पूंजी की गिरफ्त में लोकतंत्र: शोषण, भ्रष्टाचार से मुक्ति का मार्ग निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार: संयोजक स्वराज

विलेज टाइम्स। लोकतंत्र की जो दुर्दशा देश में पनपते पूंजीबाद, शोषण बढ़ते भ्रष्टाचार के चलते हो रही है उससे मुक्ति का एक ही मार्ग है, निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार और यह भी तभी स भव है जब हम सभी एक जुट हो स्वराज के संकल्प के साथ एक जुटता से आगे बढ़े। 

क्योंकि स्वराज न तो किसी व्यक्ति, संस्था, संगठन, दल का विरोधी है , न ही उसका किसी भी प्रकार की हिंसा में कोई विश्वास फिर चाहे वह मन, कर्म, वचन, भाषा में ही क्यों न हो, स्वराज पूर्णत: अहिंसा के मार्ग का पक्षधर है जिसका अन्तिम लक्ष्य खुशहाल राष्ट्र का निर्माण है। 

और यह तभी स भव है जब हम निर्वाचन प्रक्रिया के सुधार की दिशा में बढ़े। लोकतंत्र में बढ़ते पूंजी के हस्तक्षेप से आज लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। और कमजोर लोकतंत्र कभी भी मजबूत खुशहाल राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकता। 

राजनीति और समाज में बढ़ते पूंजी के हस्तक्षेप से जहां शोषण, भ्रष्टाचार का साम्राज्य बढ़ रहा है, वहीं लोकतंत्र भी अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। देश के नागरिकों के जिस अमूल्य मत से सरकारें बनती बिगड़ती है जिस अमूल्य मत को कलफती जनता के बीच से हासिल कर सरकारे बनती है। निर्वाचन प्रक्रिया के समाप्त होते ही वहीं सरकारे अपनी दिशा प्राथमिकतायें बदलने पर मजबूर होती है जिसकी मंशा को परवान चढ़ाने नौकरशाही और कथित मीडिया दिन रात एक करती है मगर अगला चुनाव आने तक जनता की हर उ मीद अकांक्षा टूट चुकी होती है। शोषण भ्रष्टाचार से कलफते लोगों को उ मीद होती है, कि ये सरकार नहीं तो आने वाली सरकार उनकी सुनेगी। मगर विगत 25-30 वर्षो में ऐसा कुछ खास नहीं हो सका, जिससे मजबूत लोकतंत्र और खुशहाल राष्ट्र बन पाता। आज सभी परेशान है न तो दल, संस्थायें, संगठन न ही नागरिक खुशहाल है, न ही सरकारें और नौकरशाह और तथा कथित मीडिया सन्तुष्ट है, सभी खुशहाल जीवन की तलाश में दिन रात जुटे है। 

मगर हालात अभी भी गमगीन है, कारण साफ है, कि पूंजी का हस्तक्षेप इसलिये जरुरी है कि निर्वाचन प्रक्रिया में बदलाव कर इसे प्रभावी बनाया जाये, जिससे पूंजी हस्तक्षेप, शोषण, भ्रष्टाचार से देश व देश के लोकतंत्र को मुक्ति मिल सके। 
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