म.प्र. में मचा कोहराम: उपद्रव सडक़ पर हो या बैठकों में सवाल तो बनते है

व्ही.एस.भुल्ले | अगर हालिया उपद्रवों पर नजर डाले तो अहम अहंकार, मान-सम्मान को लेकर मचे कोहराम के बीच जहां एक ओर पंचायती राज, पंचायत कर्मी, अध्यापक तो दूसरी ओर कटनी सहित म.प्र. की कई सडक़ों पर विपक्ष ही नहीं स्वयं जनता अहम मुद्दों को लेकर धमाल मचाये हुये है। 

वहीं सरकार के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच छिड़ी चर्चायें भी कुछ कम नहीं, मगर प्रदेश के मुखिया की मौजूदगी होने वाली कैबीनेट की बैठक में नौकरशाह और मंत्रियों की तकरार किसी से अब छिपी नहीं है। सबसे पहला वाक्या प्रदेश की कद्दावर मंत्री यसोधरा को लेकर रहा। जिसमें उन्होंने लाल फीताशाही को लेकर सीधा सवाल बैठक में ही कर डाला और बैठक में मौजूद मंत्री और आला नौकरशाहों के बीच सनाका-सा खिच गया। 

      उसके बाद उन्हें अपना उघोग विभाग भी गवाना पड़ा। अब हालिया चर्चा वरिष्ठ मंत्री गौरीशंकर शैजवार पर प्रमुख सचिव द्वारा की कई टिप्पणी को लेकर है। जिसे सुन शैजवार प्रमुख सचिव पर बरस पड़े और मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने की ताकीत दे डाली जिसका समर्थन अशोक शाह, उमाशंकर गुप्ता जैसे मंत्रियों ने भी किया और प्रमुख सचिव को माफी तक मांगना पड़ी। 

        अभी कटनी की सडक़ों पर पसरी अराजकता, भ्रष्टाचार हवाला को लेकर समिट भी न पाई थी कि कॉग्रेस प्रदर्शन में हुये लाठी चार्ज का बखेड़ा समुचे प्रदेश में फैल गया। मगर महिलाओं के बीच म.प्र. के गुना जिले में हत्या विवाद पर बीच कलेक्ट्रेट प्रागंड़ में पथरयाई और आपसी कूटा-पीटी भी कुछ कम चौकाने वाली नहीं। जो पुलिस की अक्रमण्यता का जीता जागता उदाहरण है। 

       अब म.प्र. में कई स्तरों पर मचे भ्रष्टाचार, कोहराम को लेकर सरकार की सोच जो भी हो, मगर इतना तो तय है। कि अब अहम अहंकार म.प्र. में सर चढ़ कर बोल रहा है। जो वर्षो पुरानी व्यवस्था को बिगाड़ शान्त प्रिय प्रदेश को अशान्त कर रहा है। 

        देखना होगा सरकार इस दिशा में क्या कुछ कर पाती है। अगर कुछ दिन ऐसा ही और चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब गांव, गली, गरीब में पसरी अराजकता सडक़ों पर नजर आये। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment