दहशत में देश: सस्ते राशन के मोहताज, 83 करोड़ लोग क्या करें

व्हीएस भुल्ले। भले ही वर्तमान सरकार ने हमारे लिविंग स्टेन्डर्ड में सुधार और हमारी सुरक्षा के नाम नोटबंदी सहित कई योजनाये देश व देश के गांव, गली, गरीब की खातिर शुरु की हो।  मगर हमारे खुशहाल जीवन की खातिर संघर्षरत हमारे देश में मौजूद राजनैतिक दलो की भाग भगिमाओं आरोप प्रत्यारोप को देखकर हम 83 करोड़ से अधिक गांव, गली के गरीब लोग दहशत में है। आखिर हमारे किस सुन्दर भविष्य की कल्पना की जा रही है ये तो भगवान ही जाने। मगर आधे से अधिक हम अशिक्षित यह भी नहीं समझ पा रहे कि आप लोगों के रहते, हमारे आधे से अधिक बच्चे देश के हृदय प्रदेश म.प्र. क्यों कुपोषण के शिकार है। आखिर आज तक हम हमारी महान शिक्षा, संस्कृति से क्यों मोहताज है? 

दहशत ही नहीं हम विचलित है हम हमारी आने वाली नस्ल और भविष्य को लेकर। ये सही है कि हम 83 करोड़ सस्ते राशन के मोहताज आधे से अधिक अशिक्षित है, मगर इतने भी मूर्ख नहीं। कि आप लोगों ने हमारी वंशानुगत भावनाओं का अपने स्वार्थ के लिये इस्तमाल कर, हमें किस चौराहे पर ला खड़ा किया है। हम गांव, गली के गरीब लोग दहशत से विचलित हो सकते है। मगर अपने स्वाभिमान और मान-स मान, सदविचारों को आज भी नहीं भूले है। जो पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे रक्त में प्रवाह हो रहा है। अगर किसी को भी यह मुगालता है कि हम मूर्ख है, तो वह इतिहास की मदद ले सकता है। 

मगर वह हमारे या पूर्वजों की त्याग-तपस्या, कुर्बानी पर सवाल खड़े नहीं कर सकता, ऐसा हमारा विश्वास है। हम गांव, गली के गरीब के लोग रोटी, रोजगार, कपड़ा, मकान के मोहताज हो सकते है, मगर राष्ट्र के प्रति बेईमान नहीं। 
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