सांसत में जनभावना, सिंधिया से चमत्कार की उम्मीद

विलेज टाइम्स। अगर कॉग्रेस आलाकमान ने संसद में कॉग्रेस के सचेतक और गुना सांसद को उत्तरप्रदेश चुनाव पश्वात म.प्र. की बागडोर सौंपने का मन बना लिया है। तो शैया पर पड़ी कॉग्रेस में जान फूकने ज्योतिरादित्य सिंधिया संजीवनी साबित होगें। जैसी कि समुचे मप्र में चर्चा सरगर्म है। मगर इस निर्णय सबसे बड़ी उम्मीद प्रदेश की जनभावनाओं को कॉग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से कुछ अधिक है। जिस तरह से वह पूर्व में अपने निर्णयों से चौकाते रहे है। अगर मप्र में भी कॉग्रेस को लेकर वह कोई चमत्कारिक निर्णय ले, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। 

देखा जाये तो विगत 13 वर्षो से सत्ता के गलियारों में धक्के खा गांव, गली की खांक छानती कॉग्रेस के पास अनुभव तो है। मगर उसके पास कोई ऐसा चमत्कारिक नेतृत्व नहीं, जिस पर वह 2018 का दांव लगा सके। अगर 13 वर्षो से सत्ता से बाहर कॉग्रेस को जनाकांक्षाओं अनुरुप ज्योतिरादित्य सिंधिया के रुप में चमकदार नेतृत्व मिलता है, तो भाजपा से 2018 में कड़ा मुकाबला तय है।  

हालाकि ज्योतिरादित्य का संभावित नाम समझ भाजपा ने ताबड़ तोड़ तरीके से सिंधिया की घेराबंदी शुरु कर दी। और उन्हीं के संसदीय क्षेत्र में संघ के कार्यकत्र्ता को रेबडिय़ों की तरह लाल बत्तियां बांटना शुरु कर दी है। जिसके पीछे कॉग्रेस के ही अन्दर और बाहर भी सिंधिया की घेराबंदी का दौर शुरु हो चुका है। 

अगर सूत्रों की माने तो पूर्व की भांति भाजपा और भाजपा सहयोगी कुछ कॉग्रेसी इस मर्तवा भी सिंधिया को रोक आलाकमान को भ्रमित करने में सफल रहे, तो चौथी मर्तवा भी म.प्र. में भाजपा की ही सरकार बनी तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। 

बेहतर हो कि राहुल मप्र को लेकर निर्णय जल्द ले, जिससे भाजपा के 1 वर्ष पूर्व से पुन: सत्ता में काबिज होने के मंसूबो पर रोक लगा, सत्ता परिवर्तन का मार्ग कॉग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे चमकदार नेतृत्व के साथ प्रस्त कर सके, जो म.प्र. की जनभावना और जनाकांक्षा अनुरुप होगा, जो विगत वर्षो से अपेक्षित है। मगर लगता नहीं कि भाजपा अपने प्रतिद्विंदी के प को कोई ऐसा मौका दे, जो उसे पुन: सत्ता में लौटने की राह में बाधा बने।   

क्या भविष्य का नेतृत्व मातृ-शक्ति के हाथ होगा
विलेज टाइम्स/मप्र/शिवपुरी। गांधी, जवाहर, इन्दिरा, लोहिया, अटल, मोदी सभी का साथ देश की जनता ने बगैर राग द्ववेश, धर्म-जाति पाति के दिया है। जिसमें एक बड़ा योगदान मातृ-शक्ति का भी रहा है। यूं तो समय वेसमय बदलाव के कारण जो भी रहे हो। मगर इतना तय है कि देश में अगर कोई अगला बदलाव आता है तो उसमें ही मातृ-शक्ति की भूमिका अहम होगी, तो कोर्ई अतिसंयोक्ति न होगी। हो सकता है यह बदलाव भारत वर्ष की सीमाओं तक सीमित न रहे और समुचे विश्व को दिशा देने की ओर अग्रसर रहे। 

क्योंकि प्रकृति से लेकर जल, नभ, थलचरो में मातृ-शक्ति का त्याग उसका प्रेम और उसका मार्गदर्शन ही अनादिकाल से सर्वोच्च सर्वमान्य रहा है। जिसे कभी झुठलाया नहीं जा सकता, जो आदि, अनादि, सर्वोच्च शक्ति, शान्ति, प्रेम और संरक्षण की मिशाल रही है। जिस शक्ति का धैर्य, जीवटता का लोहा, नभ, जल, थल चर में हमेशा से मान्य और सर्वोच्च सत्य के रुप में स्थापित रहा है। इतिहास और हमारे धर्म ग्रन्थ आज भी इस बात के गवाह है।  और नभ, जल, थल चरों का जीवन आज उस सत्य का प्रमाण है जिसके लिये मातृ-शक्ति को महान कहा गया है। 

अगर आज महिला दिवस के दिन मातृ-शक्ति का कर्ज उतारने हम मद्यपान निषेध के संकल्प के साथ सत्ता और समाज में बढ़, कोई बड़ा बदलाव कर पाये, तो यह मानव जाति ही नहीं, मातृ-शक्ति की सन्तान के रुप में मानव होने का सबसे बड़ा कार्य होगा, जिसे पीढिय़ां याद रखेगीं
जय स्वराज 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment