5 वर्ष दिये है तो 50 दिन क्या चीज है ?

व्ही.एस. भुल्ले। आतंक, भ्रष्टाचार, कालेधन पर हुई सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल पक्ष-विपक्ष कॉग्रेस, भाजपा या अन्य दलों का नहीं। ऐसे मौके पर राष्टहित में सभी को एक दिखना चाहिए न कि राष्ट्रहित की बिना पर राजनीति होना चाहिए। ऐसे में कोशिस यह होना चाहिए कि गायों की आड़ में गौरी, गजनबी की तरह आतंक, कालाधनधारी, भ्रष्टाचारी नहीं बचना चाहिए। क्योंकि देश का प्रधानमंत्री किसी दल विशेष का नहीं होता, न ही राष्ट्र व राष्ट्र की आवाम की बेहतरी से इतर उसकी कोई महात्वकांक्षी होती है। 

अगर देश का प्रधानमंत्री देश व देश की आवाम की बेहतरी के लिये 50 दिन का समय चाहता है तो देश की महान आवाम को यह समय अवश्य देना चाहिए क्योंकि जब वोट देकर 5 वर्ष तक देश के प्रधानमंत्री को देश की बेहतरी के लिये चुनाव के माध्ययम से सत्ता सौंप दिये है तो 50 दिन क्या होते है। 

जब देश में चुनाव होते है तो हमें 3 माह तक अपना बहुमूल्य समय गवा तकलीफ भोग समय खर्चना होता, जब हम राशन, बिजली, पानी, चिकित्सालयों, खाद, बीज, बैंको में लाइन लगा सकते है। फिल्म घरों में टिकिट हासिल करने लाइनों में लग सकते है तो देश की खातिर यह कुर्बानी क्यों नहीं। 

ये अलग बात है कि देश के प्रधानमंत्री के आव्हन से पूर्व ही देश के सबसे बड़े दल कॉगे्रस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी स्वयं लाइन में लगभग 4000 के नोट बदलवा चुके है। और पार्टी कार्यकत्र्ताओं से देश भर में यह अपील भी कर चुके है कि लाइन में लगे लोगों की कॉग्रेस कार्यकत्र्ता मदद करे। यह उनका कत्र्तव्य था जिसे उन्होंने एक जि मेदार विपक्षी दल के भावी मुखिया के रुप में निभाया। मगर अफसोस कि अन्य किसी विपक्षी दल से ऐसा सार्थक प्रयास नहीं आया सिवाय सवाल खड़ा करने के जो हमारे महान लोकतंत्र पर एक साबालिया निशान है। 
बैसे भी देश के प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर एक सभा को स बोधित करते हुये कहा है कि अगर 50 दिनों पश्वात उनकी कोई गलती रह जाती है तो वह सरेयाम वह सजा भुगतने तैयार है। जो देश की जनता देना चाहे यहां तक कि वह देश से आतंक, कालाधनधारी, भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करने किसी भी सीमा तक जाने, यहां तक कि वह जान का जोखिम तक उठाने तैयार है। 

उन्होंने देश से वादा किया है कि उनकी सरकार को ईमानदार नागरिक, महिला, गांव, गरीब, किसानों को परेशान होने की जरुरत नहीं। मगर उनकी सरकार आतंक, कालाधन, भ्रष्टाचारियों को ब सने वाली नहीं। मगर जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के मंत्री आलाअधिकारी हाई एलर्ट पर है। उसी तरह देश के विभिन्न प्रदेशों की सरकारों को भी वहां के हाई एलर्ट पर रह, जनता का याल रखना चाहिए। राजनीति 50 दिन बाद भी हो सकती है। आसन्न चुनावों में हार जीत भी भाग्य भरोसे हो सकती है। मगर देश के लिये नासूर बने आतंक, कालाधन, भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कारगार सर्जिकल स्ट्राइक फिर कभी नहीं हो सकती। 

सो 50 दिन देश के राजनैतिक दलो को ज्यादा नहीं लगना चाहिए और एक जि मेदार विपक्ष की भूमिका, रचानात्मक तरीके से निभाना चाहिए। वहीं सरकार को भी सजग रहकर उन परेशानियों पर पैनी नजर रखना चाहिए। जहां-जहां व्यवहारिक परेशानी गांव, गरीब, किसान को आ रही हो। ऐसे में वह गौरी, गजनबी जयचन्दो पर भी नजर र ानी चाहिए। जो गांव, गरीब, किसान को गाय समझ उन्हें आगे रख देश में देश की खातिर हुई जबरदस्त आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक से सरकार का ध्यान बटा, बच निकलना चाहते है। 

मगर यह देश में देश की खातिर तभी स भव है जब विभिन्न प्रदेशों में पदस्थ सत्तारुढ़ सरकारें प्रधानमंत्री का रचनात्मक सहयोग कॉग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल की तरह हाथ बटा करे। और देश की ईमानदार, राष्ट्र भक्त कॉम, गांव, गरीब, किसानों की तरह 50 दिन की होने वाली छोटी मोटी परेशानियों का त्याग करें तभी हम सशक्त, स पन्न, खुशहाल राष्ट्र बना पायेगेें। 
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