विष और विश्वास के बीच झूलता इन्सान: माननीय हम गरीब, संसकित, मगर विश्वस्त है, कि आप हमारा भला करेगें

व्ही.एस.भुल्ले। माननीय हमें आप पर पूर्ण भरोसा और विश्वास है कि आप हमारे लिये दिन रात एक कर, हम गरीबों का भला ही करेगें। तथा हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर और सुरक्षित कैसे रहे, ऐसी व्यवस्था पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ करेगें। जिस के लिये हम और हमारे पूर्वज अपने मान-स मान, स्वाभिमान और महान भू-भाग की रक्षा के लिये वर्षो से कुटत-पिटते आये है अब इसे हम अपना सौभाग्य कहे या र्दुभाग्य। कि आज ाी बड़ी तादाद में वहीं के वहीं खड़े है। लगभग 83 करोड़ के आस-पास हम लोग आज भी सस्ते अनाज के लिये मोहताज है। जिसके लिये आप लोगो ने खादय सुरक्षा कानून बनाया है। सच तो यह भी है कि र्दुभाग्य बस देश में ला ाों, करोड़ों शिक्षण संस्थान भी है। मगर आधे से अधिक हम आज भी अपनी पुरातन शिक्षा के लिये मोहताज है। 

        आज हम ही नहीं, हमारे परिवार, हमारा समाज अपनी पुरातन शिक्षा संस्कृति द्वारा निर्धारित नर्सरियों की जगह उन विनाशक नर्सरियों अपने नौनिहालों को शिक्षा और संस्कार दिलाने पर मजबूर है। जो सर्वकल्याणक शिक्षा, संस्कृति के स्थान पर ऐसी शिक्षा, संस्कृति परोसने में जुटे है। जिनसे हमारी नस्ले एक नई विनाशक संस्कृति शिक्षा ले, नर्सरी से ही, अपना घर, अपने नातेदार, सगे संबंधी, परिचित या फिर परिचितों के परिचित लोगों के साथ कैसे लेन-देन ,भावनात्मक लूटपाट कर अपना जीवन समृद्ध एश्वर्यशाली बना सकते है। जिन पर हम अपने खून पसीने की गाड़ी कमाई लुटा, अपने आपको गर्त में धकेल स्वयं को गौरांवित महसूस करने पर मजबूर है। इतने पर भी हम गरीबों की जमात आप लोगों को विश्वास दिलाती है। कि हम आपके हर उस निर्णय और कार्यप्रणाली के साथ है, जो जनहित और राष्ट्रहित में है।  हम आपको यकीन, विश्वास, भरेासा दिलाते है कि हम आज ाी आपके भरोसे पर कायम है। कि आप कोई भी निर्णय जनहित, राष्ट्रहित में लेकर हमारा कल्याण ही करेंगे। कभी भी हम गरीबों को विश्वास जगह कभी भी भावनात्मक विष नहीं देगें। 

     मगर आज देश में हुई नोटबंदी पर आप लोगों का आचरण व्यवहार देख, हम संसकित है। क्योंकि हमारी बदहाली की बिना पर आप देश के सामने हमारे कल्याण के लिये झूठ या सच, जो भी बोल रहे हो। हम नहीं समझते आखिर सच क्या है यह उ मीद तो हम आप माननीयों से कर ही सकते है। ? 

      आज अहम, अहंकार में डूबे माननीयों आप लोगों के आचरण व्यवहार को देखकर हम इसीलिये भी संसकित है कि आपका आचरण व्यवहार, हम अभाव ग्रस्त, फटेहाल लोगों को ऐसे जीवन से कैसे निजात दिला पायेगा आखिर हम गरीब लोगों की और क्या मदद कर सकते है। आज आजादी के 70 वर्षो में हमारी तीसरी पीढ़ी इस जहां से बिदाई की तैयारी में है और हम परेशान। मगर आप लोग, लोकतंत्र के नाम राष्ट्रहित के नाम, आज भी आरोप-प्रत्यारोपों में उलझे है। जिस शिक्षा, संस्कृति ने हमें हमारी पुरातन शिक्षा संस्कृति का मोहताज बना हमें सकारात्मक से इतर नकारात्मकता के अंधकार में झौंक दिया है, वह भी हमारी परेशानी का कारण है। क्योंकि जब भी किसी देश में सर्वोत्तम शिक्षा संस्कृति विहीन स यता जन्म लेती है वह एक अवैध सन्तान के रुप में अपना नामाकरण स्वयं कर लेती है। जो हमारे महान लोकतंत्र के लिये खतरनाक और उसे निस्तनाबूत करने काफी है।  

             बेहतर हो कि हम और हमारा समाज, राजनैतिक संस्था, संगठन किसी भी रास्ते सत्ता हासिल कर सतत सत्ता में बने रहने की प्रवृत्ति को त्याग एक स्वस्थ और सशक्त लोकतंत्र की ओर बड़े। बरना जब देश के सर्वोच्च पदों पर रही या वर्तमान में बैठी सर्वोच्च हस्तियों का हमारे अपने बीच कोई मान-स मान स्वाभिमान नही बचेगा, तो आरोप-प्रत्यारोप करने वालो का भी इस महान लोकतंत्र में मान-स मान, स्वा िामान कैसे सुरक्षित रहेगा, इस जन्मी नई स यता, संस्कृति को न तो यह देश और न ही इस देश का स्वाभिमानी गरीब कभी क्षमा करेगी। 
जय स्वराज 
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