जंग, पीडि़त मानवता, विकास, विश्वास पर हो: उ.प्र. का सिरमोर कौन होगा, गांव, गली, गरीब, युवा पर निर्भर

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स। 3 चरण के चुनाव पश्चात 7 चरणों में पूर्ण होने वाले उ.प्र. के चुनावों में उ.प्र. का सिरमोर कौन होगा यह तय करने में गांव, गली, गरीब, युवा की भूमिका अहम होगी। क्योंकि जाति, धर्म, व्यक्तिगत सार्वजनिक स्वार्थो से बढक़र पीडि़त मानवता की सेवा के लिये इन्सानियत होती है। जिसके लिये अनादिकाल से त्रषि मुनियो एवं देश की विभिन्न विभूतियों ने अनवरत संघर्ष किया। अब इसे सौभाग्य कहे या र्दुभाग्य की विश्च के महान भू-भाग के एक प्रदेश का भविष्य एक ऐसे चौराहे पर आ खड़ा हुआ है। जहां विश्व विरादरी की निगाहें उस पर टिकी है। यूं तो उ.प्र. देश में जनसं या घनत्व के आधार पर सबसे बड़ा प्रदेश है। जो विगत ढाई दशक से जाति, धर्म आधारित राजनीति का शिकार हो। अब नई उड़ान भरने को तैयार है।  

मगर यह, इस पवित्र भू-भाग का सौभाग्य है कि जहां केन्द्र, राज्य के मु िाया विकास और विश्वास के पक्षधर होने के बावजूद भी, सत्ता के लिये अब तू-तू मैं-मैं में उलझ गांव, गली, गरीब, युवाओं को व्यवहारिक आयना दि ााने पर तुले है। चुनाव तो हर 5 वर्ष में होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। मगर उस गांव, गली, गरीब, युवा का क्या जो ऐसे अद ाुत नेतृत्वों में अपना अक्स खोज रहा है। 

बेहतर हो कि उ.प्र. का गांव, गली, गरीब इतिहास को आयना दिखाने ऐसी लकीर अपने अमूल्य मतदान से खींंचे की विश्व विरादरी स्वयं को ठगा सा महसूस कर, इस महान भारत के गुण गान करने पर मजबूर हो जाये। मगर यह तभी स भव है जब गांव, गली, गरीब, युवाओं के झुण्ड इस चुनावी महाकुंभ में अपनी महानता के साथ अपना कत्र्तव्य भी निभायें। तथा विश्व विरादरी सहित देश के दल, नेताओं को बतायें कि पीडि़त मानवता की सेवा के लिये अपनी जान की बाजी लगाने वाली विभूतियों की सं या अनगिनत है। इतना ही नहीं देश की आजादी के लिये कुर्बानी देने वालों की शहादतें भी बुहत है, जो ऐसे ही बेकार नहीं जाने दी जायेगी। और यह तभी स भव है, जब हम एक अच्छे और सच्चें लोकतंत्र के साथ अपना जीवन खुशहाल बना अपनी आने वाली पीडि़तों के भविष्य को सुरक्षित कर उसे स पन्न बनायेंं। फैसला उ.प्र. के नागरिक को करना है, कि हमारा भविष्य और पहचान क्या हो। 

निश्चित ही राजनैतिक तौर पर जागरुक उ.प्र. की जनता एक सटीक निर्णय अपने मतदान के माध्ययम से देगी। जिसका फैसला आने वाले भविष्य में होना तय है। कि वह उ.प्र. में किस तरह की राजनीति चाहती है। 
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