विलेज टाइम्स ने कराया ग्वालियर के गौरव का ज्ञान (खबर का असर),

पीएम मोदी ने सिंधिया राज घराने के कार्यो को सराहा राज घरानों पर होने वाली टिप्पणियों से प्रधानमंत्री मोदी असहमत 
व्ही.एस.भुल्ले, म.प्र. ग्वालियर- ज्ञात हो अटेर विधानसभा उपचुनाव के दौरान सिंधिया राज घराने को लेकर म.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा की गई टिप्पणी कि भिण्ड की जनता पर अंग्रेजों से मिलकर सिंधिया राज घराने बड़ा अत्याचार किया है। यह मामला उपचुनाव के दौरान सुर्खियों में भी रहा। जिस पर विलेज टाइम्स ने लगातार 4 आर्टिकल तथ्यों एवं व्यवहारिक द्वष्टिकोण के साथ प्रकाशित किये। इसके अलावा विलेज टाइम्स ने प्रधानमंत्री जी के उस बयान को भी दौहराया जो उन्होंने विजय यात्रा के दौरान राजमाता विजयाराजे सिंधिया की कर्म भूमि शिवपुरी में चुनावी सभा को संबोधित करते हुये दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि स्व. राजमाता साहब के कार्यो को न तो यह क्षेत्र, न ही भाजपा का कार्यकर्ता कभी भुला सकता है। जबकि म.प्र. के मुख्यमंत्री ने चुनाव में सिंधिया राजवंश को अंग्रेजो के साथ भिण्ड की जनता पर अत्याचार करने वाला ठहराया था। 

अब जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक मर्तवा फिर से सिंधिया राजवंश द्वारा शिक्षा, धर्म, परिवहन एवं अन्य जनसेवा सुविधा के कार्य उन्हीं के कार्यकाल के दौरान करने की बात, संसद शस्त्र के समापन के दौरान कही है। इतना ही नहीं उन्होंने तत्कालीन राजवंशों पर हो रही टिप्पणियों पर भी अपनी असहमति व्यक्त की है।इससे साफ हो जाता है कि स्वार्थ सिद्ध सत्ता के मद में चूर लोग जीत हार के लिये किस सीमा तक जा सकते है। काश म.प्र. के मुख्यमंत्री ने ठीक से इतिहास पढ़ा होता तो उनके स्वर्णिम कार्यकाल में यह काला धब्बा न लगा होता। बहरहाल जो भी हो विलेज टाइम्स की पहल एक मर्तवा फिर से रंग लाई और लोगों को भी ग्वालियर के गौरव का ज्ञान कर पायी।  

सच के समर्थन पर प्रधानमंत्री को धन्यवाद- स्वराज 
विलेज टाइम्स,  म.प्र. ग्वालियर- मामला ग्वालियर के गौरव और इतिहास से छेड़छाड़ का है, जैसा कि लोकसभा सत्र समापन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने सच के साथ खड़े रहते हुये कहा कि राजघरानों को लेकर टिप्णणियों से वह सहमत नहीं, इतना ही नहीं उन्होंने सिंधिया राजघराने के अपने राज्य के प्रति विकास के योगदान को भी सराहा, उन्होंने कहा कि उस जमाने में रेल कन्या विद्यालय मन्दिर जैसे विभिन्न निर्माण कर्सो को कराया जो सराहनीय है। 

ज्ञात हो कि स्वराज ने भी इतिहास से छेड़छाड़ और महापुरुषों के खिलाफ भ्रामक, तथ्यहीन टिप्पणियों को गलत ठहराया था साथ ही आगाह भी किया था कि इतिहास की गलत व्याख़्या  भ्रामक जानकारियां खतरनाक साबित हो सकती है। अब जबकि स्वयं प्रधानमंत्री ने यह साफ कर दिया। कि सिंधिया राजवंश की कार्यप्रणाली आम जनता व क्षेत्र के प्रति कैसी रही है, तो सारे सवाल स्वत: ही नेपथ्य में चले जाते है। 

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