बच्चों के बिना पर जनाक्रेाश: जो कार्य पालकों को करना था वह बच्चों और कलेक्टर ने किया

विलेज टाइम्स। स्वर्गीय पटवा जी के देह अवसान, कॉग्रेस का स्थापना दिवस और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गांव, गली, गरीब को समर्पित आवास योजना को समुचे म.प्र. में एक साथ शुभार भ का दिन तथा सन 2022 तक देश में मौजूद लगभग 5 करोड़ आवास हीन लोगों को 3 भाग में 33 लाख, 33.50 लाख, 33.50 लाख प्रतिवर्ष समुचे देश में तथा 1.35 लाख आवास समुचे म.प्र. मुहैया कराने के संकल्प का दिन था।

    मगर इस बीच मसला था म.प्र. के एक ऐसे अभागे शहर का जिसमें विगत 10 वर्षो से, विकास में हो रही घटिया राजनीति का, जो सरकार बर्सेस शिवपुरी शहर के बीच चल रहा है। जिसके चलते इस शहर के वासी खून के आंसू रो, धूल धक्कड़ के बीच घुट-घुट कर जिन्दा रह, दफन होने पर मजबूर है। 
        अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो यह सत्ता, संगठन सहित सिंधिया नाम की विरोधी लॉवी का षडय़ंत्र चर्चाओं के आधार पर नजर आता है। हालात यह है कि स्थानीय सांसद को लाई गई योजनाओं को पूर्ण कराने कभी आन्दोलन तो कभी संसद में सवाल उठाने का सहारा लेना पढ़ रहा है। 

        वहीं स्थानीय मंत्री भी शहर की आवाज सरकार में बार-बार उठाने, अर्कमण अधिकारियों को बैठक या मु यमंत्री के साथ अधिकारियों की होने वाली बैठकों में, अधिकारियों को आड़े हाथों लेने के चक्कर में, अपना एक विभाग तक गवाना पड़ा है। इसके अलावा शहर के वकील बुद्धिजीवी भी सरकार शासन को खरी-खोटी सुनाने में भी पीछे नहीं रहे। शहर के वकील धन्यवाद के पात्र है। कि शहर के विकास के नाम बिगाड़ के मसले को स्थानीय न्यायालय ही नहीं, उच्च न्यायालय तकले गये, कोर्ट कमिश्रर तक शहर पहुंचे। न्यायालयों द्वारा लगातार अधिकारियों को खरीखोटी सुना, न्यायालय में तलब तक कर, जन सुविधाओं से जुड़े माननीय अधिकारों की रक्षा करने हस्तक्षेप कर रहे है। मगर इतना सब कुछ होने के बावजूद न तो सरकार, न ही प्रशासन के कानों पर जू रैंगी। मगर न्यायालय, मंत्री की लताड़ पटकार के बाद व नये कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव के अतिरिक्त हस्तक्षेप के चलते सडक़, पानी सहित सीवर के कार्यो में गति व लयबद्धता भले ही आयी हो। 

