सीवर के दंश से कराहता शहर, कब सबरेगी शिवपुरी

व्ही.एस. भुल्ले/मप्र/शिवपुरी। अभी तो शहर की उधड़ी सडक़े भी, नहीं  सुधर, सबर पायी, उस पर अब शिंगूफा है, कि सीवर लाइन डलने के बाद लोगों को कनेक्शन देने और चे बर से जोडऩे फिर सडक़ खुदाई करनी होगी, सच क्या है यह तो शहर वासी या शहर को खून के आंसू रुलाने वाली लोकप्रिय सरकार ही जाने।

अब इसे, इस सुन्दर शहर का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि इसकी सूरत बदलने का नाम हीं नहीं ले रही। विकास के नाम बिफरे पड़े शहर की कोई गारन्टी लेने तैयार नहीं, कि यह कब सबरेगा।  बैचारी बैवस जनता खाना बदौसों की तरह कभी म.प्र. सरकार तो कभी म_र हो चुकी माई बापों की मण्डली का मुंह ताकती रहती है। मगर फिलहाल न तो कोई मददगार, न ही खेबनहार शहर की इस र्दुदशा के बीच नजर आता है। बैहाल जनता सब कुछ झेल, विकास करने वालो के खिलाफ सुनियोजित ढंग से फैलाये जा रहे दुस्प्रचार का शिकार हो, अब चुप ही रहने में अपनी  भलाई महसूस कर चुप हो चुकी है। कहीं शहर की बैवस जनता की यह चुप्पी तूफान न बन जाये। क्योंकि जिस तरह की मनह स्थिति अघोषित दुष्प्रचार और सरकार के व्यवहार के चलते बन रही है। वह किसी भी स्वस्थ राजनीति के लिये एक कलंक है। 

कभी-कभी अफसोस होता है कि लोग ऐसे शहर में रह ही क्यों रहे है, जिसे सरकार के कुपित व्यवहार ने काली सूची में डाल रखा है। सीवर के मकडज़ाल में उलझे इस शहर की हालत यह है कि न तो योजना को अब सरकार को  निगलते बन रहा, न ही उगलते। 

     अगर सूत्रों की माने तो टेबल पर तैयार इस योजना की तैयारी, डी.पी.आर बगैर व्यवहारिक पहलू जाने तैयार की गई। शेष कमी क्रियान्वयन एजेन्सी और पी.एच.ई. के आला अफसरों ने 3 भागों में इस परियोजना को विभक्त कर पूरी कर दी। शेष कार्य पी.एच.ई के आला अधिकारियों में मार्गदर्शन में निर्धारित एजेन्सी ने बगैर सुरक्षा उपाय एवं बगैर किसी प्लानिंग के मनमाने ढंग से शहर की खुदाई कर पूरी कर दी। 

        अब हालात यह है कि योजना पूर्ण होने की तारीख पर तारीख मिल रही है। मगर शहर का उजाड़ कर शहर की जनता को खून के आंसू रुलाने वालो पर कोई कार्यवाहीं नहीं हो रही। जनता हलाकान परेशान है। मगर सुन्दर शहर के उजाड़ पर सरकार के कानों पर जू तक नहीं रैंग रही। देखना होगा कि आखिर शहर वासियों को सीवर के दंश से कब निजात मिलती है। जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये यक्ष सवाल हो सकता है।  
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