लठ्ठ के भरोसे समस्या समाधान सडक़ पर कुटता राज्य का गौरव, कराहती पीडि़त मानवता की गुहार

विलेज टाइम्स, म.प्र. भोपाल - आये दिन अपनी मांगों को लेकर म.प्र. राजधानी भोपाल में लगने वाले जमघट में, किसकी मांगे कितनी जायज, कितनी नाजायज...

विलेज टाइम्स, म.प्र. भोपाल- आये दिन अपनी मांगों को लेकर म.प्र. राजधानी भोपाल में लगने वाले जमघट में, किसकी मांगे कितनी जायज, कितनी नाजायज है, यह तो सत्ताधारी दल या वह संगठन ही जाने। जो अपनी मांगे लेकर प्रदर्शन करने भोपाल चले आते है। मगर विगत वर्षो से भोपाल की सडक़ों पर मांग कर, अपनी समस्याओं का समाधान खोजने वाले सत्ता, संगठनों की संघर्षमयी लड़ाई में, बेरहम लठ्ठयाई, आखिर म.प्र. की पीडि़त मानवता को क्या संदेश देना चाहते है, यह तो वहीं ही जाने। मगर मां नर्मदे के जिस भू-भाग पर जायज मांग और नैसर्गिक अधिकारों का समाधान सरेयाम सडक़ों पर लठ्ठयाई से हो रहा हो, एवं जो लोग अपने कर्तव्य भूल, अपने अहम अहंकार में डूबे हो तथा लोकतंत्र में चौथा स्तम्भ माने जाने वाला तथाकथित मीडिया मुंह मांगा माल कबाड़, अपना मुंह बन्द रखने का उत्तरायित्व निभाने मशगूल हो। ऐसे में बोने पड़ें, विपक्ष के कारनामों ने तो समुचे लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है।

यहां हम बात कर रहे है शान्ति के टापू कहे जाने वाले उस म.प्र. की जहां की कृषि विकास दर विगत वर्षो से अच्छे-अच्छे राज्यों को पछाड़ रही है। मगर म.प्र. की पीडि़त मानवता का दर्द यह है कि उसकी मदद के लिये जो उम्मीद विपक्षी दलों से थी, वह भी चारो खाने चित पड़ी है। रही-सही कसर म.प्र. की तथाकथित बिकाऊ मीडिया ने पूरी कर दी, जो अपने धर्मको भूल भोपाल की सडक़ों पर पिटने वाली पीडि़त मानवता का दर्द दिखाने में अक्षम रही है। फिर कारण जो भी रहे हो। अगर विधानसभा के सचेतक बाला बच्चन द्वारा विधानसभा प्रश्र के माध्ययम से हासिल जानकारी का संज्ञान ले तो म.प्र. की सरकार द्वारा माल कबाड़ू मीडिया को मुंह भर, विज्ञापन के नाम सेकड़ों करोड़ रुपया लुटा, प्रदेश मेें एक इतिहास कायम किया है। जिसमें सरकार के अघोषित शुभचिन्तक अखबार, चैनलों को करोड़ों के विज्ञापन एवं पत्रकारों को सस्ते दामों पर बेसकीमती प्लाट एवं सोशल मीडिया की आड़ में लाखों के विज्ञापन इस बात के गवाह है कि सत्ता किस दिशा में जा रही है।  

जिस तरह से सत्ताधारी दल द्वारा विपक्ष के बोनेपन और तथाकथित माल कबाड़ू मीडिया का आचरण देख अपने कार्यकत्र्ताओं की घोषित अघोषित तौर पर नियम कानून, नीतियां, योजना बना लाभन्वित किया गया है। इतना ही नहीं केन्द्रीयकृत खरीद व ठेका प्रणाली के प्रचलन के चलते जिस तरह का दब-दबा इस व्यापार में सत्ताधारी दल के नेता और कार्यकत्र्ताओं का बड़ा है, वह किसी से छिपा नहीं। फिर चाहे वह प्रदेश भर में खरीदें गए क प्यूटर, लेपटॉप, मोबाइल या फिर अन्य ठेके रहे हो। जिसमें कॉल सेन्टर से लेकर कई विभागों में समस्या समाधान के नाम पर शुरु किये गये प्रकल्प भी है। कहीं, न कहीं औपचारिक अनौपचारिक तौर पर सत्ताधारी दल के नेता और कार्यकत्र्ताओं की संल्पिता स पन्नता में स्पष्ट परिलक्षित दिखाई पड़ती है। 

