अब गरीब भी कर सकेगा, सत्ता में भागीदारी: गांव गरीब के हित में प्रधानमंत्री का बड़ा निर्णय

विलेज टाइम्स। गत अंक में प्रकाशित विलेज टाइम्स ने पण्डित नेहरु, शास्त्री, इन्दिरा, राजीव गांधी, नरसिंह राव, अटल, मनमोहन के बाद नरेन्द्र मोदी को राष्ट्र व गांव गरीब के हित में बड़े निर्णय लेने वाले प्रधानमंत्री के रुप में प्रस्तुत किया था और देश के प्रधानमंत्री ने कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंक पर लगाम कसने की गरज से 500-1000 रुपये के प्र्रचलित नोट बन्द करने का ऐलान कर यह सिद्ध कर दिया कि गांव गरीब, किसान और राष्ट्र के हित में कितना कड़ा और कितना बड़ा निर्णय वह ले सकते है। 

आज जब कालेधन, भ्रष्टाचार, आतंक से समुचे राष्ट्र, गांव, गरीब, किसान हलाक पड़ा है। ऐसे में इस तरह के बड़े निर्णय निश्चित ही गांव, गरीब ही नहीं राष्ट्र हित में भी है, सुधार में कुछ समय लग सकता है, मगर प्रधानमंत्री का यह प्रयास असफल होने वाला नहीं, यह देश को समझ लेना चाहिए। 

देखा जाये तो इस निर्णय के बाद आम गांव, गरीब को कुछ परेशानी तो आयेगी मगर इसके दूरगामी परिणाम अवश्य गांव गरीब राष्ट्र हित में आने वाले है। 
पहला लाभ तो उस गरीब को मिलने वाला है, जो धन बल के चलते चुनावों से बाहर हो, अपनी सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने के बजाये इस महान लोकतंत्र में, मात्र वोटर बनकर रह गया था। और लोकतंत्र कमजोर हो रहा था
दूसरा लाभ गांव गरीब का यह हुआ है जो जनधन, बीमा से जुड़, 12 रुपये प्रति वर्ष बीमा का लाभ नहीं ले पा रहे थे अब उनके खाते भी बड़ी तादाद में खुलेगें और आर्थिक सुरक्षा के भी पात्र बन जायेगें।  

तीसरा लाभ गांव गरीब का यह होगा कि डूबते कई बैंक अचानक बढऩे वाली डिपोजिट से जीवन दान पायेगें। और डॉलर के मुकाबले आय दिन लुढक़ने वाले रुपये में भी हम लगाम लगा पायेगेंं। 
चौथा लाभ देश को उन सटौरियों, हवाला करोबारियों से भी मुक्ति का होगा, जो कभी मंहगाई, आतंक, कालाधन, भ्रष्टाचारियों की मदद पर्दे के पीछे से करते थे, जिससे गांव गरीब, किसान को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। 

पांचवा लाभ गांव गरीब ही नहीं देश के भले नागरिक को यह होगा कि जो लोग हिसाब किताब न रखने के कारण कर विभागों की मनमानी, भ्रष्ट अधिकारियों की मनमानी का शिकार होते थे। उन्हें बैंक स्टेटमेन्ट के रुप में फ्री में ही हिसाब किताब रखने वाला माध्ययम मिल जायेगा। 
छंठवा लाभ यह होगा कि जिस तरह से नकली नोटों का चलन बाजार में बढ़ रहा था उसका शिकार जानकारी के आभाव में आम गांव गरीब और किसान ही हो रहा था और वह राष्ट्रीय मुद्रा रुपये को ही नहीं, देश के अमन चैन को भी आतंकवाद के रास्ते प्रभावित कर रहा था। फिर लाभ तो इस निर्णय के कई है  जिन्हें सामने आने में वक्त लग सकता है। मगर इतना सही है कि राष्ट्र हित में गांव गरीब की खातिर किये गये आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक  से आतंक, कालाधन, भ्रष्टाचारियों की कमर टूटना तय है। जिस तरह से आजादी के बाद पं. नेहरु की कॉग्रेस सरकार और सरदार पटेल के नेतृत्व भूमि को लेकर बड़ा निर्णय हुआ शास्त्री के नेतृत्व हरित क्रान्ति, इन्दिरा के नेतृत्व में बैंकों का राष्ट्रीकरण, प्रवियर्स समप्ति, राजीव के नेतृत्व में गांव, गली की सरकारों सहित व्हीकल, शिक्षा प्रौधिकी संचार, नरसिंह राव के नेतृत्व में शेयर बाजार हवाला करोबार तथा अटल जी के नेतृत्व में सडक़ क्रान्ति और डॉ. मनमेाहन सिंह के समय परुमाणीय आर्थिक क्षेत्र सहित रोजगार, खादय सुरक्षा सूचना अधिकार जैसे क्रान्तिकारी निर्णय हुये। 

उसी तरह नरेन्द्र मोदी सरकार के विदेश नीति, जनधन बीमा, स्टार्टप, मुद्रा, स्वच्छता सहित भ्रष्टाचार, कालाधन आतंकवाद को लेकर जो निर्णय हुआ है अगर देश का सहयोग और मशीनरी का संकल्प सही रहा तो कोई कारण नहीं जो देश ही नहीं, देश के आम गांव गरीब, किसान की तरक्की को कोई रोक सके। बैसे भी देश के प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि उनके इस निणर्य से देश के आम नागरिक गांव गरीब को कोई परेशानी नहीं होने देगें। 
सो फिलहाल भरोसा ही महत्वपूर्ण है कहते है आशा पर आसमान टिका है तो देश को नेकदिल प्रधानमंत्री से आशा जरुर रखनी चाहिए। 
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