चौकाने वाले परिणामों का पक्षधर रहा उ.प्र. क्या युवा तय करेगें उ.प्र. का भविष्य

व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स - भले ही विश्लेषण में उलझें एग्जक्ट पोलो का सच 5 राज्यों में हुये विधानसभा चुनावों को लेकर जो भी हो। मगर जीत पर मोहर गांव, गली की उस तरुणाई की ही लगना तय है। जिसने इन चुनावों में जनाकाक्षांओं को तार-तार होते देखा है। या फिर वर्षो से देखते भोगते चले आ रहे है। अब ऐसे में सभी को इन्तजार है तो 11 मार्च के उस दिन का जब परिणाम तय करेगें कि युवा तरुणाई का इस चुनाव में मिजाज क्या रहा।

क्या इन प्रदेशों में जागरुक युवा तरुणाई यह तय कर सकी कि अब उसे जुमले, जाति, धर्म, क्षेत्र जैसे जुमले उन्हें उनके स पूर्ण विकास की आकाक्षांओं को पूर्ण करने से नहीं रोक सकते। जहां तक पंजाब का सवाल है तो किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि जिस तरह के आंकड़े एग्जक्ट पोल विश्लेषण बता रहे है और युवा तरुणाई का दखल ठीक ठाक रहा। तो बेसिक बात यह है कि कई वर्षो तक कॉग्रेस और विगत वर्षो में भाजपा अकाली गठबन्धन सरकारों का कार्य देखा है। अगर ऐसे में पंजाब की जनता ने नया प्रयोग किया तो निश्चित ही परिणाम आम आदमी के पक्ष में जा सकते है।

वहीं उत्तराखण्ड, गोवा में खासा फलो न होने के चलते मामला उन्नीस बीस ही रहने वाला है। क्योंकि यह दोनों ही नहीं मणीपुर भी छोटा राज्य है जहां इनकमेन्सी भी हो सकती है, और न भी। मगर गांव, गली की आकांक्षाओं को लें, तो उत्तराखण्ड और गोवा में सत्ता परिवर्तन हो जाये तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। 

मगर सबसे बड़ी रस्सा कसी तो उ.प्र. की 403 विधानसभा सीटों के परिणामों को लेकर है। जहां विश्लेषित आंकड़े त्रिशंकू की बात बताते नहीं थक रहे। मगर उ.प्र. में बनी विगत दो सरकारों के परिणामों को भी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। जब बसपा, सपा, की सरकारें कई कयासों के बीच पूर्ण बहुमत से बनी। 

इसमें कोई संदेह नहीं, कि जितनी मेहनत और पूर्ण रणनीति के साथ भाजपा मैदान मेें उतरी शायद उतनी तैयारी, साम, नाम, दण्ड, भेद के आधार पर अन्य दलों की नहीं रही, जो उसके  रहे। क्योंकि 7 चरणों में होने वाले चुनावों में हर चरण में नई रणनीति के साथ जो केम्पन उसने नये-नये मुद्दे उठाकर किया शायद अन्य दल उन मुद्दों का सटीक जबाव नहीं खोज सके। 

दूसरा कारण जिस रणनीत के साथ भाजपा देश भर में बढ़ रही है शायद उस रणनीत का जबाव भी क्षेत्रीय दल होने के कारण प्रमुख प्रतिद्वन्दी दल नहीं खोज पाये। विकास का नारा दें, विकास के मुद्दे से इतर मार्मिक मुद्दों पर जो वोटों का धुव्रीकरण और अलग-अलग जगह अपने प्रतिद्वन्दी दलों पर मानसिक दबाव बनाने में जिस तरह भाजपा कामयाब रही। जिसके चलते हर चरण में कै पेन में प्रतिद्वन्दी दलों को खासा नुकसान हो सकता है। 

मगर इस सबसे इतर अगर युवा वर्ग, विकास के मुद्दें पर एक हुआ है तो सपा, कॉग्रेस, गठबन्धन को लाभ होना तय है। अगर युवाओं ने तत्कालिक व पूर्व सरकारों की कार्य प्रणाली पर विरोधी रुख अपना नई पार्टी को कमान देने का मन बनाया है, तो निश्चित ही भाजपा को बड़ा लाभ होने वाला है। शायद 7 चरणों में इस चुनाव में भाजपा ने प्रतिद्वन्दी दलों की उन कमजोरियों का भरपूर लाभ उठाने का प्रयास किया जिसके अन्तरद्वंद  में वह पूर्व से उलझे रहे है। 

मगर उ.प्र. के चमत्कारिक परिणामों में सबसे अहम भूमिका युवाओं की ही रहने वाली है और गांव, गली उन गरीबों की जो अब सिर्फ सपने ही नहीं, उन सपनों को वह साकार होते भी देखना चाहते है। मगर पूर्व परिणाम बताते है कि वर्तमान परर्फोमेन्स सपा, कॉग्रेस गठबन्धन के चलते उसे कोई बड़ा नुकसान नहीं होने वाला। अगर युवाओं का साथ और विकास इस चुनाव में बड़ा मुद्दा रहा है तो।
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