भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त पार्टी...?

व्ही.एस.भुल्ले @तीरंदाज 
भैया- गर मने भी मौका मिला तो भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त पार्टी बनाऊंगा और संगठित सरकार के सहारे सारा कुनवा ही नहीं मय अंण्डी बच्चे के एक ही झटके में भय, भूख, भ्रष्टाचार से मुक्त कराऊंगा। मगर कै करु भाया लोगों ने अपना-अपना पेट भर कैस लेस करेन्सी का अभियान जो छेड़ रखा है। और हारी महान पार्टी के गठन के पूर्व ही हारे हलक में बलिया डाल मछली की तरह तड़पता छोड़ रखा है। कै भाया कैस-लेस व्यवस्था में हारी पार्टी चल जायेगी या फिर सत्ता का सपना संजोये बैठी सेकड़ों पार्टियों की तरह ही, हारी पार्टी भी इस महान लोकतंत्र में धक्के खायेगी। 
भैये- तने तो बावला शै हारे को न लागे कि थारे जैसे पागलो की भी, कोई पार्टी बन पायेगी गर पार्टी बनाना ही है। तो पहले केडर वैश संगठन बना, फिर अमर बैल कैसे जंगल में बगैर भोजन पानी के पनप जिन्दा रहती है। यह जुगाड़ बैठा कुछ विधान, तो कुछ कानून बना, तब तो पंजीकरण होने के बाद, थारी भी चल जायेगी, बरना गांव, गरीब, गली की ऊबड़-खाबड़ सडक़ों पर धूल फाकती थारी काठी भी हारे महान लोकतंत्र में ऐसे ही धक्के खायेगी। 
भैया- मगर मने हारी भावी पार्टी का नाम तो ठीक सोचा है, भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त पार्टी। इतने पर तो हारी पार्टी चल जायेगी। काडू बोल्या गर हारे लोकतंत्र में कैश-लेस करैन्सी की कृपा अगर हम नंगे भूखों पर रही तो, सच बोल्यू भाया हारी भी सरकार रातो-रात ही नहीं, हाथों हाथ बन जायेगी। क्योंकि हारी मांग केश-लेश वोट के आधार पर होगी जिस पर आधार की लिंक भी जुड़ी होगी। मने तो लागे देखते ही देखते इस लोकतंत्र में हारी पार्टी भी आज नहीं तो कल जनाधार वाली पार्टी बन जायेगी। 
भैये- मुये चुपकर आखिर किसी भी व्यवस्था में कानून भी तो कोई चीज होवे, तने तो बावला हुआ शै, कै थारे को मालूम कोणी किसी पार्टी के गठन से पूर्व निर्धारित मात्रा में कार्यकत्र्ता, फिर पार्टी का विधान तथा पंजीयन होना जरुरी होवे। ऐसे में न तो थारे पर कार्यकत्र्ता है, और न ही जनधन। और संगठन, विधान पंजीकृत का पता नहीं। फिर भाया इस महान लोकतंत्र के मैदान में मिटने वालो के भी तो बड़े-बड़े नाम है। फिलहाल तो तू अपनी के.वाई.सी उठा फसल का वक्त है। खाद बीज की व्यवस्था जुटा, नहीं तो पिछली फसल तो जाती रही। यह फसल भी चली जायेगी फिर यहां अ मा का राज भी नहीं, जो थारे जैसे नंगे, भूखे को 1 रुपया में इडली या सस्ते दामों पर थाली मिल पायेगी। 
भैया- लगता है थारे जैसे चिन्दी पन्ने वाले को, हारे महान मामा की महिमा का पता ही नहीं, तीर्थ दर्शन के हाइफाई ट्रीट के बाद हाल ही में हारे महान प्रदेश में मामा की थाली आने वाली है। मने तो लागे हारी भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त पार्टी के गठन से पूर्व ही हम नंगे, भूखों की फोकट में ही चटकाने वाली है। ऐसे में हारे कार्यकत्र्ता भी पल जायेगे और हारे जैसे नंगे भूखे भी चल जायेगें। 
भैये- थारे जैसे लोगों की यहीं तो कमजोरी है जो जरा सी व सीस पर दुंआओं का दरबाजा दिल खोलकर खोल देते है। फिर हारे-थके लुटे पिटे लोगों की तरह कभी ऊपर वाले का तो कभी स्वयं को कोसते है। 
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा, मगर तने भी कान खोलकर सुनले, हारा अंजाम जो भी हो, मगर मने हारे लिये न सही, अपनी आने वाली नस्ल के बेहतर भविष्य की खातिर ही सही, मने तो भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त पार्टी अवश्य बनाऊंगा और आने वाली महान कैश लेस करेन्सी व्यवस्था के ही सहारे सही, संगठित सरकार अवश्य बनाऊंगा, सुनते है संस्कृति में बड़ी दम होती है। सो भाया हम तो उस महान संस्कृति के उत्तराधिकारी है। जहां से समृद्ध खुशहाल जीवन की गंगा बहती है जिसके भू-भाग पर हम जैसे नंगे भूखों की नस्ल महान बनती है। जय-जय श्रीराम 
                  जय स्वराज .........? 
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