कुल दीपक की खातिर, कुनवे की कुर्बानी...?

व्ही.एस.भुल्ले। जिस तरह से विगत दिनों से समाजवादी कुनवे मेें उठा पटक मची है और अब यह कलह जिस मोड़ पर जा पहुंचा है उसे देखकर तो यहीं लगता है कि कुल दीपक के आगे कुनवे की कुर्बानी की तैयारी हो चुकी है। 

ये अलग बात है कि स.पा. सुप्रीमों मुलायम सिंह के रणकौशल पर न तो समाजवादियों को कोई संदेह होना चाहिए न ही राजनैतिक पण्डितों को क्योंकि मुलायम ऐसे नेता है जो सही समय पर सही निर्णय लेने में माहिर है। अगर समाजवादियों के बीच उनके कुछ न करते हुये या करते हुये कुछ हो रहा है, या कोई ऐसा राजनैतिक घटनाक्रम उ.प्र. की राजनीति में घट रहा है तो इन सब घटनाओं के कोई तो परिणाम होगेंं? जिसका उ.प्र. का लोगों को ही नहीं परिवारजन, समाजवादियों को भी इन्तजार करना चाहिए। 

क्योंकि मुलायम सिंह जैसे नेता बिरले ही होते है जो समय आने पर अपने अनुकूल परिस्थिति बनाने में माहिर होते है। इसीलिये मुलायम सिंह के रहते किसी को यह मुगालता नहीं पालना चाहिए कि पार्टी डूब रही है या समाजवाद डूब रहा है। भले ही मुलायम, राममनोहर लोहिया की मंशा अनुरुप समाजवाद खड़ा करते-करते राजनीति में उलझ गये हा। मगर वह लोहिया का समाजवाद स्थापित नहीं कर सके सिवाये समाजवाद के नाम को बचाये रखने के अलावा। अगर कयासों और घट रहे घटनाक्रमों की समीक्षा की जाये तो निश्चित ही उ.प्र. में समाजवादी पार्टी एक नया स्वरुप धारण करने जा रही है जैसी कि स भावना है, वह भी ऐसे दबे पांव की किसी को कानो कान खबर न हो। 

अब उ.प्र. में समाजवादियों के बीच या मुखिया के परिवार के बीच घट रहे घटनाक्रमों के परिणामों के पीछे जाये तो विगत 2 माह से उ.प्र. ही नहीं समुचे देश में मीडिया चैनलो पर स.पा. पार्टी चमक रही है। जहां आरोप-प्रत्यारोप विरोध ही नहीं कुनवे के लोग ही आपस झगड़ रहे है। जिसमें एक गुट जो सत्ता में ताकतवर हो, सत्ता का हीरो बन ताकत दिखा रहा है, तो दूसरा गुट दल में हीरों बन अपना रुतवा दिखा रहा है। 

हालाकि कुनवे में छिड़ी जंग से न तो मुलायम ही बेखबर है, न ही राजनीति में दखल रखने वाले वह महापण्डित बेखबर है। मगर घटित हो रहे घटनाओं और भविष्य के लिये निर्धारित होते स.पा. के भविष्य के बारे में माने तो आसन्न चुनावों में लगता नहीं कि स.पा. की सेहत पर कोई खास असर होने वाला है। मगर इस सबसे इतर इतना तो तय है कि कुल दीपक की खातिर और कुनवे के स मान की खातिर फिर कीमत जो भी हो, उ.प्र. के समाजवादी चुकाने तैयार दिखते है। जैसी कि स भावना है, कलह से विरोधियों को कुछ मिले या फिर न मिला। मगर समाजवादी कुनवे की अवश्य लॉटरी खुल उप्र के प्रचार में फ्री फोकट में समाजवाद के आधार पर चटकने वाली है। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment