जीवन को जेहनदुम बनाता जुनून, सत्ता को समर्पित सियासत

व्ही.एस.भुल्ले। 7 अगस्त 2016 विलेज टाइम्स। जिस तरह से आजकल जुनून जीवन को जेहनदुम बना, सत्ता हासिल करने या सतत सत्ता में बने रहने का, म.प्र. में शुरु हुआ है वह कुछ मायने में ठीक हो सकता है, मगर समुचा सटीक हो यह स पूर्ण सत्य नहीं। क्योंकि सरकार के अन्दर जिस तरह का अन्धा बेहरापन तथा नौकरशाही में जिस तरह की कत्र्तव्य विमुखता नजर आती है उसे देखकर तो यहीं लगता है कि कुछ वर्ष अगर सियासत का यहीं हाल रहा तो लोगों के हंसते खेलते जीवन का जेहन्दुम बनना तय है। 

क्योंकि सरकार जिस तरह स वेतन भत्तों, सहायता ,सहयोग, सेवा के नाम गरीब जनता का धन सतत सत्ता में बने रहने के सियासी सोच के साथ उड़ा रही है, उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। अगर पूर्व मु यमंत्री बाबू लाल गौर की माने तो 1 लाख 40 हजार करोड़ का कर्ज ले सरकार घी पी रही है, तो सवाल तो बनता है।  

और समुचे प्रदेश में बढ़ते असुरक्षा के भाव के मद्देनजर म.प्र. सरकार की सुरक्षा मुहैया कराने वाली सर्वोत्तम पहल डायल 100 सेवा भी अब न काफी साबित सी लगती है। 
क्योंकि  अपराध अपराधियों को छोड़ जिस तरह से दिन भर सरकार की एस.वी., सी.आई.डी. शाखा उभरते नेता संगठनों की रैकी करती है। उससे लोगों का जीवन सुगम सुरक्षित होने वाला नहीं, जरुरी नहीं कि राष्ट्र भक्त जनसेवक किसी विशेष संगठन या संस्था में ही प्रशिक्षण उपरान्त पैदा होते है।

इतिहास गवाह है कि इस भू-भाग पर एक लव्य जैसे धनुधर भी पैदा हुये है जिन्होंने बगैर गुरु से शिक्षा लिये गुरु दक्षणा में, अगूंठा भी काटकर दिया है जो किसी भी धनुधर के लिये उसकी धनुर विद्या की जान होती है, जिससे तीर पर पकड़ बना लक्ष्य को भेदा जाता है। 

अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से जनधन के सहारे, नौकरशाही की मदद से सत्ता में बने रहने का खेल म.प्र. में शुरु हुआ  है और भोले भाले लोगों को खुशहाल जीवन के सबज बाग दिखा सेवा, सुविधा के नाम संरचनात्मक विकासउन्मुख विकास को दर-किनार कर, रेबडिय़ां बांटने का क्रम शुरु हुआ है। उसने प्रदेश के आम नागरिक को निराश ही नहीं, आक्रोशित आतंकित भी किया है, जिससे लोग संसकित है। 

क्योंकि समाज, राष्ट्र विरोधी ताकते सर फैला रही है और सत्तासीन सुरक्षित और आम जन अब चैन की नीद नहीं सो पा रहा है। अगर अपुष्ट रुप से एस.बी., सी.आई.डी. की माने तो वह बराबर अपनी रिपोर्ट भेज रही है मगर अमल के आभाव में वह भी विचलित निराश है, क्योंकि सतता सत्ता में बने रहने का सुख सत्ताधारियों में शहादत का जज्बा पैदा नहीं कर पा रहा, जो किसी भी प्रदेश व वहां के नागरिकों के लिये खतरनाक है। 

बेहतर हो कि सतत सत्ता में बने रह, राष्ट्र व समाज कल्याण की मंशा रखने वाले लोग संगठन संस्थायें जुनून को छोड़ जीवन की सार्थकता को पहचाने, इस प्रदेश में और भी राष्ट्र ाक्त है। ऐसा कतई न माने कि वह ही सिर्फ और सिर्फ अकेले राष्ट्र भक्त है। बेहतर हो कि देश के प्रधानमंत्री मोदी की तरह सार्वजनिक रुप से राजधर्म का पालन कर, जनता में विश्वास जगाये, ऐसे में अनेको अनेक बाधाओं के साथ हो सकता है परिणाम अप्रत्याशित रहे, मगर सच से दूर नहीं। जो एक राष्ट्र भक्त जनसेवक के लिये जनता की खातिर अतिआवश्यक होता है। अगर समय रहते सत्ता के जुनून में डूबे लोगों ने जल्द ही यह समझने का प्रयास नहीं किया, तो यह जनभावनाओं के साथ न इन्साफी होगी। 
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