गरीबों के धन से पूंजीपतियों की आओ भगत, न कोई प्रोजक्ट, न ही डी.पी.आर. कैसे मिलेगा रोजगार, म.प्र. में एक और ग्लोबल इन्वेस्टर मीट

व्ही.एस.भुल्ले। मप्र पूर्व में हुई जितनी भी ग्लोबल इन्वेस्टर मीट की सफलता असफलताओं को छोड़ आसन्न 22-23 अक्टूबर 2016 को इन्दौर में होने वाली 2 दिवसीय ग्लोबल मीट की ही चर्चा को जिसमें 3000 मेहमानों के शामिल होने का अनुमान जुटाया। जिसमें विश्व में दूसरा दर्जा प्राप्त कार क पनी की आ सहित कई नाम चीन औद्योगिक घराने सहित कई देश के राजदूत भाग लेने वाले है अगर स्वयं की माने तो सरकार ने व्यापक पैमाने पर मेहमान नवाजी के लिये लगभग 40 होटलो के 1500 बुक किये है जिसमें 200 स्वीट 50 लग्झरी के साथ कुल 300 कारें किराये पर ली जा रही है। 

हर इन्वेस्टर मीट की तरह शायद यह समिट भी गरीबों के धन पर धमाकेदार हो और हजारों, लाखों, करोड़ के ओ.एम.यू भी हो मगर पूर्व अनुभव कहता है कि अभी तक भारत सरकार द्वारा की गई कुछ घोषणाओं के अलावा एक भी ऐसा उदाहरण म.प्र. के सामने नहीं जिस पर गर्व मेहसूस किया जा सके। और म.प्र. में बढ़ती बेरोजगारी की फौज राहत मेहसूस कर पाते। लगभग 1 लाख 40 हजार करोड़ के कर्जे तले दवे प्रदेश को इस स िमट से बड़ी उ मीद है। मगर पूर्व इतिहास और वर्तमान हालात बताते है कि बगैर किसी प्रमाणिक वातावरण अनुकूल पूर्व योजना के विगत वर्षो से चल रही स िमटों से कुछ खास निकलने वाला है। क्योकि हर कार्य की सफलता का अपना प्राकृतिक अध्यात्मिक सिद्धान्त होता है जिसके आधार पर योजना तैयार की जाती है और वह मूर्त रुप ले पाती है। 

बहरहॉल जो भी हो हमें इन्तजार करना होगा 22-23 अक्टूबर का काश जिस तरह की ग्रीन पेट पंूजीपतियों को बिछाये जा रहे है। अगर इस तरह के ग्रीन पेड़  गांव गरीब, युवा उघोमियों को पूरी निष्ठा ईमानदारी से बिछाये जाते तो आज प्रदेश वासियों को यह दिन न देखना पड़ते, और म.प्र. का नक्शा ही कुछ और होता। 
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