राष्ट्र के सम्मान में स्वाभिमान मैदान में

व्ही.एस.भुल्ले। देश के प्रधानमंत्री के आव्हन पर जिस तरह गांव, गरीब, किसान देश के स्वाभिमानी नागरिक राष्ट्र की खातिर अपना समर्पण दिखा मैदान में दिखे है। इसे देखकर देश द्रोहियों देश के दुश्मनों को समझ लेना चाहिए कि यह देश किस महान मिट्टी से बना है। और इस देश के करोड़ों करोड़ नागरिक नंगे भूखे रहने के बावजूद भी राष्ट्र की खातिर क्या कुछ कर सकते है। 

500-1000 के नोटो की बन्दी को लेकर जिस तरह से देश के नागरिक गांव, गरीब ने अपने धैर्य का परिचय दें, देश की खातिर समर्पण किया है, वह काबिले गौर है। जिस तरह से देश के सबसे बड़े विपक्षी दल के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ए.टी.एम पर स्वयं पहुंच पैसा निकाल देश वासियों और सरकार को संदेश दिया है। यह राष्ट्र की खातिर उनका कत्र्तव्य ही नहीं महान राष्ट्र के प्रति समर्पण है। 

जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री ने समुची केन्द्र सरकार और अपने मंत्रियों को हाई एलर्ट पर रखा है। ऐसा नजारा सरकार के अन्दर इन्दिरा जी के बाद शायद पहली मर्तवा देखने मिल रहा है। जरा-जरा सी समस्या पर केन्द्र सरकार का हर मंत्री  देश के नागरिकों को सफाई एवं समाधान के लिये हाई एलर्ट पर दिख रहा तो दूसरी ओर आला अधिकारी भी पूर्ण मुस्तैदी के साथ मोर्चा स हाल, हर तरह के समाधान देने में जुटे है। जिससे देश के गांव गरीब नागरिकों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे और देश के ईमानदार नागरिक को कोई असुविधा न रहे। जिस तरह से समस्या निदान हेतु फटापट निर्णय हो रहे है। जैसे टोल टेक्स, पैट्रोल प प, अस्पताल, यातायात, मुद्रा की उपलब्धता के अलावा नमक का भ्रम फैलाने वालो को स त संदेश, इस बात के स्पष्ट संकेत है कि प्रधानमंत्री के मंत्री अफसरानों को कितने हाई एलर्ट पर रखा है। जबकि स्वयं प्रधानमंत्री जापान के तीन दिवसीय दौरे पर राष्ट्र हित में अहम समझौते कर रहे है। 

प्रधानमंत्री के एक आव्हन पर सवा अरब की जनसं या वाले देश में देश के प्रति नागरिकों का समर्पण खासकर गांव गरीब की अपने महान राष्ट्र के प्रति बड़ी कुर्बानी ही है, जिसका स मान होना चाहिए।  इसमें किसी को संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री का भ्रष्टचार, कालाधन, आतंक के खिलाफ यह कड़ा निर्णय देश ही नहीं देश के गांव गरीब के हित में है। 

