रणनीत और लयबद्धता के आभाव में, जमीनी हकीकत से जूझती कॉग्रेस

व्ही.एस.भुल्ले। यूपीए टू सेे लेकर आज तक जिस तरह का उपहास परिहास झेल, स्पष्ट रणनीति लयबद्धता के आभाव में जमीनी हकीकत से जूझती कॉग्रेस आज भी अपना संगठन गवां, जमीनी स पर्क नहीं बना पा रही है, जो देश के सबसे बड़े दल के लिये आश्चार्यजनक ही नहीं चिन्ताजनक भी होना चाहिए। 

आखिर कॉग्रेस कुनवे में कौन-सी ऐसी महामारी फैली है जो वर्ष दर वर्ष, मर्ज ठीक होने के बजाये नासूर का रुप लेती जा रही है। और बड़े-बड़े हकीम या नये नवेले डाक्टर मर्ज ही नहीं समझ पा रहे है। 

समुचे देश में फैले छोटे-मोटे राजनैतिक झोलाछाप भी राजनीति में दखल रखने के बावजूद समय-समय पर बता रहे है कि मर्ज क्या है? कई तो यहां तक कह जाते है कि मोटे कमीशनखोरी और दुकान चमकाने के चक्कर में आपके ही हकीम उल्टी दवा पिला रहे, कार्यकत्र्ता परेशान है, जनता हैरान है। आ िार क्यों कॉग्रेस इन हकीमों से पिण्ड छुड़ा किसी और जानकार नहीं तो किसी झोला छापों को ही दिखाती, क्योंकि अभी भी मर्ज नासूर न बन ठीक होने की स्थिति में है बरना यह नासूर कहीं कॉग्रेस की मौत का कारण न बन जाये। जैसा कि विरोधी दल दिन रात कॉग्र्रेस खत्म होने की दुआ याचना भगवान से करते नहीं थकते।

बड़े ही र्दुभाग्य कि बात है कि देश की आधे से अधिक आबादी झोलाछाप या झाड़ फूक वालो के सहारे पल रही है। ऐसे में हाइटेक हकीम कॉग्रेस के पास होने के बावजूद भी वह क्यों शैया पर पड़ी है, यही प्रश्र आज कॉग्रेस और देश के सामने है। अभी हालिया दो मर्ज कॉग्रेस को क्या हुये कि उन्हें ठीक कराने बैचारे कॉग्रेस के उपाध्यक्ष उ.प्र. की ल बी यात्रा पर निकल पड़े। और उन्होंने जैसे-तैसे कड़ी मेहनत कर 26 कि.मी. की यात्रा खूंखार प्रदेश, उ.प्र. में कर, कॉग्रेस में जान फूकने की कोशिस की। मगर इससे पहले कि कॉग्रेस पैरो पर खड़ी हो पाती कि यात्रा स पन्न होने के  वक्त उपाध्यक्ष महोदय को न जाने किस हकीम ने ऐसा डोज थमाया कि कॉग्रेस चलने फिरने के बजाये फिर शैया पर जान पड़ी। 

दूसरा मौका देश में नोटबंदी का था जैसे-तैसे उ.प्र. का नासूर भुला कॉग्रेस उपाध्यक्ष एक बार फिर से कॉग्रेस में जान फूकने की गरज से जनता के बीच एटीएम पहुंच, लाइन में लग, शैया पड़ी कॉग्रेस में पुन: जान फूकने की ाातिर निर्णय के समर्थन में तथा जनता को होने वाली परेशानियों के विरोध में नजर आये और उन्होंने निर्णय का स्वागत करते हुये कॉग्रेस कार्यकत्र्ताओं को स्पष्ट संदेश देते हुये यह भी कहा कि वह जगह-जगह पहुंच परेशान हो रही जनता की हर स भव मदद करे। उपाध्यक्ष के इस डोज से शैया पर पड़ी कॉग्रेस छोटे-छोटे नगर, कस्बों से लेकर शहरों में खड़ी हुई ही थी। और कॉग्रेस उपाध्यक्ष के इतने अच्छे निर्णय की सुगबुहाहट देश भर में पहुंच पाती कि इससे पूर्व ही सोशल मीडिया व टी.व्ही. के माध्ययम से घिसे पिटे वह हकीमों का झुंण्ड टूट पड़ा। और ऐसा डोज दिया कि कॉग्रेस पुन: शैया पर जा पहुंची। पहले सदन में आक्रोश फिर सडक़ पर कॉग्रेस का जनाक्रोश के सहारे कॉग्रेस को होश में लाने की कोशिस हुई और एक नेक दिल ईमानदार इन्सान के सहारे दुआं भी हुई। मगर कॉग्रेस फिर शैया पर जान पड़ी। जिसका मूल कारण यह है कि अब जब तक कॉग्रेस, कॉग्रेस में मौजूद कुछ मूड़धन्य हकीमों को छोड़, राजनैतिक झोला छापों के दर तक पहुंच उनके बीच पहुंच नहीं बना लेती, तब तक न तो जनता की नब्ज का ही पता लगने वाला है और न ही 24 अकबर रोड़ और कॉग्रेस का भला होने वाला है। 
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