साहसी कोम, कमजोर संयम: समर्पण का आभाव विश्वास में बाधा

विलेज टाइम्स, व्ही.एस.भुल्ले/26 सितम्बर 2016। आज हमारे मजबूत लोकतंत्र के बीच समर्पण का आभाव देश के विश्वास में सबसे बड़ी बाधा है, जो विभिन...

विलेज टाइम्स, व्ही.एस.भुल्ले/26 सितम्बर 2016। आज हमारे मजबूत लोकतंत्र के बीच समर्पण का आभाव देश के विश्वास में सबसे बड़ी बाधा है, जो विभिन्न रुपों में सामने आ रहा है। जो कभी-कभी अहम मसलों पर भी निरुत्तर, तो कभी कभी हम इतने हताश या उत्साहित हो जाते है कि भावना, स मान, स्वाभिमान या फिर निहित स्वार्थो के चलते भावनाओं की बाढ़ में सब कुछ तहस-नहस कर वहां ले जाना चाहते है जो किसी भी महान राष्ट्र उसकी साहसी आवाम तथा सभ्यता, संस्कृति के लिये उचित नहीं। 

सेकड़ों, हजारों वर्ष पुरानी हमारी पर परा संस्कृति मौजूद इतिहास इस बात के गबाह है, कि इस महान भू-भाग पर आपदायें या फिर चाहे वह प्राकृतिक रही हो या फिर मानव जनित कोई भी आपदा भारत का बाल बाका तक नहीं कर सकी। क्योंकि इस भू-भाग पर पैदा होने वाला नागरिक साहसी ही नहीं सांस्कारिक भी रहा है और देश के मान-स मान और नागरिकों की रक्षा के लिये अकृान्ताओं से लोहा लेने में भी पीछे नहीं रहा है। 

मगर जरा-जरा सी बात पर भावुक हो पनपते अविश्वास स्वार्थ बस जो असंयम देखने में आता है वह इस बात के स्पष्ट संकेत है कि समाज, सत्ता, राजनीति के चरित्र में कोई तो कमी है जो लोग जरा-जरा सी बात पर संयम खो गलत कदम उठा जाते है। या फिर सत्ता व व्यवस्था पर दबाव बनाते है जिससे हमारी पहचान तो प्रभावित हो ही रही है। हमारी संस्कृति, स यता भी कलंकित हो रही है। 

आज सडक़ों पर भीड़ के रुप में होते फैसले, बात मनमाने सदन से इतर सडक़ों पर प्रदर्शन और देश की अस्मिता से जुड़े अहम व ग भीर मसलों पर भावनात्मक दबाव, कटाक्ष, प्रदर्शन निश्चित ही लोकतांत्रिक तरीके है, जो सत्ता को भावनाओं से अवगत कराने हो सकते है, मगर सटीक नहीं। 

यह सत्ता, समाज, राजनीति सहित आम नागरिकों में बढ़ते विश्वास की वह कमी है, जो इस तरह की स्थितियां हमारे बीच सर उठा रही है। अब समय आ गया, जब इस देश की साहसी कॉम को निहित स्वार्थो से निकल देश व देश वासियों की खातिर सत्ता, समाज, राजनीति में अमूल-चूल परिवर्तन लाने होगें। कारण देश पर 1947, 1962, 1965, 1971 से लेकर कारगिल तक, उरी से बढ़े हमले हुये है, मगर हमारे महान देश, न ही उसकी महान आवाम ने कभी संयम नहीं खोया परिणाम कि हम विश्व की गिनी चुनी महाशक्तियों में से आज एक है। 
निश्वित ही सोते हमारे जवानों पर उरी मेें आतंकी हमला निदनीय है, और प्रतिशोध के काबिल भी, मगर यह समय  भावनाओं को हवा दें, हंगामा खड़ा करने का नहीं, बल्कि इस तरह की घटनाओं के खिलाफ पूरी सूझबूझ के साथ ग भीर निर्णय लेने का है, जिसने भी हमारे सोते जवानों पर हमला किया, या कराया उनका समय खत्म, अब हमारी साहसी संयमित शुरुआत होनी चाहिए जो हमें परिणाम लाकर दिखाये, रास्ते बहुत है। जरुरत है दृढ़ संकल्पित हो, साहस के साथ अपनी काबलियत दिखाने की, जिससे देश में एक विश्वास का माहौल कायम हो, और देश वासियों के बीच सुरक्षा का भाव भी पैदा हो, तभी हम इस तरह की बढ़ती विसंगतियों को राष्ट्र से मिटा पायेगें और हमारी महान संस्कृति पर परा सहित समाज, सत्ता, राजनीति का विश्वास आम देश वासियों के बीच पैदा कर पायेगें। 

