ग्राम कोटरा कोटरी के आदिवासियों की व्यथा कथा

25 वर्ष बाद वोट, राशन मिला, मगर आज तक शिक्षा, बिजली, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ, सडक़ का न हो सका इतंजाम, आज भी जाना होता है पेयजल लेने 10 कि.मी.  
विलेज टाइम्स/मप्र/शिवपुरी। ये है म.प्र. शिवपुरी जिले की तेहसील कोलारस की ग्राम पंचायत दावा के ग्राम कोटरा कोटरी वन ग्राम का हॉल जहां वोट का हक व राशन कार्ड प्राप्त करने में 25 वर्ष लगे और आज राशन हासिल करने जिला मु यालय अपना दुखड़ा सुनाने शिवपुरी पहुंचे हजारी आदिवासी का कहना है कि विगत 25 वर्ष के संघर्ष के पश्वात पहली मर्तवा हमने गत ग्राम पंचायत चुनाव में पहली मर्तवा वोट डाला। शुद्ध पेयजल, बिजली, स्वास्थ सेवा ता दूर हमारे बच्चों को शिक्षा तक नसीब नहीं, आज भी हमें हमारे गांव तक पहुंचने या पेयजल के लिये 12 कि.मी. का पैदल सफर तय करना होता है, क्योंकि सडक़ नही। 

             राजस्थान की सीमा से म.प्र. को जोडऩे वाली शरहद में बसे इस वन ग्राम तक पहुंचने के लिये या तो बदरवास तेहसील से लग ाग 15-20 कि.मी. का रास्ता तय कर जाना होता है। या फिर राजस्थान के कस्बा थाना से नदी पार कर पहुंचना होता है। 
      घुमक्कड़ प्रवृति के ये आदिवासियों के लगभग 25 व भील जाति 25 परिवार इस गांव में रहते है। मगर उन्हें खुशी है कि गत वर्ष पहली मर्तवा उन्होंने मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द की फसल ली। ग भीर बीमारी पर शहर या कस्वा तक घर के किसी मरीज को लाने आज भी बेलगाड़ी का उपयोग करने वाले हजारी कहते है। कि हमारा काम चल रहा है । मगर हमारी ज्वार, बाजरा, मक्का, उड़द से छ: माह का काम तो चल गया। मगर राशन ने मिलने पर अब हमारे सामने अन्न के लाले है। 
                हजारी बताते है बैसे भी हमें रोज पेयजल के लिये लग ाग 10 कि.मी. दूर कूनो नदी तक जाना होता है। पशु पालक के रुप लगभग 100 गाय भैंसो के इस बन ग्राम का जीवन पूर्णत: प्रकृति आधारित है। मगर उनकी दिक्कत यह है कि उनके पास मजदूरी पर्याप्त फसल न होने के कारण उन्हें मजबूरन अन्नदम रोजगार के लिये जाना होता है। 
         बहरहाल जो भी हो, देखना होगा कि क्या 21वी सदी में इन्हें वह सुविधाये नसीब हो पाती है जिसका दम दिखाते हमारे नेता, सरकारें नहीं थकते।  
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