लोक का कचूमर, निकालता तंत्र...

व्ही.एस.भुल्ले @ तीरंदाज
भैया- क्या ऐसा ही होवे, महान लोकतंत्र और जनतंत्र, जो मने देख रिया शै। कोई चमड़ी उधेड़ देने वालो फट्टो से शिक्षक कुट, आत्महत्या कर रहा है, तो कोई सत्यमेव, जयते का तमगा लगा नोटों की खातिर रात भर धुनक रहा है। इतना ही नहीं राष्ट्र की खातिर देश के प्रधानमंत्री का साथ देने खुद के गाड़े पसीने की कमाई लाइन में लग निकालने वालो पर भी राष्ट्र भक्ति जनसेवा वालो को लठ खूब चल रहा है। लाइन में लग नये नोट हासिल करने के लिये मरने का आंकड़ा विपक्षियों की माने तो 70 तक पहुंच रहा है। भाया यह तो हारी महान जनता की देश की खातिर कुर्बानी का रुझान भर है। अभी तो 15 दिन ही बीते है पहाड़ से 35 दिन बांकी है। अब मंत्रालय की आये दिन जारी होने वाली मरहम से कितना घांव भरेगा यह तो बैठे बिठाये लोगों को मौत बांटने वाले ही जाने। 

सच बोल्यू तो भाया अब राष्ट्र की खातिर मने स्वेच्छा से रक्त दान नहीं, बौन मेरो तक दान करना पढ़ रहा है कहीं हारी आखरी उ मीद भी न जाती रहे। के थारे को मालूम कोणी अभी हाल ही में हारे महान म.प्र. के शिवपुरी जिले में राष्ट्र भक्ति जनसेवा के फ_ों की फटकार से आहत एक शिक्षक ने दम तोड़ दिया, तो दूसरी ओर रीवा में पैसे की खातिर एक ट्रक ड्रायवर को जबरदस्त धुनक दिया गया। जिसमें यूपीए की पवित्र गंगा, जमुना भूमि के, मुजफफरनगर में लाइनों में लगे देश की खातिर लोक जन को हारे महान पुलिस जन ने, क्या धुनका है कि भाया ल_ भी छार-छार हो लिया। यह सब देख हारा तो कलेजा मुंह को आवे। 
भैये- मुये चुप कर गर किसी ने थारी हरकते देख, थारे डी.एन.ए चैक कराने का मुद्दा उछाल लिया तो समझ थारी तो थारी हारा भी कचूमर निकलना तय समझ। सो भैया सिरन्ज के बजाये मने तो बेनूला तलाश रहा हूं। राष्ट्र की खातिर आय दिन नित नये ढंग से होने वाली मांग पूर्ति के लिये स्वयं को तैयार कर रहा हूं। 
भैया- कै थारे को कोई ग भीर बीमारी हो ली, जो तू राष्ट्र भक्ति के दौर में सिरेन्ज बैनूला तलाश रहा है। कल ही तो काडू बोल्या हारा प्रदेश बदल रहा है, और नर्मदा यात्रा की तैयारी कर रहा है। 
भैये- तने हारे गांव गरीब की हालत पर जली कटी बात मत कर, कै थारे को मालूम कोणी बैठकों, अभियानों, शिकायतों के माध्ययम से हमारे महान म.प्र. में हम नये-नये कीर्तिमान बना रहे। वो तो बुरा हो केन्द्र की मोदी सरकार का जो उसने लूटमार योजनाओं में मुसीका लगा हारे को खाल उधेड़ लोगों को खून के आंसू रुलाने पर मजबूर कर दिया है। बरना हारे डागधर साहब सरकार में क्या मजे थे, माल भी केन्द्र का और मलाई अपनी।  सो अब हमारा तंत्र रक्तदान के सहारे ही कम चला रहा है। बेनूला तो मात्र इसलिये प्रचलन में आया है कि जिन लोगों में मोदी सरकार के मुसीके के चलते रक्त की कमी आयी है। सिर्फ उन्हीं पर लगाया जा रहा है अब कोई दम तोड़े या आत्महत्या करेे, यह तो भाग्य की बात है, इसमें सरकार का क्या दोष। 
भैया- मुये चुपकर कहीं कत्र्तव्य विहीन भेदियों ने सुन लिया तो सारी खबर कैडर वालो तक पहुंच जायेगी और थारा ही नहीं हारा भी कचूमर निकालने, कल से ही थारे और हारे दरवाजे झुण्ड के रुप में राष्ट्र भक्तों की फौज पहुंच मोर्चा लगायेगी। और हारी माल मसक महान मीडिया ब्रेकिंग कर पूरे दिन का हाल गांव गरीब को छोड़ पूरे मुस्तैदी से दिखायेगी। इतना ही नहीं अगर सरकार की कृपा रही तो सत्यमेव जयते के नाम राष्ट्र भक्ति, जनसेवा भी ऐसे बेभाव ल_ बरसायेगी कि थारे और हारे को अपनी-अपनी नानी याद आ जायेगी। अभी तो गनीमत है कि तने और मने अधनंगे भूखे रह भगवान बने घूम रिया शै। गर हारे महान पुजारियों की भृकुटी टेड़ी हुई तो तथा कथित राष्ट्र भक्तों की महान फौज इस कदर कहर बरपायेगी कि उसके आगे गजनवी, औरंगजेब के अत्याचारों की हिस्ट्ररी भी थारे इतिहास के आगे कम पड़ जायेगी। के थारे को अध्यापक संघ पर भोपाल की सडक़ों पर भक्त जनो के भंण्डारे का पता नहीं, जिसमें सडक़ पर लेटा-लेटा कर ल_ बजभाया गया था।  
भैये- अब यह हमारी नियति है या यो कहे र्दुभाग्य जो राष्ट्र भक्ति के नाम किस कदर हम लुट पिट रहे है और दलाल बने दल भी फिलहाल चुप चल रहे है। 
भैया- मने समझ लिया थारा इशारा अब इन दलाल बने दल बलो के सहारे कुछ होने वाला नहीं। क्योंकि सरकार और उसका तंत्र बैठक, अभियान लूट में मस्त है। तो गांव गरीब भ्रष्टाचार से तृस्त है। लगता है भ्रष्टाचार से प्राप्त धन और उससे प्राप्त सत्ता अब हमारे लोकतंत्र की मजबूरी है इसीलिये अब रक्तदान नहीं बौनमेरो का दान आने वाले भविष्य में अब जरुरी है। बैसे भी काड़ू बोल्या कि किसी भी राष्ट्र की रीढ़ उसकी अर्थ व्यवस्था और रक्त बैंकों में जमा धन होवे। घरों में बचाकर रखे जाने वाला धन बौनमेरो होवे, सो भैया अभी तो बेनूला के माध्ययम से धड़ा धड़ दान चल रहा है। गर खाने पीने की व्यवस्था या बौनमेरो का पुर्नस्थापन ठीक से न हुआ तो हारे मखाने फिकना तो तय है। जय जय श्रीराम  

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