भले इन्सान की मेहनत पर कालिख: गुटों में बटी कॉग्रेस को राहुल की दरकार

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स। कॉग्रेस आलाकमान म.प्र. में पुन: अपना ओहदा हासिल करने, बगैर रणनीत के, कितने ही अथक असफल प्रयास कर ले। मगर वर्तमान हालातों के मद्देनजर लगता नहीं कि कार्यकत्र्ता विहीन हो चुकी कॉग्रेस जंग से पहले अस्तित्व की जंग में तब्दील, जंगी प्रदर्शन के सहारे समुचे म.प्र. की जनता या सरकार को कोई स्पष्ट संदेश दे पायेगी। 

क्योंकि गुटों में बटी कॉग्रेस को अब राहुल की दरकार है। जब तक राहुल सीधे हस्तक्षेप कर म.प्र. कॉग्रेस को कोई स्पष्ट संदेश नहीं देते तब तक कॉग्रेस की बिना पर इसी तरह पूर्व की भांति खींचतान बनी रहेगी और चौथी मर्तवा भी म.प्र. में भाजपा की ही सरकार बनेगी। जैसी कि भोपाल ही नहीं समुचे म.प्र. में चर्चा है। 

अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो विगत 10 वर्षो से अघोषित तौर पर सत्ता की मलाई खाने वाले तथाकथित कुछ कॉग्रेसियों की मंशा है कि अगर प्रदेश की बागडोर उन्हें दरकिनार कर किसी होनहार लोकप्रिय नेता को सौंपी जाती है। तो ऐसे में चौथी बार भी भाजपा सरकार ही म.प्र. में काबिज रहे, तो हर्ज क्या? जिसके प्रमाण जंगी प्रदर्शन के एक दिन पूर्व ही जंग जाहिर हो समुचे प्रदेश में चर्चा का विषय है।  

अपुष्ट सूत्र तो चर्चा यहां तक है कि गुटों में बटी कॉग्रेस की मंशा कॉग्रेस हित में होती तो 10 रोज पूर्व ही समुचे प्रदेश में मीडिया ट्रायल के माध्ययम से जंगी प्रदर्शन बूम बन जाता। भले ही मीडिया सत्ता धारी दल के दबाव में कॉग्रेस को तबज्जों न देता, तो भी विज्ञापन के माध्ययम से कॉग्रेस सत्ताधारी दल की जनविरोधी नीतियों की बखिया उधेड़ आम जनता तक यह संदेश तो पहुंचाता कि कॉग्रेस जनहित, जनाकांक्षाओं के स मान में जंगी प्रदर्शन करने जा रही है। 

मगर इसके उलट हुआ यह कि एक ही प्लेन से भोपाल पहुंचने वाले नेता, हवाई अड्डे से एक ही वाहन में अपने-अपने गत य तक पहुंचने के बजाये अलग-अलग वाहनों में अपने गतव्य की ओर रवाना हुये। जो भोपाल ही नहीं अब समुचे प्रदेश में आग की तरह फैली खबर के चलते जन चर्चा का विषय है। 

ऐसे में म.प्र. को लेकर राहुल का सीधा हस्तक्षेप ही शैया पर पढ़ी कॉग्रेस में जान फूंक सकता है। बरना सत्ता में अघोषित भागीदारी का लाभ उठाने वालों की जमात कॉग्रेस की बिना पर सत्ताधारी दल से अघोषित, आदृश्य रुप से भागीदारी निभायेगी और 2018 में भाजपा की सरकार म.प्र. में पुन: नजर आयेगी। फैसला कॉग्रेस आलाकमान और राहुल को करना है और भाजपा सरकार के निशाने पर युवा नेतृत्व ज्योतिरादित्य सिंधिया है। 

ये सही है कि कॉग्रेस को अनुभव तकनीक रणनीतकारों की म.प्र. में स त जरुरत है और वह कॉग्रेस के अन्दर है मगर र्दुभाग्य कि वह एक नहीं, बरना कोई कारण नहीं जो म.प्र. में कॉग्रेस बेहतर प्रदर्शन न कर पाये, फैसला राहुल को लेना है। 
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