राहुल यात्रा में स्पष्ट संदेश, सहजने की क्षमता: समरसता के साथ भूत, भविष्य की अनुभूति अहम

विलेज टाइम्स/व्ही.एस.भुल्ले। 6 सितम्बर 2016। कहते है देर आये दुरुस्त आये, मगर इस यात्रा का सारा दारोमदार इसकी सार्थकता पर टिका है इस यात्रा से जिस तरह स भावनायें तलाशी जा रही है उसके लिये जरुरी है कि राहुल को यात्रा के दौरान दिल बड़ा और दिमाक तथा दर भी खुला रखना होगा। क्योंकि उनके कार्यालय के नाम संचालित कार्यालय, टेलीफोन, संवाद हीन सॉशल मीडिया देश के अन्तिम पन्ति में खड़े व्यक्ति और आम कॉग्रेसी के बीच सबसे बड़ी बांधा है। 

मगर जिस तरह की दरियादिली और दबगियत देश में एक ल बी यात्रा को लेकर राहुल ने दिखाई है, वह डूबती कॉग्रेस के लिये अहम है। जिसमें यात्रा के दौरान उनको प्राप्त होने वाली बौद्धिक स पदा आम एवं खास लोगों को सहजने की क्षमता, समरसता और देश के नागरिकों के लिये ाूत, भविष्य से जुड़े स्पष्ट संदेश होना चाहिए, जिसको देश का आम नागरिक ही नहीं, समुचा देश मेहसूस कर सके, यहीं सच्चे मायने में इस ल बी यात्रा की सफलता का पैमाना हो सकता है। 

फिलहाल तो इस यात्रा से यह सवाल अवश्य यक्ष होगा कि राहुल देश व देश वासियों को लेकर क्या सोच रखते है। इतिहास, वर्तमान हालातों के मद्देनजर वह क्या करना चाहते है, जिस पर कॉग्रेस जैसे महान संगठन का सारा दारोमदार टिका है। 

ये अलग बात है कि राहुल से कॉग्रस के शुभचिन्तक एवं आम कॉग्रेसी देश भक्तों को अभी भी बड़ी उ मीद है, मगर यू.पी.ए सरकार के पतन पश्चात पूरे 2 वर्ष से अधिक का समय निकलने के  बावजूद भी कॉग्रेस में कोई खास बदलाव संगठनात्मक, रणनीतिक और वैचारिक तौर पर नहीं दिखा। आखिर क्यों इसका कारण भी स्वयं राहुल को ही इस यात्रा में तलाशना होगा और यह भी तय करना होगा कि वह एक सी.ई.ओ की भूमिका में संगठन चलाना चाहते है, या फिर एक संवेदनशील लोकप्रिय सफल नेता के रुप में, दोनो विधाओं का सन्तुलन ही कॉग्रेस में जान फूक  देश भर में एक मजबूत संगठन खड़ा कर सकता है। 

क्योंकि जब तक संगठन में कार्यकत्र्ता सहजने वाले स्टॉल संगठन के रुप में गांव के कस्बे, शहरों में नहीं होगें तब तक बेहतर ब्राडिंग का कोई असर आय लोगों पर होने वाला नहीं। संचार क्रान्ति के दौर में जीवंत स पर्क का अभाव इस बात का प्रमाण है कि राहुल को यात्रा ही नहीं दिल, दिमाक और दर पर भी ध्यान देना होगा तभी इस यात्रा के परिणाम और लोगों को कॉग्रेस की अनुभूति का एहसास होगा।      
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