दमन के रास्ते दम तोड़ता लोकतंत्र: हम पर रहम करो, प्रभु

व्ही.एस.भुल्ले। अगर लोकतांत्रिक व्यवस्था में वाक्य में जनता भगवान और सरकारें शासन सेवक, भक्त है तो हे प्रभु हम पर रहम करो, दमन के रास्ते आज हमारा  महान लोकतंत्र दम तोड़ रहा है। जिसे हासिल करने हमारे पूर्वजों और राष्ट्र भक्तों ने अनगिनत कुर्बानियां दी है, कभी गांव, गली, गरीब ने देश की खातिर ल_, गोलियां नहीं गिनी है। प्रभु सबसे ज्यादा हमेशा से हम गांव, गली के गरीब ही लुटे और पिटे है। और हमारी महान आजादी के बीच भी सबसे ज्यादा हम गांव, गली, गरीब ही लुट, पिट सरेयाम कलफ रहे है। बीच सडक़ पर पीढि़त मानवता डकरा रही है। ऐसे में न तो हमारे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण फ्री शिक्षा ही नसीब है, न ही उ दा प्रशिक्षित शिक्षक, प्रभु इतना ही नहीं हमारी नस्ले, ईश्वर प्रदत्त नैसर्गिक सुविधा को पाने कलफ रही है और शिक्षित होने के नाम या तो रट्टू तोता या फिर मौजूद शिक्षा से भावनाओं के सहारे मोटा व्यापार कैसे हो, यह गुर सीख रही है। 

प्रभु हमें नहीं पता कि हम कितना अशुद्ध पेयजल, स्वयं पी, अपने नौनिहालों को पिला रहे है। जवानी की उम्र में हमारे बच्चे अधैड़ और बूढ़े नेता, नौकरशाह, नौजवान नजर आ रहे है, हमें नहीं पता कि कब हमारी बच्चियां गायब हो जायेगी। कब माता-बहिनों के गले से चैन-छिन जायेगी कब घर सूना छोडऩे पर चोरी हो जायेगी। 

प्रभु बेहतर स्वास्थ सेवा पाने या काल के गाल में समाती हम गांव, गली, गरीबों की जिन्दगियां चिकित्सा सेवा या मुंह मांगे दामों के आभाव में दम तोड़ जायेगीं। 

प्रभु अब तो रहम करों, आपको शायद नहीं पता कि आपके सेवक जनसेवा के नाम क्या-क्या नहीं कर रहे है। सच तो ये है कि मोटी-मोटी पगार कबाडऩे वाले व पानी की तरह लग्झरी वाहन, उडऩ खटोले और हॉटलो पर हमारी गाढ़े पसीने की कमाई लुटाने वाले आपके सेवकों का अब तो अघोषित संगठन बन गया है। गरीबों का खजाना अब वेतन भत्तों का अखाड़ा बन गया है। थोड़ी बहुत उ मीद इस्टमेनकलर चौथे ख बे वालो से थी। अब तो वह भी रियल स्टेट रिण, करोड़ों की शासकीय भूमियां कोडिय़ों में कैसे कबाड़ी जाये, इस धन्धे में उतर गये है। भाव, वैभाव विज्ञापनों में बटने वाली राशि के नशे में चूर आपका सबसे विश्वसनीय चौथे स्त भ का अधिकांश भाग अब हम गांव, गली, गरीबों की पीड़ा को हेडलाइन नहीं बनाते है, न ही अब हमारी स्टोरियां दिन भर चलाते है। आपके द्वारा चुनी गयी सरकारें और उनके अधीन शासन किस तरह पीडि़त मानवता को कलफाने तुला रहता है। अब तो आपकी तथा-कथित विश्वसनीय महान मीडिया, न तो पीडि़त मानवता का ही दर्द दिखाती, बताती है, न ही लोकतंत्र किस रसातल को जा रहा है। स्वयं के स्वार्थो के चलते उन पर डिवेट करा अपने पत्रों में स्थान दिला पाती है। 

प्रभु कुछ तो करो, आपने अपने अमूल्य मत से इन्हें हम गांव, गली, गरीब की रक्षा और बेहतर भविष्य गढ़ हमारी सेवा के लिये चुना था। मगर प्रभु वह तो हमारी सेवा करने के बजाये स्वयं की सेवा कर, विगत कुछ दिनों से कटनी में आप ही के अंशो को आंखे दिखा रहे है, जिस एसपी को पुलिस प्रमुख पुलिस का गर्व बता रहे थे। उसे आपकी सरकार के मंत्री गलत बता रहे है। माननीय न्यायालय का स मान और उसके आदेशों के क्रियान्वयन का जि मा स हालने वाले उस पर भी कुछ नहीं बोल पा रहे। हालिया सुना है भूपाल की सडक़ों पर कटनी का हवाला कान्ड को लेकर आपकी सरकार के मुखिया का घर घेरने वालो को आपके जांबाज अधिकारियों के नेतृत्व में जांबाज जवानों ने दौड़ा-दौड़ा कर खूब कूटा है। 

प्रदेश में चलाये जा रहे, आनंनदम अभियान और मां नर्मदा यात्रा के बीच भूपाल की सडक़ों पर विघन सन्तोषियों की सरेयाम कूटा-पीटी देख, हम गांव, गली, गरीब के लोग विचलित है। मगर हमारे अन्दर डर, भय कतई नहीं। क्योंकि हम गांव, गली, गरीबों के पूर्वजो ने सैकड़ों हजारों वर्ष पूर्व में भी बड़े-बड़े धूर्त, क्रूर शासकों सहित अत्याचारी अंग्रेजों को देखा है उनके हम गावं, गली, गरीबों पर होने वाले अत्याचारों को हमारी पीढिय़ों ने झेला है, सो हम निडर और महान मां भारती के लाल है। 

मगर प्रभु यहां तो अत्याचार हम पर आपके ही सेवक और भक्त कर रहे है। विद्या की चोरी, रचनात्मक दृष्टिकोण, सत्ता की ओर देखने पर हमारे ही बीच मौजूद सेवकों के टिड्डी दल हमारी जनाकांक्षाओं को आप ही के सेवक, भक्तों के इसारो पर कुचल रहे है।सच बोले तो प्रभु आज जनभावनाओं का आपके ाक्तों के रहते सरेयाम दमन हो रहा है। प्रभु अगर आपने अब भी अपने इन महान सेवक, भक्तों की जनसेवा पर संज्ञान नहीं लिया, तो  प्रभु हम तो जैसे-तैसे हजारों वर्षो से आभावों में रहते जिन्दा रह, जीते आये है और भविष्य में भी परम पिता परमात्मा की कृपा से जिन्दा रह जायेगेंं, मगर अब हम गांव, गली, गरीब अपने इस महान लोकतंत्र को कैसे बचा पायेगें, प्रभु आप ही जाने।  
जय स्वराज
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