क्या दल में ही मौजूद है, कॉग्रेस के दुश्मन

व्ही.एस.भुल्ले। कॉग्रेस में आखिर ऐसा क्यों होता है कि जब भी राहुल कॉग्रेेस में जान फूकने देश व देश के आम गरीब, किसानों के हित में कोई कदम उठाते है, कॉग्रेस केे कुछ नेताओं द्वारा उनकी कड़ी मेहनत या जाबांजी पर अपने गैर जरुरी, गैरजि मेदारना व्यान दे, उस पर पानी फेर दिया जाता है। 

जब वे दलितों के घर जाते है तब भी उन पर उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किये जाते है जब वह अपराध, अपराधियों को संरक्षण देने वाले बिल को रद्दी की टोकरी बताते है। तब उनकी संजीदगी पर सवाल खड़े किये जाते है। जब वह महाविद्यालयों युवाओं से बतियाते है तो उनसे ऐसे व्यान दिलवा दिये जाते है जिसकी इजादत हमारे महान संस्कार देते है, न ही हमारी महान सनातन संस्कृति देती है। इतना ही नहीं जब तब राहुल की सहभागिता भी बगैर मुद्दों को समझे ऐसे आन्दोलनों में करवा दी जाती है, जिन पर विपक्ष के सवाल बन जाते है, तो कभी उन्हें दरकिनार कर कॉग्रेस के प से ही नये नेतृत्व को आगे लाने के सिगुफे छोड़ जाते है। जब इन सबसे इतर अपनी जांबाजी देश व देश के करोड़ों गरीब, किसान के सरंक्षण में दिखते हुये 2 हजार से अधिक कि.मी. की यात्रा कर कॉग्रेस में जान फूकने उ.प्र. जैसे राजनैतिक रुप से खूंखार प्रदेश में अपनी जान जोखिम डाल पूरे महिने यात्रा निकालते है तो यात्रा पूर्ण होने की पूर्व संध्या पर ही कुछ कॉग्रेस नेता, सेना की जाबांजी पर सवाल खड़े कर, सबूत मांगने जैसे व्यान मीडिया  में दे आते है। 

जिसके चलते राहुल की महिने भर की हजारों किलोमीटर की यात्रा और उनकी जाबांजी पर भी पानी फिरवा देते है। और देश के अहम मुद्दे पर कॉग्रेस की किर-किरी कर कॉग्रेस को सवालों के घेरे में ले आते है। 
जिसके चलते कॉग्रेस को बैवजह सफाई दें, ऐसे गैर जि मेदार नेता और उनके व्यानों से स्वयं को अलग कर सेना व सरकार के समर्थन में व्यान देना पढ़ता है। जबकि कॉग्रेस आलाकमान श्रीमती सोनिया गांधी स्वयं राहुल गांधी सरकार व सेना के राष्ट्रहित में लिये गये साहसी कदम की सराहना कर चुके थे। उसके बावजूद कॉग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी की लाइन के विरुद्ध मीडिया के बीच सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल कहां की रणनीति या राजनीति है। 

इससे स्पष्ट है कि कॉगे्रस के दुश्मन विरोधी राजनैतिक दल ही नहीं कॉग्रेस में भी ऐसे लोग मौजूद है, जो कॉग्रेस को नुकसान पहुंचा विरोधी दलो को फायदा पहुंचाना चाहते है। जैसा कि वह नरसिंह राव सरकार से लेकर यूपीए सरकार तक करते आ रहे है और वह आज भी राहुल के नेतृत्व और कॉग्रेस को देश में मजबूत नहीं देखना चाहते। और गाहे बगाहे देश के अहम मुद्दों पर विपक्ष द्वारा बिछाये जाल में कॉग्रेस को फसा उसे नीचा दिखाने का कार्य करते रहते है। 

अगर इसे चुनावी रणनीति भी मान लिया जाये, तो इन कॉग्रेस वफादारों, रणनीतिकारों को इतना तो ज्ञान होना चाहिए कि जिस देश का बच्चा-बच्चा यह जानता हो कि देश और सेना क्या होती है, किन मुद्दों पर सवाल खड़े किये जा सकते है। जब समुचा देश आतंक आतंकवादियों को सबक सिखाने के मुद्दे पर एक हो, स्वयं कॉग्रेस आलाकमान राहुल भी सरकार के साथ हो, विदेशी मित्र देश व देश का समर्थन आतंकवाद के विरोध में हो, और सेना व सरकार द्वारा उठाये गये कदम की सराहना कर रहे हो। ऐसे में गैर जरुरी, गैरजि मेदारना व्यानो से कॉग्रेस व देश का क्या भला होने वाला है। 

रणनीतिकारों को मालूम होना चाहिए कि कॉग्रेस के डी.एन.ए में कुर्बानी, शहादत देश व देश की एकता अखण्डता बनाये रखने के लिये आजादी से पूर्व व बाद तक में रही है और आज भी है। फिर कॉग्रेस देश से जुड़े खासकर सेना की सेवा पर कैसे सवाल खड़े कर सकती है। और वह भी तब जब कॉगे्रस देश व देश की एकता अखण्डता, स प्रभुता की खातिर स्व. पण्डित नेहरु से लेकर शास्त्री, इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी जैसी श िशयतों ने कुर्बानी दी हो, श्रीमती सोनिया जी जैसी जीवट नेता जिन्होंने सब कुछ लुटाकर भी भीषण त्रासदी के बावजूद देश व देश की गरीब जनता, किसानों के हितों की रक्षा की खातिर अपने इकलौते पुत्र को उ.प्र. जैसे खूंखार प्रदेश में खुली यात्रा की इजाजत दी हो, और लाख जान जोखिम का खतरा उठा राहुल ने आम गरीब, किसानों की खातिर हजारों किलोमीटर यात्रा हाल ही में पूर्ण की हो। 

मगर लगता नहीं कॉग्रेस का दामन थाम स्वयं का भविष्य चमकाने वाले यह स्वार्थी कॉग्रेस नेतृत्व की इस नि:स्वार्थ सेवा को समझेगें। क्योंकि वह तो आज भी कॉग्रेस के भोले भाले नेतृत्व को वर गला और जाने किस वीरान जगह ले जाकर छोड़ेगे कहना मुश्किल है। शायद आज के समय में इसे ही राजनीति कहते है, जिन सनातन संस्कार, स यता के सहारे, मूल्यों, सिद्धान्तों की राजनीति कॉग्रेस ने आज तक की है। जिसका अक्षरश: पालन श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल कर रहे है, उसके चलते देश में राहुल के बढ़ते कद और आभामण्डल को कुछ नेता पचा नही पा रहे है। इसीलिये वह सुनियोजित ढंग से कॉग्रेस के अन्दर और बाहर सवाल उठाते रहते है। 

बेहतर हो आलाकमान या स्वयं राहुल इस तरह के गैर जरुरी, गैर जि मेदारना व्यान देने वालो एवं उन रणनीतिकारों की समीक्षा करे जो इस तरह की हरकतें कर कॉग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे है। अगर जरुरी हो तो कड़ी कार्यवाही भी ऐसे नेताओं पर कर समुचे देश को स्पष्ट संदेश दे, कि राजीव का बेटा और स्व. इन्दिरा जी का नाती अभी मौजूद है किसानों की रक्षा और सेना का मान-स मान स्वाभिमान बचाये रखने, तभी कॉग्रेस जिन्दा रह पायेगी, बरना यही हाल रहा तो ऐसे शुभचिन्तक, सलाहकार, रणनीतिकारों के रहते कॉग्रेस आज नहीं तो कल अवश्य डूब जायेगी। 
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