बालिका दिवस पर बोली, बालिकायें, स्वराज जीवन का अहम अंग

शिवपुरी। बालिका दिवस पर म.प्र. के शिवपुरी जिले की तेहसील कोलारस, बदरवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हाईस्कूल की छात्राओं ने चर्चा के दौरान कहा कि स्वराज जीवन का अहम अंग है। जो हमें अहिंसक, खुशहाल जीवन के साथ, एक मजबूत राष्ट्र बनाने में अपने योगदान के लिये मार्ग प्रस्त करता है। 

स्वराज विचार के मुख्य संयोजक के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान के करते हुये, कक्षा 12वी की छात्रा मनीषा आदिवासी, पूजा पाल, पूजा ओझा, अंकिता दांगी, भारती  जाटव, रिझा सिद्दकी, साक्षी गोयल तथा बदरवास में उपस्थित छात्रा कविता बेरागी, सोनम जोशी, लक्ष्मी सैन, मुस्कान बैरागी, रानी परिहार, दीक्षा कवीर, रचना, रंजनी आदिवासी, निकिता प्रजापति, ललिता प्रजापति एवं निशा परिहार ने कहा कि खुशहाल जीवन हर जीव का प्रकृति प्रदत्त नैसर्गिक अधिकार है। जिसे प्राप्त करने के लिये हमें अपने जीवन में स्वराज की कल्पना करना और पूरे निष्ठा से अपने कत्र्तव्यों का पालन करना, हमें महान राष्ट्र के महान नागरिक होने की ओर ले जाता है। 

इस मौके पर स्वराज के संयोजक सदस्य शिवशंकर शर्मा, बदरवास के वरिष्ठ पत्रकार संजीव जाट एवं नगर निरीक्षक पी.पी. मुदगल सहित अध्यापको में च पा लाल, चन्द्रभान जी के अलावा कोलारस में राजा बाबू आर्य, प्रदीप लुटोरिया सहित संजय शिवहरे इत्यादि ने भी अपने विचार व्यक्त कर सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को साझा किया। और बालिका दिवस पर सभी बच्चों को बधाई देते हुये बेहतर भविष्य के लिये द्रण संकल्पित होने का आव्हन किया।   

बालिका दिवस के मौके पर स्वराज मु य संयोजक वीरेन्द्र भुल्ले जी ने छात्राओं के बीच बच्चों से सीखे अपने अनुभवों को साझा करते हुये कहा कि हम उस महान भू-भाग के महान नागरिक है जहां कई विभूतियों ने जन्म लिया है और उनकी कर्म स्थली भी रहा है। जिस भू-भाग को परमपिता परमात्मा ने धन-धान्य होने के साथ खुशहाल बनाया है। हमें हमारे पूर्वज लाल-बाल, पाल, महात्मा गांधी, सुभाष बाबू, भगत सिंह, खुदीराम बोस, चन्द्रशेखर आजाद, चाचा नेहरु, पं. दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मु ार्जी, डॉ. लोहिया, जयप्रकाश नारायण, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी जैसे महान विभूतियों की मंशा अनुसार हमारा समाज और राष्ट्र को बनाना है। हर जीव का जीवन खुशहाल बनाना है, तो हमें जीवन में अनुशासित रह, अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करना होगा। और यह कार्य आप और हम अहिंसा के रास्ते पर चल, पूर्ण कर सकते है। 

       उन्होने कहा कि हमारी भाषा, आचरण, व्यवहार, विचार, बोली में हिंसा का भाव कतई नहीं होना चाहिए। हमारा आपसी भाई-चारा अनादिकाल से हमारी ताकत रही है, जो हमारी संस्कृति का मूल आधार है और प्राकृतिक सिद्धान्त भी है। हमारा आध्यात्म और हमारे द्वारा राष्ट्र व जनहित में किये जाने वाला कार्य स्वयं, परिवार व समाज तथा 
 हमारी खुशहाली का पैमाना हो सकता है। 
      अन्त में उन्होंने कहा जो कुछ भी हमारे पास बौद्धिक रुप से संग्रहित विद्या है उसमें बाल स्वभाव का वास्तविक सुझाव और निश्क्षलता की अहम भागीदारी है, जो स्वराज की सबसे बड़ी ताक

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