माननीयों, आधे से अधिक अशिक्षित, सस्ते राशन के मोहताज हम बैवस, मजबूर, मायूस है

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स। सदन से सडक़ तक टी.व्ही. से अखबारों तक में देख सुन, आज हम आधे अधिक अशिक्षित सस्ते राशन के मोहताज लोग, माननीयों...

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स। सदन से सडक़ तक टी.व्ही. से अखबारों तक में देख सुन, आज हम आधे अधिक अशिक्षित सस्ते राशन के मोहताज लोग, माननीयों आपके आचरण व्यवहार को देख, मायूस, मजबूर और बैवस है, आखिर हम किसके निर्णय, दलील, आरोप-प्रत्यारोपों को सही माने। सच तो यह है कि हम आपको देख सुन आज भ्रमित है। 

ऐसा नहीं कि माननीयों आपकी मेहनत कत्र्तव्यनिष्ठा से हमारी त्याग तपस्या कुछ कम रही हो। देखा जाये तो आजतक राष्ट्र व जनहित की खातिर सबसे अधिक कुर्बानियों हम गांव, गली के गरीब किसान, मजदूरो की रही है। और ऐसा भी नहीं कि देश के अन्य वर्ग, कॉमों की कुर्बानियां कुछ कम रही हो। जिन्होंने हम लोगों की खातिर कठिन त्याग तपस्या कुर्बानियां दे, राष्ट्र व जनसेवा की है और अभी भी कुछ कर रहे है। हम ऐहसान बन्द तथा शुक्रगुजार है, ऐसे लोगों के जिन्होंने अपना स पन्न, खुशहाल जीवन त्याग, हम लोगों के लिये कड़ा संघर्ष कर, अपनी कुर्बानियां दी।

क्योंकि हम सभी उस महान भू-भाग के रहवासी है जहां कई महान हस्तियों के अलावा हम 60 फीसदी अशिक्षित, सस्ते राशन पानी के मोहताज लोगों ने भी जन्म लिया है। अगर देश को स पन्न, खुशहाल बनाने की दिशा में अपूर्ण, असंयमित, असंवेदशील प्रयास 500-1000 के नोटबंदी को लेकर शुरु हुये है, तो उसका स्वागत होना चाहिए। साथ ही इस साहसी निर्णय की कमी पर सवाल भी अवश्य होना चाहिए। भले ही उसके राजनैतिक मायने जो भी हो, या निकाले जा रहे हो। मगर जो कुछ 500-1000 की नोटबंदी पर हो रहा है, वह असहनीय विचलित एवं अराजकता पूर्ण स्थिति पैदा करने वाला लग रहा है, जो हमारे महान लोकतंत्र के लिये घातक हो सकता है। यहां समझने वाली बात हम लोगों के लिये यह है। कि जब बीमारी बड़ी हो तो उसके सुधार में खतरे भी ज्यादा होते है। जरा- सी लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। अगर इलाज के वक्त डॉक्टर या चिकित्सक, चिकित्सा में जुटे हो, तो उन पर संदेह करने और चिकित्सा के दौरान कोहराम मचाने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो हमारी सबसे बड़ी चिन्ता है। 

क्योंकि माननीयों 500-1000 की इस नोटबंदी के निर्णय से देश की हार्ट सर्जरी हो रही है। जिसमें शरीर अलग ही हार्ट बैंकों के खजानों में रखा है। सर्जरी जारी है और नई करन्सी के रुप में करोड़ों की तादाद में पकड़े जाने वालेे नोट बताते है कि शरीर से रक्त रिसाब नहीं रुक रहा, मगर प्रयास जारी है। 

ऐसे में आप लोगों के बीच मचे कोहराम और आपके हर दिन, दो, चार दिन में हालत में सुधार के बुलेटिन पर भी सवाल डिवेटे चर्चायें चल रही है। मगर माननीयों भ्रष्टाचार, कालाधन, आतंकवाद की बीमारी से देश को मुक्त कराने इस मर्तवा हम आधे से अधिक अशिक्षित, सस्ते राशन के मोहताज लोगों ने अपनी वर्षो की पर परा तोड़ आप लोगों के एक आव्हन पर देश हित, जनहित की खातिर, दान के रुप में रक्त नहीं, अपना वॉनमेरो दिया है। अगर जरा सी भी चूक आप लोगों के राजनैतिक स्वार्थ, अहंक अंहकारों के चलते हुई तो निश्चित मानिये ये हमारा महान लोकतंत्र नहीं बचेगा। क्योंकि आज देश के बैंक हमारे वॉनमेरो के ब्लड बैंक बने हुये है, मगर हमारे देश के बैंको से होने वाला रक्त रिसाब थोकबन्द पकड़े जाने वाली नकद नई करेन्सी के रुप में, देश को स्पष्ट दिख रहा है। अगर इस रक्त रिसाब को रोकने व रख-रखाव दुरुस्त रखने का विश्वसनीय बुलेटिन जारी नहीं हुआ, तो हम गांव, गली के गरीब किसान, मजदूर जीते जिन्दा ही मर जायेगें। 

माननीयों आपके द्वारा राष्ट्र जनहित में की जा रही, त्याग, तपस्या कड़ी मेहनत पर हमें कतई संदेह नहीं। आप भी तो हमारे अपने है। हमने ही तो आप लोगों को चुनकर, आप लोगों की काबलियत देख, राष्ट्र व राष्ट्र के करोड़ों करोड़ लोगों के जीवन को खुशहाल, स पन्न बनाने देश के सर्वोच्च सदनों तक भेजा है। 

मगर मजबूर, मायूस, व्यथित हम लोगों का आपसे आग्रह ही नहीं हाथ जोडक़र निवेदन है कि राजनीति तो फिर भी हो जायेगी। अहम अहंकारों की टकराहट भी बाद में हो जायेगी। गर आप लोगों का आचरण व्यवहार इतने अहम निर्णय पर ऐसा ही रहा, तो यह राष्ट्र व जनहित में जिस भी कारण से निर्णय हुआ हो, भले ही आरोप-प्रत्यारोपों राजनैतिक विद्धवेश या नफानुकसान या फिर किसी को फायदा, नुकसान को लेकर हो, इसके परिणाम तो आनेे दो। मगर देश में भ्रम की स्थिति पैदा मत करो। क्योंकि आपके पास अभी भी 2 वर्ष का समय है और सच यह है कि इन पथराई आंखों के पूर्वजों ने बड़े-बड़े अहम अहंकारियों को इस महान भू-भाग पर देखा है, जिनके गवाह हमारे महान धर्मग्रन्थ और इतिहास है। 

बेहतर हो कि हम अपने नफानुकसान, अहम अहंकार को छोड़, देश सेवा में जुटे, देश बड़ा है और जबावदेही भी बड़ी है। हमसे हमारे नौनिहाल ही नहीं आने वाली पीढ़ी को बड़ी उ मीदें है हमारा विश्वास है कि न तो हम उन्हें निराश करेगेंं, और न ही अपने महान राष्ट्र को निराश करेगें। 
जय स्वराज 

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माननीयों, आधे से अधिक अशिक्षित, सस्ते राशन के मोहताज हम बैवस, मजबूर, मायूस है
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