जिस तरह से अधिकारी, कर्मचारी को वेतन भत्तों के नाम पर विगत 10 वर्षो में पीडि़त मानवता के धन का दुरुपयोग चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं। फिर चाहे वह अन्तोदय मेले, किसान स मेलन, पंचायतीराज स मेलन, बटोना बाटू योजनाओं के शुभआर भ के जलसे या फिर प्रदेश भर से ढोकर ला, भोपाल में होने वाली वि भिन्न वर्ग की पंचायतों, सम्मान हो। यह देखकर जब भी सरकार की नीतियों कार्यप्रणाली से असहमत लोगों का हुजूम अपनी समस्याओं को लेकर भोपाल की सडक़ों पर पहुंचता है तो सत्ताधारी दल की पुलिस बजाये बातचीत के लट्टों से समस्या, समाधान में जुट जाती है। जिसकी खबरे म.प्र. दूर-दूरांचल ही नहीं, भोपाल में ही लोगों को तथाकथित माल कबाडू मीडिया की सरकार के प्रति अगाध निष्ठावश नहीं देखने सुनने मिल पाती है।  
फिर चाहे वह संविदा कर्मी, अध्यापक, त्रिस्तरीय पंचायतीराज के चुने हुये जनप्रतिनिधि हो या फिर विपक्षी दलों के नेता, राजनेता रहे हो। सभी को लठ्ठयाई कर, पुलिस द्वारा खदेड़ दिया जाता है। और सरकार की तरफ से कोई बयान भी नहीं आता है। 

अफसोस कि जहां दिल्ली सरकार के मुखिया के दल से तो उप राज्यपाल 95 करोड़ के विज्ञापनों की वसूली के आदेश कर देते है। मगर म.प्र. में मीडिया को विज्ञापनों के नाम बटे पीडि़त मानवता की गाड़े पसीने की कमाई सेे सेकड़ों करोड़ रुपये वेतन भत्ते और कार्यकत्र्ताओं को पेन्शन के रुप में बांट दिये जाते है, मगर सब चुप है। कौन नहीं जानता कि किस तरह से विगत 10 वर्षो से टेक्स में मिलने वाली गरीब जनता की गाड़ी कमाई के रुप में प्राप्त धन से सरकार, विभिन्न योजनाओं के माध्यमों से सम्मेलनों पंचायतों, मेलो, यात्राओं के नाम पर सत्ताधारी दल अपने राजनैतिक मंसूबे को पूर्ण करने में लगा है। जिनमें खुलेआम रुप से प्रशासनिक मशीनरी का उपयोग किया जाता रहा है और वह क्रम आज भी अनवरत जारी है।  

बहरहाल सच जो भी हो, मगर इस सबके चलते इतना तो तय है कि कहीं न कहीं म.प्र की पीडि़त मानवता के साथ एक बड़ा छल हो रहा है। और आजाद भारत के इतिहास के एक बड़ा मजाक भी, आज आम बुद्धिजीवी भी यह सोचने पर मजबूर है कि कहीं म.प्र. की व्यवस्था नाजीवादी या फिर फासिट वाद की ओर तो नहीं बढ़ रही। जो प्रदेश की भोली भाली पीडि़त मानवता को तत्कालीन राहत के साथ एक बड़े अंधकार की ओर धकेल रही है। 

COMMENTS

Name

तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
ltr
item
Village Times: लठ्ठ के भरोसे समस्या समाधान सडक़ पर कुटता राज्य का गौरव, कराहती पीडि़त मानवता की गुहार
लठ्ठ के भरोसे समस्या समाधान सडक़ पर कुटता राज्य का गौरव, कराहती पीडि़त मानवता की गुहार
https://4.bp.blogspot.com/-LjdWw_85MmA/WOD374fib1I/AAAAAAAACfw/RO93RIuaKKQKNCBAihFnOG-8IK8DqZeVQCLcB/s400/aam%2Baadmi%2Bcopy.jpg
https://4.bp.blogspot.com/-LjdWw_85MmA/WOD374fib1I/AAAAAAAACfw/RO93RIuaKKQKNCBAihFnOG-8IK8DqZeVQCLcB/s72-c/aam%2Baadmi%2Bcopy.jpg
Village Times
http://www.villagetimes.co.in/2017/04/blog-post.html
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/2017/04/blog-post.html
true
5684182741282473279
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy