सडक़ पर संघर्षरत अन्नदाताओं की दुखद मौत

विलेज टाइम्स समाचार ऐजेन्सी/म.प्र. मंदसौर। हर वर्ष भारत सरकार से कृषि कर्मट पुरुस्कार प्राप्त करने वाली सरकार को आखिर क्या हुआ जो इतनी दुखद घटना समुचे प्रदेश को देखना पड़ रही है। खबरों की माने तो संगीनों से गरजी गोलियों से हमारे अन्नदाता हलाक हुये है। जो कभी सूखा वेमौसम बारिश, ओला वृष्टि से तो लड़ाई जीतते रहे और अपना खून पसीना एक कर अधिक उत्पादन कर, प्रदेश सरकार को विगत वर्षो से कृषि कर्मट ऑवार्ड दिलाते रहे। मगर आज वह अपनी ही सरकार की संगीनों के आगे अपने खून पसीने से किये गये उत्पादन के बाजिव मूल्य मांगते-मांगते अपने जीवन की लड़ाई हार गये और हमेशा के लिये शांत हो गये। सं या जो भी रहे, मगर म.प्र. के मंदसौर जिले में घटी इस लोमहर्षक घटना से सारा प्रदेश ही नहीं समुचा देश स्तव्ध है।  
          अपने हक  के लिये संघर्षरत अन्नदाताओं को क्या पता था कि वह जिस संघर्ष के रास्ते चल निकले है उस पर मौत उनका इन्तजार कर रही है और हुआ भी वही जो नहीं होना था मगर कहते है कि काल के आगे किसकी चली है। मगर जो काला धाग आज म.प्र. के माथे पर लगा है जिस भी संगीन की गोलियों ने अन्नदाता का सीना छलनी किया है इतिहास उसे हमेशा याद रखेगा। और अन्नदाताओं की वह चींख पुकार भी शायद अन्नदाता कभी नहीं ाूलेगा जो उसने मंदसोर जिले में देखी और सुनी होंगी। आखिर इतनी बड़ी चूक उस सरकार से अन्नदाताओं के साथ कैसे हो गई जिनकी आय दोगुना करने वह ऐड़ी चोटी का जोर लगाने का दावा आज तक करती रही। 

        बेहतर होता कि सरकार आंदोलित अन्नदाता से संवाद कायम कर, कोई सार्थक कदम उठाती तो आज उसे यह दिन नहीं देखना पड़ता, जो दिन आज समुचा प्रदेश हीं नहीं, देश को देखना पड़ा है।
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