भैया जी का सवाल अहम और यक्ष प्रश्र भी, बताइए आपने क्या किया ?

विलेज टाइम्स/व्ही.एस.भुल्ले। कॉग्रेस से हटकर आप सरकार में आये, आपकी प्रतीक्षा थी, बताईये आपने क्या किया? यह सवाल न तो विपक्ष, न ही जनता ने सरकार से किया है, अब्बल यह सवाल स्वयं संघ ने भाजपा सरकार से किया है जिसकी पुष्टि खुद सरकार्यवाह भैया जी जोशी ने संघ के अनुषांगिक संगठनों की दो दिवसीय बैठक के समापन पर की है। 

शायद इसीलिये संघ के कभी प्रवक्ता रहे राममाधव या अन्य नेता कहते है कि संघ क्या है इसे समझना है तो इसको देखो, समझों फिर संघ के बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त करो। इस बैठक के पश्चात भी संघ ने वहीं संदेश दिया जिस संदेश के लिये वह जाना जाता है और करोड़ों लोगों की उसमें आस्था है। 
ये सही है संघ के सरकार से किये सवालो से अनुषंागिक संगठनों के मुखिया कार्यकत्र्ता एवं हाशिये पर पढ़े भाजपा नेता तथा नौकरशाही से प्रताडि़त भाजपा नेता कार्यकत्र्ता गद-गद है। मगर भ्रष्टाचार में डूबी सरकार और अर्कमण्य हो चुकी नौकरशाही पर संघ के इस अहम सवाल से, कुछ फर्क पढ़ेगा यह अस भव ही है। 

