आबकारी : बड़े राजस्व नुकसान की संभावना

विलेज टाइम्स/भोपाल। भले ही आबकारी विभाग द्वारा विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते वर्ष 2017-18 के लिये होने वाले शराब ठेको के माध्ययम से बड़ा राजस्व कमाने आबकारी नीति 2017-18 बनाई हो। मगर ठेकेदारों द्वारा कई जिलों में दुकानों का रिन्यूबल न कराने के चलते सारी मंशा धरी की धरी रह गयी। जिसके चलते विभाग को उज्जैन सहायक आयुक्त व दतिया जिला आबकारी अधिकारी को हटाना पड़ा। इसमें वो लोग बच गये, जिन्होंने कुछ सस्ती दुकानों को रिन्यूबल करा लिया।  

ज्ञात हो कि गत वर्ष 2016-17 में विभाग को म.प्र. से लगभग साढ़े सात हजार करोड़ का राजस्व मिलना है। मगर वर्ष 2017-18 की नीति अनुसार प्रदेश भर में अधिकांश शराब ठेको के रिन्यूबल न होने के चलते विभाग की नीति अनुसार 9 फरवरी को रिन्यूबल पश्चात शेष दुकानों के लिये लॉटरी पद्धति से दुकाने दी जानी है। 

अगर उसके बाद भी शेष दुकाने बचती है तो 23 फरवरी को नीति अनुसार ई-टेन्डरिंग के माध्ययम से दुकाने दी जायेगीं। मगर जिस तरह से ठेकेदारों में एका एवं बड़ी दरों के साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन से लगता नहीं कि इतनी आसानी शराब दुकाने उठ जायेगीं। 
    अपुष्ट सूत्रों की माने तो कई जिलो में विभाग के कुछ अधिकारियों की ठेकेदारों से साठ-गांठ की खबरों के चलते बड़े पैमानों पर राजस्व के नुकसान और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की स भावना है। 
       ये अलग बात है कि म.प्र. आबकारी के तेज तर्रार प्रमुख सचिव के निर्देश पर कई जिलों में ठेकेदारों पर शिकंजा कसने भोपाल, फलाइंग स्कॉट द्वारा बड़े ठेकेदारों की दुकानों की चैंकिंग की जा रही है। जिसके तहत दतिया, ग्वालियर सहित शिवपुरी जिले में सेन्ट्रल फलांइग स्कॉट द्वारा कार्यवाहीं की गई है। 
      बहरहाल देखना होगा कि 9 फरवरी को होने वाले लॉटरी सिस्टम में विभाग को कितनी सफलता मिल पाती है। 
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