गांव, गली, गरीब के गुरुर का मजाक उड़ाता, अहम, अहंकार: क्या बेहरुपिया विधा को संरक्षण की जरुरत..........?

व्ही.एस.भुल्ले @तीरंदाज
भैया- काश मने भी बेहरुपिया बनने का गुर सीख लिया होता, तो सत्ता सिंहासन का मजा लूटने हारे महान लोकतंत्र में 10-15 वर्ष ही नहीं, पूरे 20 वर्ष तक सत्ता सुख भोग रिया होता। इतना हीं नहीं गांव, गली, गरीब के गाड़े पसीने की कमाई का कुछ हिस्सा हुक्का भरने वालो को, तो कुछ हिस्सा व्यवस्था जमाने वालो में बांट, हाथों हाथ अपना घर भी भर लिया होता। और मय अण्डी बच्चों के धन धान्य बन, स्वयं को महान सेवक बना लिया होता। 

भैये- जिस भू-भाग पर हारी देश भक्ति, जनसेवा वालो की समुची जमात सहित सी.आई.डी., एस.बी. एस.आई.टी सहित सी.बी.आई तक सत्य की खोजने में मगज मारी कर, हथियार डालने की मुद्रा में आ चुकी हो। ऐसे में सुरक्षा, संरक्षण पर वाद-विवाद फसाद ही नहीं बैमानी है। ऐसे में अगर चुने हुये प्रतिनिधियों को बेहरुपिया बन सफेद झूठ सफाई के साथ बोलने हाइटेक गुर सिखाने और सेवा के नाम गांव, गली, गरीब की भावनाओं की लूट छिपाने, नये-नये गुर सीखने सिखाने का दौर चल रहा हो। तो इससे बड़ा लोकतंत्र के साथ कोई और दूसरा मजाक नहीं हो सकता है। बोल भैये कैसी रही। 
भैया- इसीलिये तो मने बेहरुपिया विद्या का संरक्षण और स्वयं बेहरुपिया बनने का गुर अपने महा गुरुओं से सीखना चाहूं। तथा ओझल होती इस विद्या के सहारे ही सही कम से कम सत्ता सिंहासन तक पहुंचने की पहुंच तो बना पाऊं। फिर हारे महान शिवाजी की सल्तनत कायम कराने में भी तो एक बेहरुपिया की ही तो अहम भूमिका रही थी। 
भैये- मुये चुपकर गर किसी ने सुन लिया तो व्यापम की तरह ही थारी काठी उठने का कारण, न तो हारी जनसेवा देश भक्ति में जुटी फौज, न ही सी.आई.डी. एस.आई.टी, एस.बी, सी.बी.आई की प्रशिक्षित जमात भी नहीं खोज पायेगी। मने तो डर है, कि गर थारी काठी उठी, तो थारी काठी पर फिकने वाले मखाने तो मखाने चिल्लर लूटने वालो की शक्ल भी किलोमीटरों दूर तक नजर नहीं आयेगी। और नाते-रिस्तेदारों से मिलने वाले कफन की कीमत भी थारे जैसेे लोगो के बारिसो तक को नहीं मिल पायेगी। 
भैया- मने जाडू मगर कै करु, हारी काठी यह कतई मानने तैयार नहीं कि बिहार, पंजाब, उ.प्र., मणीपुर, गोवा, मु बई जैसी जगहों पर हारे राष्ट्र भक्तों की मण्डली से निकले नवाबों की फौज अब कोई नया निजाम खड़ा कर पायेगी। गंगा, जमुना तहजीव की कायल हारी महान मातृ भूमि आखिर इतना बड़ा अन्याय कैसे शह पायेगी। सो मने बेहरुपिया विद्या के संरक्षण का सवाल उछाला है। और यहीं वह विद्या है जिसका का आजादी से लेकर आज तक सत्ता की गलियों में बोलबाला है। 
                        जय जय श्रीराम, जय स्वराज 
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