जनता के दर्द से बेखबर सरकार

व्ही.एस. भुल्ले। बात तो हुई थी कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंक के खात्मे की, जिसके चलते देश की जनता ने इन नासूरों से निजात पाने के लिये प्रधानमंत्री जी के आव्हन पर पूरे 50 दिन असहनीय दर्द भी झेला और दंश भुगतने अभी भी तैयार है। क्योंकि देश के गांव, गली, गरीब को राष्ट्र सर्वोपरि है न कि बेरहम सरकार। मगर उसकी बैवसी मजबूरी यह है कि उन्होंने ऐसी सरकारों को 5 वर्ष के लिये चुना है। जो अपने सियासी नफानुकसान की खातिर जनभावना, जनाकांक्षा और अपने राजधर्म को ताक पर रख, मनमाने निर्णय ले, जनता को सडक़ पर उतरने पर मजबूर कर रखा है। 

हालिया उदाहरण म.प्र. के जिला मु यालय कटनी का है जहां नोटबंदी के दौरान 500 करोड़ के लगभग हुआ हवाला घोटाला व अवैध खातों के माध्ययम से कालाधन सफेद करने का मामला सामने आने पर इसे उजागर करने वाले पुलिस अधीक्षक को मात्र छ: महिने के अन्दर ही हटा दिया। 

म.प्र. की कटनी जनता का हजारों की तादाद में सडक़ पर खुला आरोप है लगभग सभी दैनिक समाचार पत्रों के प्रथम प्रष्ठ पर यह खबर है। कि राजनैतिक रसूख रखने वालो के चलते मामले को उजागर करने वाले कटनी के पूर्व पुलिस अधीक्षक को हटा स्थानान्तरित किया गया है। जिसे लेकर कटनी की जनता सरकार के सामने डकराने के बाद अब उच्च न्यायालय की शरण में जा पहुंची है। 

सूत्रों की माने तो 2006 के याचिका कत्र्ता पूर्व डी.जी.पी. प्रकाश सिंह का कहना है यदि कोई भी सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कारकों के अलावा किसी अन्य कारण बस एसपी या इससे ऊंचे रैंक के अधिकारी का तबादला करती है तो यह सीधा सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है। 

बहरहाल देश के गांव, गली, गरीब, किसान, मजदूरों का बेहतर भविष्य और नोटबंदी के निर्णय को राष्ट्र, जनहित में ठहराने वाली केन्द्र सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। कि हजारों की तादाद में कटनी की सडक़ों पर उतर, डकराने वाली जनता का दर्द क्या है। 

माननीय सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन क्या है और आखिर म.प्र. की सरकार की ऐसी क्या मजबूरी रही, जो वह जनभावना, माननीय  सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समझे बगैर अपने निर्णय को रुटीन प्रक्रिया बताने में जुटी है। अगर सूत्रों कि माने तो जनता का कहना है कि एसपी ने 500 करोड़ के कालाधन को सफेद करने का घोटालो उजागर किया है। वहीं आयकर विभाग ने भी एक्सिस बैंक के 100 खातों की जांच करने का कार्य शुरु किया है, जिनमें बोगस लेनदेन की चर्चा सडक़ों पर है।  

जैसी कि खबरे है कि इस मामले में मंत्री स्तर के व्यक्ति का नाम सीधे-सीधे सामने आ रहा है। जिसके चलते एक निहायत ईमानदार पुलिस अधीक्षक जो स्वयं सारे मामले की जांच कर रहे थे, को छ: महिने के अन्दर ही हटा अन्य जिले में पदस्थ किया है। सच क्या है यह तो म.प्र. व केन्द्र सरकार ही जाने, मगर जिस तरह से जनभावना और माननीय सुप्रीम कोर्ट की मंशा को अनदेखा कर, जनभावाओं पर कुठाराघात हुआ है, यह काबिले गौर है। और लोकतंत्र के लिये शर्मनाक भी। मगर गांव, गली, गरीब को देखना होगा कि सडक़ पर कलफती कटनी की जनता को कब और कित तरह कितना न्याय मिल पाता है। 
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