व्ही.एस. भुल्ले। राहुल एक ऐसे राष्ट्रवादी दल के भावों के नेता है जिसका समुचा इतिहास कुर्बानी गांव, गरीब का संरक्षण, न्याय की स्थापना एवं राष्ट्र विकास की कल्पना, भारतीय स यता, संस्कृति के साथ मूल्य सिद्धान्तों की राजनीति से जुड़ा हुआ है। राहुल उस परिवार के भावी मुखिया है जिसने आजादी से लेकर आज तक भारत और उसकी आवाम के मान, स मान, स्वाभिमान, स यता, संस्कृति, मूल्य सिद्धान्त की राजनीति के लिये निरन्तर संघर्ष ही नहीं कई मर्तवा जान की कुर्बानियां भी दी है इतना ही नही पीढ़ी दर पीढ़ी देश की खातिर बचपन, जबानी, बुढ़ापा तक कुर्बान करता आया है यह परिवार।  

राहुल उस संस्कार के प्रतीक है जो कॉग्रेस के भूत, वर्तमान, भविष्य का खाका तैयार करता है, कौन नहीं जानता पण्डित जवाहर लाल नेहरु को जो एक स पन्न पिता की इकलौती संतान होने के बावजूद राष्ट्र की आजादी की खातिर सारा वैभव विसार महात्मा गांधी के साथ जुट गये, जेल गये उपवास किया आजादी के आन्दोलन में भाग लिया। उन्होंने आलीशान कोठी के रुप में इलाहबाद स्थित घर बार छोड़ा, दौलत, सौहरत छोड़ी और विदेशियों की जेल तथा एक ऐसे महात्मा को स्वीकार किया जिसने देश व देश की आवाम की खातिर सारा ऐश्वर्य, वैभव त्याग एक लगोंटी लगा उपवास और आन्दोलन का जीवन स्वीकार किया। 

इतना ही नहीं पण्डित नेहरु ने मित्रता के नाम चीन से मिले दगे को मिलने के वावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और वह इसी गम में चल बसे। नियति की खातिर मगर देश के सटीक उत्तराधिकारी बने शास्त्री ने भी देश के ही दम तोड़ा, जिनके नाम पर आज भी देश गर्व महसूस करता है। वहीं शास्त्री जी के बाद देश की कमान स हालने वाली उनकी पुत्री स्व. इन्दिरा गांधी जो एक स त शासक की भूमिका में रही। पूरी जीवटता के साथ गांव गरीब, किसान देश की एकता अखण्डता के लिये संघर्ष करते-करते आतंकियों की गोली से अकाल मौत का शिकार हो देश की खातिर शहीद हो गई है। उनके पुत्र स्व. राजीव गांधी जो एक निहायत ईमानदार, नेकदिल इन्सान थे देश की खातिर वह भी आतंक का शिकार हो गये और उन्हें हत्यारों ने बम से उड़ा दिया। जिनकी धर्म पत्नी और वर्तमान द्वारा कॉग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तमाम लोमहर्षक घटित घटनाओं को खुली आंखो से देखने के वावजूद भी भारतीय स यता, संस्कृति, संस्कार एवं आम गरीब किसानों की खातिर देश को यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री के रुप में डॉ. मनमेाहन जैसा काबिल ईमानदार व्यक्त्वि दिया मगर इस सबके बीच उन्होंने स्वयं एवं अपने पुत्र राहुल गांधी को सत्ता के महत्वपूर्ण पदों से दूर ही रखा।

आज जब वह राहुल की उम्र अविवाहित रहते हुये लगभग 40-45 के पार हो चुकी है तब आम जनता ही नहीं देश की खातिर उनके बीच अपनी मात्र संस्था कॉग्रे्रस को ताकत प्रदान करने देश भर का भ्रमण कराना उनकी महानता का सबूत है। जैसा कि उन पर आरोप लगाया जाता है कि वह पुत्र मोह में लीन है तो लोगों को समझना होगा, जिस राजनीति में लोग दर-दर पग-पग मूल्य सिद्धान्तों से सत्ता के खातिर जनहित के नाम वेमेल समझौते कर लेते हो, उस राजनीति के बीच अगर वो चाहती और पुत्र मोह में लीन होती तो देश में 10 वर्ष यूपीए की कॉग्रेस नेतृत्व वाली सरकार रही जिसके  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रहे क्या वह उसी दौरान राहुल को पार्टी अध्यक्ष या फिर मंत्री, प्रधानमंत्री नहीं बना सकती थी आखिर उन्हें कौन रोकता मगर उन्होंने देश व देश की आम गरीब खातिर उन्होंने ऐसा नहीं किया और पूरे 10 वर्ष तक मनमोहन सिंह ही प्रधानमंत्री पद पर बने रहे।  

