वे जन्म से ही नहीं, कर्म से भी महाराज थे

व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स/30 सितम्बर 2016। गुना, विजयपुर, एन.एफ.एल फर्टिलाइजर, गेल, सिथौली रेल स्प्रिंग फैक्ट्री, भिण्ड जिले में नया मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र, बामौर औद्योगिक क्षेत्र, जीवाजी यूनिवर्सटी में एमबीए सहित नये विषयों सहित समुचे ग्वालियर-च बल में नवोदय विद्यालयों की शुरुआत देश में शताब्दी ट्रेनो की श्रंृखला देश भर के रेलवे स्टेशनों का उन्नैनियकरण म.प्र. में कई सुपर फास्ट टे्रनों का स्टॉफिज गुना सहित ग्वालियर, डबरा में कई बड़े रेलवे ऑव्हर ब्रिज ग्वालियर में हवाई अड्डा एवं छोटे-छोटे जिलों में हवाई पट्टियां शिवपुरी के नये खेल स्टेडियम के अलावा ग्वालियर में अन्तराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट एवं हॉकी स्टेडियम शिवपुरी में टाइगर सफारी सहित टुरिस्ट विलेज होटल के अलावा अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रेल का लोहा मनवाने वाले उस नौजवान ने नेता का यथार्थ बामौर के केप्टिव पावर प्लान्ट ही नहीं ग्वालियर व्यवसायिक मेला सहित 300 किलोमीटर से अधिक गुना-इटावा रेल लाइन का निर्माण और पूर्व से पश्चिम को जोडऩे वाली झांसी वाया शिवपुरी, श्योपुर होकर सवाईमाधौपुर को जोडऩे वाले रेल टे्रक का प्रार िभक सर्व उंगलियों पर गिने जाने वाले यह वो कार्य है, जो उन्हें जनतंत्र में महाराज के ओहदे तक ले जाते है। यूं तो वह सिंधिया राजवंश के उत्तराधिकारी होने के कारण भी महाराज कहे जाते रहे, मगर लोकतंत्र में उनको यह तमगा आम जनता से उन्हें हासिल था। 

वे यथार्थ में विश्वास रखने वाले वह विराट व्यक्तित्व के धनी थे जिन्हें देश कभी प्रधानमंत्री के रुप में दे ाने लगा था। मगर उनका सरल स्वभाव और आम लोगों के साथ उनका मेल-मिलाप उन्हें हर उस अहम ओहदे से अलग रखता था जिसे पाकर लोग अहंकार में डूब जनसेवा को भूल जाते है। छोटे से छोटे कार्यकत्र्ता, शुभचिन्तकों के साथ उनका व्यवहार आम था, लोग महसूस ही नहीं कर पाते थे कि वह कितने बड़े कद और विराट व्यक्तित्व के साथ स पर्क बनाये हुये है। राजनीति में जितना भी दखल उनका रहा उन्होंने जीवन पर्यन्त हमेशा ऐसी मिशालें देश में प्रस्तुत की, जो उन्हें सर्वहारा वर्ग के बड़े हितेशी के रुप में मानने पर लोगों को मजबूर करती है। एक आम साधारण से कार्यकत्र्ता या आम नागरिक की उंगली पकड़ रातो-रात विधायक, मंत्री जैसे सत्ता के ओहदों तक पहुंचा देना उनका आम आदमी से दिली लगाव का प्रमाण है। 

म.प्र. ही नहीं समुचे देश में यहां तक कि विदेशों में भी जनसेवा, राष्ट्रसेवा से जुड़े ऐसे कई उदाहरण है जो उन्हें आज की राजनीति और राजनेताओं से अलग करती है। एक छोटी सी जगह के अदने से पत्रकार से अन्तिम दोस्ताना व्यवहार के वह पल कभी नहीं भुलाये जा सकते, जो उनके हर आम कार्यकत्र्ता व्यक्ति के साथ हुआ करते थे। यह उनका अपना क्षेत्र के लोगों से अपनत्व और अगाध स्नेह ही होता था। कि वह कितनी ही जल्दी में क्यों न हो, यहां तक कि स्टार्ट हेलिकॉप्टर में भी अगर वह सुन लेते थे तो उतर कर लोगों के सवालो का जबाव दिये बगैर नहीं जाते थे। ये लगाव ही उन्हें लोगों के दिलो का महाराज बनाता था। 

इतना कुछ करने के बावजूद उनके मन में बड़ी कशिश रहती थी कि वह कैसे भी शिवपुरी में ऐसे उघोगों की स्थापना करा सके जिससे शिवपुरी को सुन्दरता प्रदान करने वाले घने जंगल और पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। इसके लिये उन्होंने देश के जाने माने कई उघोगपतियों, फिल्मी कलाकारों शिवपुरी की सैर कर कराई, मगर आशातीत सफलता नहीं मिल सकी। 

हमेशा सा प्रादायिक ताकतों से देश को आगाह करने वाले इस व्यक्तित्व ने कभी रिण माफी की पर परा चुनाव हारने, जीतने का हथियार बनाने का भी हमेशा पुरजोर विरोध किया। यह उनकी दूर दृष्टि ही थी जो दुष्परिणाम आज हमें देखने मिल रहे है, जिसके लिये वह राजनीति और आम मतदाता को आगाह करते रहते थे। आज उनकी पुण्य तिथि है इस मौके पर राजनीति करने वाले लोगों को ऐसे जीवट व्यक्तित्व की बातों से सीख लेना चाहिए। 

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