही बोलते है अपने 11 वर्षो के लंबे कार्यकाल में संभवत: यह दूसरा मौका है जब वह दिमाग को दरकिनार कर दिल से बोले है, कि मेरे बच्चों उघोग लगाओं खुद रोजगार तलाशने के बजाये मालिक बन दूसरों को रोजगार दो, खेती किसानी अब फायदे का धन्धा नहीं। मगर मेरी कोशिश है कि हम इसे फायदे का धन्धा बनाने प्रयास करते रहेगें। 

वैसे भी मुख्यमंत्री की मंशा देख यह साफ जाहिर होता है कि सत्ता में लंबे अन्तराल तक रहने के बावजूद उनका जमीर पीडि़त वंचितों की खातिर आज भी जिन्दा है, या फिर गर्त में जाती मुख्यमंत्री जी प्रतिष्ठा को बचाने के लिये छवि चमकाऊ कंपनियों का यह नुस्खा है इसीलिये एक बार फिर से अपनी भावना के ब्रम्हास्त्र का मुख्यमंत्री ने उपयोग कर बच्चों के बीच ऐसी भावुक अपील की, बैसे भी कहते है भारत भावनाओं का देश है व भावुकता में ही भारत की जान बसती है। या फिर यह भी हो सकता है जब मुख्यमंत्री अपनो के ही हाथों सियासी दांव पैच में उलझते है। तब ही उन्हें लोगों की भावनायें और भावुकता ही उनका कवच बनती है।

यह उल्लेख करना उचित होगा कि ऐसा ही वक्त एक मर्तवा पूर्व में भी उनके सामने आया था जब वह अपने ही लोगों के सियासी षडय़ंत्र से आहत हो, कुछ वर्ष पूर्व कोटानाका में भावुकता बस अपने दिल की बात पत्रकारों के बीच व्यक्त कर गये थे। परिणाम दूसरे ही दिन समुचे प्रदेश में उनकी भावना को लेकर बबाल कट गया और उन्हें विधानसभा तक में सफाई देनी पड़ी थी। आज जब समुचा प्रदेश किसान आन्दोलन व अन्य आन्दोलनों सहित फिर से सियासी षडय़ंत्रों का शिकार है और शिव सरकार कटघरे में। ऐसे में  भोपाल में स्कूली बच्चों को बीच व्यक्त भावना कि खेती किसानी छोटे किसानों को फायदे का धन्धा नहीं रही इसके पीछे का सच क्या है यह तो जनसेवा में जुटे स्वयं मु यमंत्री जाने या सियासी षडय़ंत्र में जुटे लोग। 

मगर इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री जी के बयानों से स्पष्ट है कि वह एक बार फिर से किस दुख और संकट की घड़ी से गुजर रहे है, जिसमें न तो दिल, न ही दिमाग काम करता है अगर कोई काम करता है तो वह है आत्मा, जिसे परमात्मा कहते है सो लगता है मु यमंत्री जी की आत्मा की आवाज भावना बस बच्चों के बीच निकल पड़ी जिसके सियासी या सात्विक मायने जो भी हो। मगर मुख्यमंत्री की पीडि़त वंचित लोगों के प्रति जो सदभावना विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समुचे प्रदेश के सामने है वह किसी से छिपी नहीं। काश उनके सहयोगी समर्थक या सलाहकार कभी समझ पाये। 
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