जन पीढ़ा पर बिफरे सिंधिया ने सरकार को लिया आड़े हाथों: हमने तो स्वर्ग बनाया था सरकार ने नरक बना दिया

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स/मप्र ग्वालियर 11 सितम्बर 2016।  जन समस्या देख व्यथित सिंधिया पत्रकारों के सवालों पर भी नहीं बिफरे बल्कि उन्होंने दतिया, इन्दरगढ़ में आयोजित किसानों के बीच सरकार को जमकर लताड़ा। उन्होंने अनौपचारिक रुप से पत्रकारों के सवालों के बीच कहा कि हमारे पूर्वजों ने तो इस शहर को सुन्दर रमडिय़ स्वर्ग की तरह बनाया था जिसका क्रम हमने अपने अथक प्रयासों के साथ आज तक जारी रखा है। मगर दुर्भाग्य कि जनता से प्रतिशोध रखने वाली इस सरकार ने इस शहर को नरक बना दिया। जब बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भ्रमण के दौरान जनता ने मगरमच्छों के शहर में विचरण की बात कहीं, इस पर अनौपचारिक तंज यह था कि इनसे बड़े=बड़े मगरमच्छ तो सरकार में बैठे है। जिनकी कारगुजारियों से आम नागरिक पीढि़त ही नहीं भयभीत भी है।

वहीं दतिया जिले के इन्दरगढ़ कस्बे उपस्थित किसानों के अपार समूह के बीच सिंधिया स्वयं को रोक नहीं पाये और उन्होंने सीधे सरकार के मुखिया पर निशाना साधते हुये किसानों से कहा कि जो जनता को भगवान और स्वयं को पुजारी कहते थे वह भगवानों को जेलो में डलवा रहे है। अन्नदाता के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ के हर र्मोचे पर संघर्ष के लिये तैयार हूं, इस पीढ़ा की घड़ी में अन्नदाता को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। भावुक सिंधिया ने कहा कि सरकारों को चाहिए कि वह जनाकांक्षाओं की पूर्ति में दिन-रात एक कर कार्य करें। मगर दुर्भाग्य कि सरकार चाहे केन्द्र की हो, या राज्य की हो, रहते आज बैवस जनता कलफ रही है, जो असहनीय है। 
बहरहाल जो भी हो, विगत वर्षो से अन्दर-बाहर जिन संघर्षो के साथ सिंधिया आम जनता की पीढ़ा व लोगों के हक की लड़ाई को लड़ रहे है, भले ही वह धारदार हो। मगर सरकार के सिंधिया विरोधी संगठित प्रयास फिलहाल सफल होते दिखाई दे रहे है। कारण कि कॉग्रेस की लयबद्दता अभी भी बेसुरी जान पड़ती है। क्योंकि अहम की लड़ाई को आगे बढ़ाने वालो के खिलाफ आज भी हाईकमान कोई सक्षम कदम उठाने में न कामयाब नजर आता दिखाई देता है। फिलहाल तो सिंधिया का संघर्ष अनवरत जारी है, परिणाम क्या होगें फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। 
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