सेवा, संगठन को समर्पित सरकार पर सवाल हमदर्दो की मोहताज हुई दर्द बांटने वाली सरकार

विलेज टाइम्स: अब सरकार के मुुखिया या पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले भले ही स्वयं को सक्षम सफल मानने में फिलहाल संकोच कर रहे हो। मगर उनके सामने आज सबसे बड़ा यक्ष सवाल यह है कि 11 वर्षो तक पीडि़त वंचितों के दर्द को बांटने वाली सरकार आखिर क्यों स्वयं के हमदर्द पैदा करने में अक्षम और असफल साबित हो, जैसी कि समुचे म.प्र. में आम चर्चा है और जमीदोष हो चुका विपक्ष आज उस पर हावी है। कारण साफ है कि 13 वर्षो से सेवा, संगठन, सियासत सबारने में जुटी सेवा भावी सरकार यह सोच ही नहीं सकी कि उसकी जनता के प्रति सैद्धान्तिक जबावदेही के साथ कुछ व्यवहारिक जबावदेही भी होती है।

मगर सच यह है कि सेवा, संगठन को छोड़ यह सरकार आम जनता के पैमाने पर खरी नहीं उतर सकी। ये अलग बात है कि सेवा में जुटी सरकार और संगठन ने अपने सियासी मंसूबे पूरे करने में विगत वर्षो से सफल होती आयी है जिसको लेकर भी आम जन के बीच टीका-टिप्पणी कुछ कम नहीं। वहीं सियासत ने सत्ता, संगठन के लिये अंधे हो, अहम, अहंकार में ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्द बांटने वाली सरकार स्वयं के हमदर्दो की मोहताज हो गयी। 

मगर सेवा सत्ता, संगठन तब मोहताज नजर आया, जब प्रताडि़त अन्नदाताओं को सरकार के मुखिया के रुप में एक किसान के रहते, सरकार की संगीनों का सडक़ पर शिकार होना पड़ा और पीडि़त वंचितों की सेवा में जुटी सरकार की साख पर कभी न मिटने वाला कलंक लग गया। जिसका जबाव आज नहीं तो कल वंचित पीडि़त ही नहीं समुचे प्रदेश की जनता निश्चित तौर पर जानना चाहेगी।  

काश सरकार व संगठन अपनी जबावदेही व सियासत का मजमून आम जनता को बता पाये, मगर लगता नहीं, जनसेवा के क्षेत्र में बड़े-बड़े झण्डे गाडऩे वाली सरकार सत्ता, संगठन को दरकिनार कर, यह सच बता पाये जिसका दंश आज उसे हमदर्दी के अभाव में भुगतना पड़ रहा है। 

खनन माफिया की धमकी से दहशत में, महिला आइएएस
विलेज टाइम्स, म.प्र. भोपाल- अगर खबरों की माने तो म.प्र. के जिला उमरिया में पदस्थ सीइओ जिला जिला पंचायता आइएएस सोनिया मीड़ा ने म.प्र. सरकार के मुख्य सचिव को सूचना दी है कि उन्हें विश्ववस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि उन्हें खनन माफि या से जान का खतरा है। क्योंकि उन्हें खनन माफिया द्वारा जान से मारने की धमकी दी गई है अत: उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दिलाई जाये

ज्ञात हो कि जब आइएएस सोनिया मीड़ा छतरपुर जिले में एसडीएम के रुप में पदस्थ थी तब उन्होंने खनन माफिया पर कार्यवाही करते हुये उनका वाहन जब्त किया था जिसे खनन माफिया छुड़ा ले गया था। अब चूंकि उक्त आइएएस अफसर का ट्रान्सफर उमरिया हो चुका है और खनन माफिया सीखचो के पीछे ऐसे में किसी प्रकरण के मामले में छतरपुर न्यायालय में उपस्थित होने को लेकर उनकी सुरक्षा के मद्देनजर उन्होंने मुख्य सचिव म.प्र. सरकार को अवगत कराया है। वहीं पुलिस अधीक्षक छतरपुर की माने तो उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जायेगी। 

फिलहाल जो भी हो जिस तरह से पूर्व में एक आइपीएस अधिकारी की हत्या जिला मुरैना में खनन माफिया द्वारा की जा चुकी है और जिस तरह की खबरें आये दिन खनन माफियाओं की कारगुजारी को लेकर अखबारों में सुर्खियां बनी रहती है उससे साफ जाहिर होता है कि म.प्र. में खनन माफियाओं के होसले कितने बुलंद है और शासन कितना मजबूर कि संवैधानिक संरक्षण प्राप्त अधिकारियों को भी जान से मारने या सरेयाम धमकाने से भी खनन माफिया नहीं चूक रहे।
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