क्या कॉग्रेस मुक्त भारत के दो ही मुख्य आधार हैं सिंधिया और गांधी परिवार

व्हीएस भुल्ले, विलेज टाइम्स : अब सत्तावत सियासतों का संपूर्ण सच तो वह आक्रमक सियासतदार या वह दल ही जाने जो देश में कॉग्रेस मुक्त भारत का इकबाल बुलन्द कर सीधे तौर पर सिंधिया और गांधी परिवार पर निशाना साधे हुये है। फिर माध्यम व्यक्तिगत सियासी आरोप हो या फिर सत्तावत सियासी हनक, सच तो यह है कि सत्तावत सियासत का ऐसा चेहरा देश की आवाम शायद पहली मर्तबा देख रही हो। ऐसा नहीं, आजादी से लेकर आज तक कई ऐसे उदाहरण देश के सामने रहे है। जब सत्तावत सियासतों ने अपने विरोधी दलों की कमजोरियों का लाभ उठा उन्हें ठिये ठिकाने लगाने संगठनात्मक, वैचारिक आधार या फिर सत्तावत संस्थाओं का उपयोग किया हो। 

मगर यह हमारे देश में आक्रमक सियासत या प्रतिशोधात्मक सियासत का यहीं मात्र व्यक्तिगत अनूठा मसला नहीं इससे पूर्व भी सतत सत्ता तथा अपनी सियासी ताकत बढ़ाने के लिये लोग सियासी दांव पैच चलते रहे है। मगर हालिया कॉग्रेस मुक्त भारत के नारे के बीच गांधी, सिंधिया परिवार पर होने वाली आरोपित सियासत को लेकर है। एक ओर सिंधिया पर सीधे आरोप लगा सियासी दबाव बनाया जाता है। तो वहीं दूसरी और नये-नये मुद्दें उछाल गांधी परिवार की सियासी घेराबंदी कर सीधे तौर पर उसे बदनाम करने का प्रयास किया जाता है, जो कि फिलहाल देश भर में चर्चा का विषय है। ये अलग बात है कि सत्तावत राजनीति की नियति हमेशा से साम, दाम, दण्ड, भेद की रही है जिनके सहारे सत्ताये समय-समय पर स्वयं को संरक्षित सुरक्षित कर अपनी सियासी शक्तियां बढ़ाती रही है।

खासकर लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह सियासी कार्य वैचारिक व दलगत आधार पर चलता रहा है। मगर व्यक्तिगत तौर पर जिस तरह से सियासत अपने गहरे पैर जमाने की मनह स्थिति में फिलहाल दिखती है वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये चिन्ता का विषय हो सकता है। वह भी तब की स्थिति में जब देश को राज नहीं, राष्ट्र, जनकल्याण नीति की सख्त जरुरत हो। जो किसी भी मजबूत लोकतंत्र और खुशहाल राष्ट्र का आधार होती है। फिलहाल तो सत्तावत राजनीति का संदेश साफ है कि सत्तावत सियासत के लिए यही संस्कृति आगे भी चलेगी। जिसका प्रभाव दक्षिण के सीमावर्ती राज्य आंध्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पूरब में पश्चिम बंगाल और पश्चिम व मध्य के उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, मप्र, छत्तीसगढ़ सहित उत्तर के दिल्ली, हिमाचल, तक देखने मिलें तो कोई अतिश्योक्ति न होगी।
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