ये पॉस कॉलोनी है, या गन्दगी के अड्डे संक्रामक रोगो के हब बनते, बेनामी प्लाट 
विलेज टाइम्स/म.प्र. शिवपुरी 24 सितम्बर 2016- जिस तरह से एक सुसज्जित सुन्दर शहर में पहले तो कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों की बाढ़ और अब जगह-जगह बगैर विकसित भूमियोंं पर लोगों घरोंदे तन गये है। नामी बैनामी कॉलोनियों के पास की कृषि भूमि खरीद, छोटे-छोटे प्लाटोंं के माध्ययम से अकूत दौलत बनाने वाले सहित इन अवैध कॉलोनियों में ब्लॉक व प्लाट खरीद पुन: बेचने वाले मालामाल हो लिये, मगर अब जबकि जमीन, प्लाटों का धन्धा ठण्डा पड़ा है। ऐसे में इन कॉलोनियों या उनसे लगी, कृषि भूमि पर खाली प्लाट गन्दगी को समेटे मोटा मुनाफा कमाने के इन्तजार में लावारिश पढ़े है। फिलहाल जिनके धनी धोरियों का कोई पता न तो नगरपालिका के जि मेदार अधिकारियों को है, न ही गन्दगी का दंश झेलने वाले उन लोगों को जो गन्दगी के बीच निवास करने पर मजबूर है। 
कचरे के ढेर में तब्दील पॉस कॉलोनियों में मौजूद खाली प्लाट कई जगह तो गन्दे कचरे के घूरे बन चुके है या फिर आवास पशुओं की एसगाह, गन्दगी का अ बार ऐसा कि इन लावारिश पढ़े गन्दगी से सने प्लाट अब गन्दगी के अड्डों में तब्दील हो, संक्र्रमण बीमारियों के हब बनते जा रहे है। जिन पर न तो नगरपालिका ध्यान दें रही, न ही जिला प्रशासन जिसके चलते शहर भर में खाली पढ़े प्लाट गन्दगी का हब बन ग भीर बीमारी परोस रहे है। 
अगर नगरीय प्रशासन चाहता तो कानूनन ऐसे लावारिस प्लाटों को अपने अधिपत्य में ले, उनके चारों ओर बाउन्ड्री करा सकता है, जिससे शहर भर में सेकड़ों की तादाद मे पढ़े बेसकीमती, भूखण्डों पर पसरी पढ़ी गन्दगी को रोका जा सकता था या ऐसे भूस्वामियों को नोटिस जारी कर उन्हें अपने प्लाट बाउन्ड्री कराने बाध्य किया जा सकता था। 
मगर नगरपालिका के लचर रवैये के चलते अवैध ही नहीं बैध कॉलोनियों खाली पढ़े बेशकीमती प्लाट गन्दगी के ढेर बन संक्रमण बीमारियों फैला रहे। हमारे संवाददाता द्वारा जब बेशकीमती पॉस कॉलोनी गौतम बिहार का भ्रमण किया तो, जाने पहचाने एल.आई.सी. एजेन्ट निर्जय जैन के पास और सामने गन्दगी समेटे खाली प्लाट दिखें, जहां सामने ही सेन्ट्रो कॉन्वेन्ट नाम स्कूल भी चलता है, ऐसी ही स्थिति शहर की कई पॉस कॉलोनियों की है मगर न तो नगरपालिका को ही इससे वास्ता, न ही जिला प्रशासन कोई परेशानी लोग परेशान है, मगर सुनने वाला कोई नहीं। 

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तीरंदाज,321,व्ही.एस.भुल्ले,515,
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साहसी कोम, कमजोर संयम: समर्पण का आभाव विश्वास में बाधा
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