      मगर पर्यटन नगरी के नाम प्रसिद्ध शहर से दुश्मनी भुनाने वालो को यह राश नहीं आया और वह गाहे-बगाहे ऐसी हरकतें करते रहते है। जिससे शहर के लोग अघोषित तौर पर दण्डित प्रताडि़त होते रहे। इसी पीढ़ा को व्यक्त करने व अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की गुहार लगाने पढऩे-लिखने वाले बच्चों का एक दल जिनमेंं अन्य शहरों में जाकर शिक्षा लेने वाले इस शहर भविष्य भी थे। और इससे पूर्व भी वह कलेक्टर से मिल शहर की दशा सुधारने जाते रहे है। और उसी क्रम में वह आज भी कलेक्टर कार्यालय 10: 30 पहुंच गये और कलेक्टर कार्यालय गेट पर बैठ नारेबाजी करने लगे। जहां समस्याओं से आजादी, राजतंत्र से आजादी के नारे लगने लगे, लगभग दोपहर के वक्त कलेक्टर कार्यालय के सामने मौजूद मैदान पोलेाग्राउन्ड पर चल रहे, आवास प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम के पास पहुंच नारेबाजी होने लगी। जिसे कलेक्टर एस.पी ने पहुंच समझाने का प्रयास किया। मगर बात नहीं बनी तो पुलिस द्वारा उन्हें एक वाहन में बिठा, जेल परिसर छोड़ दिया जहां बच्चों ने जेल गेट के बाहर बैठ विरोध प्रदर्शन किया। शाम 4 बजे के करीब शहर के कुछ जागरुक नागरिक, बुद्धिजीवी और कॉग्रेसी नेता अध्यक्ष वर्तमान, पूर्व विधायक कलेक्टर से मिल इस बात का अनुरोध करते दिखे कि आप बच्चों को जेल परिसर पहुंच सुन तो ले। मगर कलेक्टर इस पर तैयार नहीं हुये, उन्होंने कहा कि आप लोग गलत पर परा डाल रहे है, यह ठीक नहीं। मैंने 3 बजे बच्चों से मिलने का समय दिया था फिर ऐसे क्यों? क्या 10,000 की सं या में मौजूद जनता के कार्यक्रम में पहुंच नारे बाजी करना उचित है। अगर कोई घटना, दुर्घटना हो जाये इसका जबावदार कौन होता। मैं तो सभी से मिलता हूं, और बच्चों से एक बार नहीं 50 बार भी मिल सकता हूं, मगर यह तरीका गलत है। 

      इस पर लोगो ने कहा कि आप न सही अपने किसी जि मेदार अधिकारी को भेज दें, बच्चों का मनोबल बना रहेगा, इस पर कलेक्टर तैयार हो गये। और सभी बच्चे जेल परिसर से चल कलेक्टर से मिलने जा पहुंचे। कलेक्टर ने भी कलेक्ट्रेट परिसर पहुुंच बच्चों के पूरे इतमिनान से सुना। 

            बच्चों ने सीवर, सडक़, पानी और शहर की अन्य समस्याओं के निदान हेतु समवृद्ध लिखित में आश्वासन चाहा। जिस पर कलेक्टर ने संवैधानिक अधिकारों व मानवीय सेवा का हवाला बार-बार दे रहे बच्चों से कहा कि हम व्यवस्था अनुसार किसी को भी लिखकर देने बाध्य नहीं और यह व्यवहारिक ाी नहीं।  सरकार, सदन को लिखित में चाही गई दी जाती है, न ही इसके लिये हम वाध्य है और न देगें। यह अधिकार आपके द्वारा चुने हुये जनप्रतिनिधियों पार्षद, विधायक, सांसद सरकार को है। हम आश्वासन के साथ समस्या, निदान सुधार के लिये कोशिस कर सकते है। और आपके बगैर कहे, मेरे द्वारा लगातार शासन के मार्गदर्शन में कोशिस जारी है। परिणाम कि वर्षो बन्द पड़ी पेयजल, योजना सडक़ का दुतृ गति से कार्य चल रहा है। और सीवर व खेल मैदानों सहित क्लब से स बधित जो आपकी मांग है। मैं उन्हें भी दुरुस्त कराने का प्रयास करुंगा। कलेक्टर के इस आश्वासन पर बच्चे भी खुश नजर आये। 

कुल मिलाकर दिन भर चले इस घटना क्रम में एक बात तो साफ है कि शहर की बर्बादी के पीछे कोई तो ऐसा है। कि जैसी कि दिन भर चर्चाये बनी रही कि यह शहर व इसके वासी इसी तरह हैरान-परेशान रह, खून के आंसू बहाते रहे और शहर के बच्चों, युवा, बुर्जुग इसी तरह धक्के खाते रहे। 

 अब यह शहर के बच्चे, युवा, बुजुर्गो की यह जबावदेही बनती है कि वह संविधान से मिले अपने मानवीय अधिकारों की रक्षा करने, पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ, अपना कत्र्तव्य निर्वहन कर,  अपने शहर व शहर वासियों की सुविधाओं के दुश्मन बनी उन ताकतों को बेनकाब करे, जिससे शहर के दुश्मन या शहर में छिपे बैठे शहर के गद्दारों की पहचान शहर वासियों को हो सके। 

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