राजनीति में व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप अशोभनीय, धर्मशाला न सही, जनसेवा की संस्थायें, शाला तो बनाई

विलेज टाइम्स, व्ही.एस.भुल्ले। चाहे आरोप प्रत्यारोप व्यापम में मु यमंत्री के परिवार को लेकर हो, या फिर टाटा बिड़ला द्वारा बनाई गई धर्मशालाओं को लेकर सियासत की खातिर सिंधिया पर निशाना हो, दबी जुबान में बोलने वालो की माने तो, जो लोग सिंधिया परिवार के कार्यो से अपरचित है। उन्हें सीखना समझना चाहिए कि रानो जी सिंधिया जी से लेकर बैजाबाई सिंधिया और अब यसोधरा राजे सिंधिया तक मन्दिरो की जीर्णोधार की श्रृंखला, स्व. राजमाता विजयराजे सिंधिया के राम जन्म ाूमि पे्रम से लेकर राष्ट्र भक्त संस्थाओं के सहयोग और भाजपा निर्माण से लेकर इतरजेन्सी कॉल में देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व.इन्दिरा गांधी तक से सीधा लोहा ले, जेल काटने तक अनेकों कार्य ऐसे रहे है, जिनके माध्यम से सिंधिया नाम के कार्यो को समझा जा सकता है।

इतना ही नहीं गुना में विजयपुर एन.एफ.एल खाद कारखाना, बामौर मालनपुर उघोग क्षेत्र सहित सिथोली स्प्रिंग फैक्ट्री देश में शताब्दी टे्रनो की श्रृंखला गुना-इटावा रेल लाइन सहित देश के रेल्वे स्टेशनो सहित ग्वालियर हवाई जहाज अड्डा विस्तार गुना, ग्वालियर, अशोकनगर में कई रेल्वे आव्हरब्रिज शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा सहित श्रेणीवृद्ध केन्द्रीय नवोदय विद्यालयो की स्थापना हो, सिन्ध पार्वती वेतवा, वेशन से लेकर समुचे ग्वालियर-च बल में रेल, तालाब जिसमें अकेले शिवपुरी में ही 3 हजार 250 से अधिक तालाब निर्माण खेल मैदान इस बात की ताकीत करते है कि बगैर अध्ययन के टीका टिप्पणी उचित नहीं। 

बड़ा मुश्किल होता है किसी भी समाज या उन लोगों को समझना जो अधूरी जानकारी के आधार पर राजनीति करते है क्योंकि स य परिवार सार्वजनिक जीवन में जनसेवा की ल बी लकीर इसलिये खींचते है। कि उनके  नाम को उनके वैभव से नहीं उनके द्वारा किये जनहित के कार्यो के आधार पर जाना जाये।
मगर जब समाज या राजनीति में लोग छणिक लोकप्रियता के लिये आधे अधूरे या फिर मिथक आरोप-प्रत्यारोप करते है तो वह समाज ही नहीं उन नागरिकों के प्रति अन्याय है। जो राजनीति में अपनी समस्या का समाधान खोजते है। 
ये अलग बात है कि ऐसे आरोप से आरोपित व्यक्ति सीधे सबाल जबाव से परहेज रखते हो। 

मगर यह जबावदेही उस समाज व वहां के बुद्धिजीवी और नागरिकों की होती है जिनके लिये लोग अपना सब कुछ समर्पित कर जनसेवा का कार्य करते है मगर जो शैली राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप लगाने या राजनैतिक तौर पर प्रतिकार की देखने मिलती है। वह राजनीति ही नहीं किसी भी अन्य समाज के लिये अक्ष य है क्योकि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप प्रतिकारों से समाज के अन्दर गलत संदेश जाता है। न कि समरसता, मूल्य सिद्धान्त की राजनीति को मजबूत करता है।
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