कॉग्रेस: अहम निर्णय की दरकार

वीरेन्द्र शर्मा। लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्ष विचार, विकास के मुद्दों को लेकर मु बई महापालिका सरकार के गठन में कॉग्रेस की भूमिका क्या हो, यह चर्चा देश भर में सरगर्म है? वहीं 8 मार्च को उ.प्र. मणीपुर में खत्म हो रहे, विधानसभा चुनावों में कॉग्रेस की परफोरमेन्स को लेकर भी लोग के मन में कई सवाल बने हुये है। 

मगर फिलहाल तो 5 राज्यों में चल रहे चुनाव का परिणाम भले ही 11 मार्च को देश के सामने आने वाले हो, जिसमें कॉग्रेस, सपा. गठबन्धन से लेकर ब.स.पा, भाजपा अपने-अपने जीत के दावे ठोक रहे है। मगर सबसे गरमागरम बहस मु बई महापालिका में कॉग्रेस सहित शिवसेना, भाजपा व अन्य दलो को मिले जनादेश को लेकर है। जिसमें शिवसेना सबसे बड़े बहुमत के साथ पहले न बर पर है। वहीं भाजपा दूसरे और कॉग्रेस तीसरे न बर पर मु बई महापालिका की सरकार को लेकर इतना तो तय है। कि शिवसेना ही मु बई की सिरमोर बनेगी। मगर सहयोगी कौन होगा। फिलहाल तय नहीं। मगर जिस तरह की चर्चाये राजनैतिक हल्कों में की शिवसेना और भाजपा को लेकर है उसे सुनकर यहीं अनुमान लगाया जा सकता है कि शायद ही शिवसेना, भाजपा से मिलकर सरकार बनाये। फिलहाल दोनों के बीच जिस तरह की तल्खी सहयोग को लेकर दिखाई दे रही है, उसे देखकर कॉग्रेस को उसकी अहम भूमिका के लिये उसे उत्साहित करती है। 

अगर कॉग्रेस अपने वैचारिक आधार पर धर्म निरपेक्षता, लोकतंत्र, विकास के मुद्दे पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर मु बई की जनता द्वारा दिये गये जनादेश का स मान करती है। और शिवसेना को समर्थन देती है, तो उसके लिये हो सकता है, कि यह निर्णय उसे दूर की कोणी साबित हो। जिस तरह से कॉग्रेस ने उ.प्र. में अपनी धुर विरोधी सपा. के साथ गठबन्धन किया है। उसके चलते राजनैतिक तौर पर कॉग्रेस 11 मार्च के बाद मु बई महापालिका में शिवसेना की सरकार को फलोर पर जनतांत्रिक उदद्देश्यों को पूर्ण करने, समर्थन का अहम अधिकार मु बई की जनता द्वारा चुने गये कॉग्रेस प्रतिनिधियों को दें, दे वह भी लोकतांत्रिक आधार पर तो हर्ज ही क्या? क्योंकि जनता व जनप्रतिनिधियों के लोकतांत्रिक अधिकारों व लोकतंत्र का सरंक्षण ही कॉग्रेस का वैचारिक आधार है और पीडि़त मानवता का विकास ही उसका धर्म है, देखना होगा, कि राहुल मु बई महापालिका और मु बई के जनादेश को लेकर क्या निर्णय लेती है। 
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