कारण साफ है जिस तरह कि गल बईयाँ सरकार, नौकरशाही, मीडिया के बीच, कुछ लोगों को छोड़ म.प्र. में चल रही है, उससे प्रदेश की भोली-भोली अनपढ़ जनता भले ही अनभिज्ञ हो, मगर वर्तमान या पूर्व संगठन मंत्री या फिर म.प्र. के हर जिले, संभाग पर मौजूद संगठन मंत्रियों को सरकार की कार्यगुजारियां का पता न हो, कि म.प्र. में सुशासन चल रहा है या कुशासन यह स भव नहीं। 
जिस राष्ट्र ाक्त, देश व मानव कल्याण को समर्पित संगठन की त्याग तपस्या को देख, और उसके कार्यो के चलते अच्छे अच्छों के सर झुक जाये, उसी संगठन के राजनैतिक अनुषांगिक राजनैतिक संगठन की सरकार पर सवाल, इस बात के स्पष्ट संकेत है कि यह राजनैतिक संगठन सत्ता के अहंकार में डूब अपने मूल मार्ग से भटक गया है। पण्डित दीनदयाल जी के विचार और गांधी जी के स्वराज को छोड़ चुका है। शायद सरकार में बैठे लोगों को यह ज्ञान नहीं कि जिस सत्ता का सुख वह विगत 12 वर्ष से भोग रहे है, उसे हासिल करने संघ या उसके अनुषागिक  संगठनों के नेता कार्यकत्र्ताओं की कड़ी पीढ़ा निस्वार्थ त्याग ही नहीं अपना पूर्ण जीवन तक न्यौछावर कर तनमन धन स्वाहा कर प्राप्त हुई है। म.प्र. ही नहीं समुचे देश में कौन नहीं जानता कि स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जीे को जिनका समुचा जीवन सादगी के साथ संगठन को खड़ा करने एक कोठरी में बीता है। कौन नहीं जानता कै.राजमाता विजयाराजे सिंधिया को जो सिंधिया जैसे बड़े राजवंश की मुखिया होने के बावजूद उन्होंने समुचा जीवन तन, मन, धन समर्पित कर भाजपा को खड़ा करने साध्वी ही नहीं साधारण महिला के रुप में गवा दिया। यहां तक कि संगठन की खातिर सीधे उस वक्त की आयरन लेडी स्व.श्रीमती इन्दिरा गंाधी जो देश की प्रधानमंत्री भी रही, से संगठन और मूल्य, सिद्धान्तों के लिये लड़ गयी और उन्हें जेल तक में रहना पड़ा। उन्होंने अपने सिद्धान्तों के चलते स्वयं की जमानत तक नहीं कराई। अटल, आडवाणी, सुषमा, उमा भारती जैसी तेज तर्रार नेता देश को दिये। कौन नहीं जानता अटल, आडवाणी को कैसे स्व.भैरो सिंह, कल्याण सिंह, उमा भारती, सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी को जिन्हें इसे इतना बड़ा विस्तार इस संगठन को कड़ी तपस्या के पश्चात दिया। जिसमें संघ के कई ऐसे नाम रहे है, जिनका तो कईयों को भान ही नहीं। जो आज भी इसके नींव का पत्थर बने हुये है। 
मगर र्दु ााग्य इस म.प्र. का कि मोटी-मोटी बाते ही पकड़े तो आज इसी दल की सरकार में अपुष्ट, पुष्ट अघोषित सर्वमान्य भ्रष्टाचार, सिस्टम को बर्बाद कर असंवेदनशील बना चुका है। प्रदेश की अधो-सरंचना सडक़, पुल दम तोड़ चुके है। म.प्र. को दो भागों में विभक्त करने वाली शेरशाह सूरी के जमाने में निर्मित आगरा-मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 3 खूनी सडक़ के नाम चर्चित हो चुका है। जिस पर मरने वालो का आंकड़ा प्रतिवर्ष 1000 से ऊपर हो सकता है जिसमें घायल या अपाहिजो की तो कोई गिनती ही नहीं। हालत ये है इस मार्ग की अगर जर्जर हो चुका पचोर जंजाली पुल सहित घारा घाट पुल धरासायी हो गये, जो कभी भी हो सकते है तो लगभग 200 किलो मीटर का ऐरिया टापू में तब्दील हो जायेगा। 
 इससे घटिया हास्यपद बात संघ के इस राजनैतिक अनुषांगिक संगठन के लिये क्या हो सकती है कि जिस भाजपा के नेता अर्थात पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जिनका स मान स्व. इन्दिरा गांधी तक करती थी उनके नाम कभी न जलने वाली अटल ज्योति का शुभार भ गरीब जनता का करोड़ों रुपया फूंक हैलिकॉप्टरों में घूम-घूम प्रदेश भर में किया गया। मगर गरीबों को, न तो तब, और न ही अब 24 घन्टे बिजली नसीब हो पा रही है। अब्बल अपना नकारापन, भ्रष्टाचार छिपाने सीधे-सीधे जनता से अवैध बसूली मनमाने बिलो के रुप में की जा रही है। हद तो तब है जब नकारेपन पर उतारु बिजली क पनियों द्वारा स्व. राजीव गांधी विधुत परियोजना ग्रामीण, शहरी के  निर्माण पर हजारों करोड़ रुपया फूक घटिया काम करा दिया गया। जिसके चलते आये दिन ट्रान्सफार्मर तो कभी केविले जल रही है। और प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने प्रदेश की सरकार विदेश भ्रमण कर रही है। जो प्रदेश सडक़, बिजली, सुरक्षा विहीन लालफीताशाही का शिकार हो, उस प्रदेश में लोगों का निवेश कैसा होगा जबकि ग्वालियर-च बल में उघोगपत्ति उनके अधिकारी, ठेकेदारों के सीधे सडक़ पर से ही अपहरण किससे छिपे है। 
लिखने कहने को तो बहुत कुछ है लिखने चले तो एक किताब भी कम पड़ जायेगी, मगर मिडडे मील, मध्ययान भोजन, खादय वितरण और कुपोषित बच्चों के  पोषण आहारों में घपले घोटाले जिसमें राशन की दुकान से सड़ा अनाज, वितरण मध्ययान भोजन पर ताले और कुपोषित बच्चों के आहार पर डाका गांव-गांव अवैध मदिरालय इस सरकार नैतिक, सामाजिक मूल्यों का स्वयं बखान करते है। 
बात चली है और वह भी मातृ संस्था से, तो इसका दूर तक जाना जरुरी है क्योंकि इस दल को खड़ा करने वालो की त्याग तपस्या पर आज सवाल है अगर जनता के बीच उत्तर नहीं आया तो यह सवाल काफी घातक हो सकते है। अनुषांगिक संगठनों और स्वयं संघ को मगर इतना तय है कि अगर संघ ने सरकार के सामने सवाल खड़ा किया है, स्वयं सरकार में मौजूद चुने हुये जनप्रतिनिधि, सांसद और विभिन्न संगठनों के नेता कार्यकत्र्ताओं ने, तो इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि संघ जैसा महान संगठन चुप बैठेगा। जरुरत बस अब उस इन्तजार की है जब वह पूर्ववत अपने संदेश स्पष्ट करेगा उस वक्त निश्चित ही म.प्र निराश नहीं होगा ऐसी उ मीद अवश्य की जानी चाहिए। 

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