मगर इस सब से इतर देश के आम गावं, गरीब की कुछ स भावित चिन्ताये भी हो सकती है, जो खुशहाल राष्ट्र गांव, गरीब के रास्ते की बाधाये हो सकती है, जिस पर देश के प्रधानमंत्री या वित्तमंत्री को तत्काल कदम उठाने की जरुरत है, जो देश व गांव गरीब की हित में तत्काल जरुरी भी है। यह विश्वास जताने कि राष्ट्र सही हाथों और सही दिशा में है। 
पहला- 9-11-2016 से देश के समस्त बैंक डाकघरों में जमा होने वाले धन की अलग से बैलेन्स सीट रोजाना तैयार हो। 
दूसरा- देश के समस्त बैंक डाकघरों में 9-11-2016 तक कितना धन देश के लोगों का जमा था। 
तीसरा- 9-11-2016 से देश भर के बैंक डाकघरों में जमा होने वाली जमा राशि का उपयोग अगले आदेश तक न किया जाये। 
चौथा- अगर राष्ट्र हित में किसी भी प्रकार का रिण देना जरुरी हो, तो वह रिण उसी स्थिति में दिया जाये। जब तक सरकार 10 करोड़ से अधिक के रिण के लिये रिण प्रदान करने वाली संस्था, रिण लेने वाली संस्था में अपने स्वयं का प्रतिनिधि नियुक्त नहीं कर देती। जो हर माह बैलेन्स सीट के आधार पर अपनी संस्था तथा सरकार को नफा, नुकसान या रिण लेने वाली संस्था की यथा स्थिति से अवगत कराता रहे, यह उसकी व्यक्तिगत जबावदेही होना चाहिए। 
सरकार को चाहिए कि वह ऐसा सार्वजनिक उपक्रम विभाग बनाये जो रिण लेने वाली संस्थाओं की 3 माह की बैलेन्स सीट के आधार पर डूबने की स्थिति में रिण प्रदाता संस्था, बैंक के अनुरोध पर अधिग्रहण कर अपने अधिपत्य में ले, स्वयं संचालन कर सके या ठेके पर अन्य किसी व्यवसायी को दे सके या उसकी नीलामी कर सके। 
जिससे देश व देश कागांव गरीब अपने जमा पुराने धन पर, बैंकों के पुराने प्रदर्शन को भूल, इस बात का सन्तोष रख सके कि 9-11-2016 की कुर्बानी के बाद अब कोई बैईमान, राष्ट्रद्रोही दोनों हाथों से उनके गाढ़े पसीने की कमाई को उड़ा उन्हें और उनके महान राष्ट्र फिर आर्थिक संकट में न डाल सके। 
पांचवा- कार्य सरकार यह भी कर सकती है कि हीरा, सोना, चांदी, एन्टिक वस्तु, भवन, प्लाट, कृषि भूमि, हवाला कारोबारी, स_ा कारोबारी, खादन्य, शेयर कारोबारियों की 9-11-2016 की बैलेन्स सीट तलब कर इस कारोबार पर गहरी नजर रखे जो टेक्स अधिकारी या कलेक्टरों के माध्ययम से की जा सकती है। 
छठवां- कार्य सरकार यह भी कर सकती है कि भारत सरकार के अधीन बीमा क पनियां जिनकी पुरानी पॉलसियों की किस्त जमा होनी है, जिनके पास नकली नोट पकडऩे वाली मशीन है जमा कराने का कार्य करें। तब तक नगद जमा पर नई पॉलिसी न बैचे, जबकि प्रायवेट बीमा क पनियों को यह छूट न दी जाये। 
सातवां- और महत्वपूर्ण कदम सरकार यह भी उठा सकती है कि वह भारतीय मुद्रा रुपये के जो नोट भविष्य में प्रचलन में रहे, उन नोटों के रंग और मोनो के आधार पर 3 या 6 वर्षीय पॉलिसी फिक्स कर दे कि उक्त रंग की मुद्रा 3 या 6 वर्ष बाद अगले रंग में स्वत: तब्दील हो जाये और निर्धारित 5 महीने की अवधि में पुरानी मुद्रा जमा भी करा ली जाये। जिससे नकली नोटों के प्रचलन की समस्या हमेशा के लिये खत्म हो जाये। 
आठवां- कदम इन्कम टेक्स या बैंक लिमिट के आधार पर भी छोटे बड़े नोट बैंक से दिये जाये व लिये जाये, जैसा भुगतान बैसी ही मुद्रा में हो। 
नौवां- कदम नगद मुद्रा विहीन लेन-देन को बढ़ावा । 
दसवां- नये कर के रुप में 6 लाख तक की आय का हिसाब किताब प्रस्तुत न करने वालों को एच्छिक राष्ट्रीय कर देने की छूट जो वह किसी भी बैंक, डाकखाने या मुद्रा केन्द्र पर जमा कर सके। 
ग्यारवां- कदम हर वार्ड, पंचायत पर मुद्रा केन्द्रों की स्थापना, क्षेत्रीय बैंको, डाकघरों के अधीन जहां जमा की अधिकतम सीमा 5000 हजार रुपये है और तत्काल निकालने की सीमा 2000 रुपये हो, इससेे अधिक राशि 10,000 तक की राशि आहरण के लिये 3 दिन पहले डिमांण्ड देना आवश्यक हो। 
अगर प्रधानमंत्री जी इन छोटे सुझावों पर भी गौर करें, तो देश व देश के गांव गरीब की आर्थिक सुरक्षा तो सुनिनिश्चत होगी ही, साथ ही लोगों को एक बड़ी सहुलियत भी मिल सकेगी। 

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