इसके इतर आजादी के 60 वर्षो में देश व देश के गांव, गरीब के लिये कॉग्रेस द्वारा किये गये कार्यो पर संज्ञान ले, तो नये उघोग बड़े-बड़े बांधो की स्थापना से लेकर अन्तराष्ट्रीय लीडरशिप हरित क्रान्ति बैंको का राष्ट्रीयकरण भूमि चकवन्दि परिवार नियोजन श्रमिक कानून सहित एकता अखण्डता संचार, व्हीकल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार क्रान्ति के साथ ही आर्थिक मजबूती के अलावा आम जनता की सत्ता में सीधी भागीदारी एवं आम देश वासी के हक को छीनने वाले भ्रष्ट सिस्टम को सुधारने की ताकत सूचना के अधिकार, भूमि अधिग्रहण, वन भूमि अधिनियिम, खादय सुरक्षा बिल, गांव-गांव में शिक्षा स्वास्थ रोजगार का अधिकार और आज जिनका फीता काट लोग वाहवाही लूट रहे है, वह कॉग्रेस की ही उपलब्धि है। 

उ.प्र. की महान जनता व युवाओं का समझना होगा कि कॉग्रेस को बदनाम कर सत्ता हासिल करने वाले दलो ने सत्ता प्राप्त करने के बाद उ.प्र. में क्या किया। वहीं सत्ताधारी रहे, एक दल ने समाजवाद के नाम स्वयं को परिवार ही नहीं स्वयं के कुनवे को मजबूत कर नैतिक, मूल्य सिद्धान्त और लौकतंत्र को सरेयाम बदनाम किया तो एक ओर दल, दलितों के नाम सत्ता में रहा उसने भी निर्जीव बुतो का जंगल तैयार कर, स्वयं को लेाकतांत्रिक व्यवस्था के बीच सुप्रीमों घोषित कर लिया। 

रहा सवाल हिन्दुत्व के नाम आजादी के बाद से निरन्तर विलाप करने वालो का तो वह भी भगवान राम के नाम सत्ता में आये सत्ता सुख उठाया और फिर से सत्ता सुख भोगने साम, नाम, दण्ड, भेद को अपना पुन: सत्ता में काबिज होने जी जान से जुटे है। मगर उ.प्र. की महान जनता व युवाओं को क्या मिला? फिर वह चाहे किसी भी धर्म, जाति के हो। 

सच तो यह है कि वह वहीं के वहीं है, मगर जनहित, जनकल्याण के नाम सत्ता लूट का खेल उ.प्र. में अनवरत चलता रहा है। अगर कॉग्रेसी दुश्मनों की माने तो कॉग्रेस आज उ.प्र. में कमजोर है क्योंकि कॉग्रेस को ठिये ठिकाने लगा स्वयं के स्वार्थो की पूर्ति करने वाले आज भी कॉग्रेस में मय दल, बल, परिवारों के बने हुये जो स्वयं को पोषित कर स्वयं का भविष्य चमकाने आज भी लगे हुये है।

जब तक राहुल इनसे निजात नहीं पा लेते, तब तक वह कभी कामयाब नहीं हो सकते, फिर प्रदेश जो भी हो।  बेहतर हो राहुल भी उ.प्र. के इस दर्द को समझेऔर उ.प्र. की महान संघर्षशील जनता की भावनाओं का स मान करे। क्योंकि आजादी लड़ाई में उ.प्र. का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में उ.प्र. व वहां की आवाम के मान स मान, स्वाभिमान की रक्षा एवं देश की स यता, संस्कृति एवं राजनीति के मूल्य सिद्धान्तों की रक्षा करना उनका कत्र्तव्य है क्योंकि देश ही नहीं उ.प्र. की जनता युवा, बुजुर्ग, बच्चों को राहुल से कॉग्रेस के भावी मुखिया होने के नाते बड़ी उ मीद है। जरुरत है उन्हें देश-प्रदेशों की आवाम से बगैर किसी सलाहलकार, सहयोगी का सहयोग लिये बगैर वह अब उ.प्र. की महान जनता से सीधे मुखातिब होना चाहिए न कि बंधन-गठबन्धन के जुमले में फस समय बर्बाद करना चाहिए। क्योंकि उ.प्र. प्रदेश की जनता समझदार ही नहीं राजनैतिक रुप से परिपक्व भी है।  
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