मच्छरों के एसगाह में तब्दील शहर, मच्छरों को स्वर्ग तो मनुष्यों को नरक बना शिवपुरी

विलेज टाइम्स/मप्र शिवपुरी 19 सितम्बर 2016। जैसे ही कुआर महिने की आहट होती है बैसे ही शिवपुरी शहर कराह उठता है कारण शहर व शहर में मौजूद इन्जीनियरिंग को गाली देती गन्दी नालियाँ और शहर के बीचो बीच गुजरने वाले गन्दे नाले जो कभी शहर में मौजूद या अतिक्रमित हो चुके तालाबों की बेस्टबीयर नहर या बर्षाती नाले हुआ करते थे। 

जो अब जान लेवा मच्छरों के एसगाह बन चुके है। अगर तेज सर्दियों और तेज बारिश को छोड़, दे तो 12 महिने इन मच्छरों की धमाचौकड़ी इस शहर के इन गन्दे नालों में मची रहती है। जिसमें शहर की पेयजल समस्या ने बढ़ते जानलेवा मच्छरों के लिये आग में घी का काम किया है, जिनमें डेंगू जैसे खतरनाक मच्छर पैदा होते है। 

शहर की चौपट पेयजल व्यवस्था ने लोगों को घरों में पेयजल स्टॉर कर रखने पर मजबूर कर दिया है क्या गरीब क्या अमीर हर एक के घर पानी का स्टॉर होना आम बात है जिसका परिणाम कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते है कि 15 हजार से अधिक घरों में डेंगू का लार्वा पाया गया है और फिलहाल सर्वे जारी है। 

ऐसे में जब शासकीय सहित प्रायवेट चिकित्सालयों में मरीजों की ल बी चौड़ी कतारें देखी जा रही हो, शासकीय चिकित्सकों को मरीज घर-अस्पताल में देखते-देखते सर उठाने की फुरसत न हो, ऐसे में मच्छरों से फैलने वाली ग भीर बीमारियों का अन्दाजा लगाया जा सकता है। 

वैसे भी शिवपुरी के लिये व्यापरिक या औद्योगिक दृष्टि से तीन ही व्यवसाय चर्मोत्कर्ष पर है जिसमें प्रथम स्थान चिकित्सा, दवा तो दूसरा स्थान शराब, तो तीसरा उवरक खाद और पैस्टीसाइज दवाओं का है। बाकी धन्धे व्यवसाय इस शहर में या तो दम तोड़ रहे है या बन्द हो रहे है। 

ऊबड़-खाबड़ सडक़ों से उड़ती धूल घरों के अन्दर तक लोगों को नहीं छोड़ती, तो दूसरी ओर जिन्दा रहने जरुरी जल में घर के ही अन्दर डेंगू का लार्वा पनप रहा है तो दूसरी ओर शहर में मौजूद कभी न बहने वाली नाली और गन्दगी से पटे नालो में पनपते प्राण घातक मच्छर उठखेलियां कर रहे है। वहीं शाम होते ही शहर भर में मय ााने आबाद हो जाते है। 2 बाई 2 किलोमीटर रेडियस में बसे इस शहर में लगभग 10 देशी 4 अंग्रेजी मौजूद शासकीय शराब की दुकाने इस शहर की हकीकत बया करने काफी है। जिनसे करोड़ों रुपये की शराब बेची जाती है। 
अगर यो कहे कि स्वर्ग सा शिवपुरी अब नरक बन, दवा-दारु का हब बन गया है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। गरीब बेरोजगारी से पटे इस शहर में बैसे भी शासकीय कार्यालयों के अलावा कुछ नहीं था जिनसे लोगों का रोजगार व्यापार चलता था मगर मच्छरों, धूल, धक्कड़, अशुद्ध पेयजल की मार ने लोगों को अधमरा कर रखा है फिलहाल तो जान लेवा मच्छरों का एसगाह यह शहर मौसमी बीमारियों से जूझ रहा है। 
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