इन खूनी सडक़ों और गड्डों से मुक्ती कब मिलेगी

विलेज टाइम्स। कहते है सुविधा सेवा उसे कहते है जिससे आम नागरिक का जीवन सुगम और समस्या मुक्त हो। मगर जो सुविधा एक दो नहीं कई स्तरों पर मुंह मांगे दाम चुकाने के बाद भी न मिले तो उसे बहुमूल्य कहा जाता है। मगर व्यवस्थापक पूरा दाम कानून बसूलने के बावजूद भी सुविधा सेवा के नाम लोगों की जिन्दगियों से खिलबाड़ कर उन्हें अकारण ही मौत के मुंह में धकेलने पर उतारु हो जाये तब फिर लोग क्या करें। 

अभी हालिया सडक़ दुर्घटना रोकने केन्द्रीय सडक़ परिवहन मंत्रालय ने जुर्माना टोकू कई नियम बनाये है जो बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं के मद्देनजर जरुरी भी है क्योंकि इसका पालन आम जनता को करना है न कि सरकार और नौकरशाही को। मगर सडक़ दुर्घटनाओं का सबसे अहम प्रमुख कारण जो था सडक़ो का रख-रखाव गड्डा विहीन सडक़ सुविधा और ड्रायविंग प्रशिक्षण, स्कूलो का तो उस पर केन्द्रीय सडक़ परिवहन मंत्रालय द्वारा कुछ नहीं किया गया। जिसके चलते फर्जी ड्रायविंग स्कूलो के प्रमाण पत्र पर घर बैठे मौत के ताबूत उड़ाने के लायसन्स हाथों हाथ बांटे जाते है। 

वहीं सडक़ सुविधाओं के नाम नौकरशाहों द्वारा की जाने वाली लूट पर क ाी सवाल नहीं किये जाते। फिर चाहे वह नवीन सडक़ निर्माण हो या फिर सडक़ों की मर मत,किस तरह सरेयाम डांके डाले जा रहे है किसी से छिपा नहीं, क्योंकि जब सत्ता का रसूख रखने वाले ठेकेदार और नोटो की दम पर नौकरी सुरक्षित रखने वाले पैरोकार हो तो सडक़ दुर्घटनाओं में मरने वाली बैकसूर जनता की क्या औकात जो उसकी एक्सीडेन्टों में निकलती चींख तक वह सुना सके। 

गजब तो तब है जब हम हैलीकॉप्टर जहाज, लग्झरी कारों में सफर करने वाले मंत्री, मु यमंत्रियों आला आई.ए.एस. अफसर माई बापों को छोड़ दें तो गाड़ी भरे नेता, अफसर बल्लम सब इन्हीं गड्डोंं से पटी सडक़ या अधकुचरे डायवर्सनों से ही सफर करते है है। मगर चबन्नी चोर से लेकर, लाखों करोड़ों रुपया सडक़ निर्माण के नाम डकारने वाले सडक़ मर मत से जुड़े हजारों लाखों की तन्खा सुख सुविधायें बटोरने वालो का कोई बाका तक नहीं कर सकता। क्योंकि अगर लूटपाट करने ठेकेदार को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है तो नौकरशाहों को नोटो का साथ ऐसे में उस आम नागरिक की क्या औकात जो वाहन ारीदने के साथ मुस्त सडक़ कर, उसके बाद जगह-जगह जिन्दगी भर टोल टेक्स, हर वर्ष बीमा वाहन चलाने डीजल, पैट्रोल पर वाणिज्य कर और गलती पर कानूनन जुर्माना ारता है, उस सबके बावजूद सडक़ पर गड्डा या सडक़ अवरुद्ध होने पर न तो उसे कोई राहत न ही मरने पर कोई मुआवजा मिलता है। 

एक उदाहरण बतौर विगत 7 वर्षो से आगरा-मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 का निर्माण कार्य चल रहा है जिस राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधीकरण अपनी देख-रेख में निर्माण करा रहा है जबकि सडक़ निर्माण मेन्युअल कहता है और नागरिक को मौलिक अधिकार भी है कि आवागमन का रास्ता निर्माण के वक्त अवरुद्ध न हो उसके लिये प्रोजक्ट में डायवर्सन मेन्टीनेस के पैसा जोड़ा जाता है। जिससे आवागमन सुगम रहे और सडक़ से गुजरने वालो को तकलीफ न हो। 

मगर यह लोगों का दुर्भाग्य है कि 7 वर्ष पूर्व कार्य ही शुरु नहीं हुआ, जिसका मेन्टीनेन्स राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग राज्य सरकार के संरक्षण में केन्द्र की निधि से करता था बन्द कर सडक़ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधीकरण को सौप दी गई जिसके पास न तो स्टॉक है न ही मशीनरी अब जबकि विगत 2 वर्षो से सडक़ निर्माण चल रहा है तब भी आगरा-मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग गड्डे में तब्दील है मगर एन.एच.ए.आई. के अधिकारी कहते है कि वह शिवपुरी की समस्या दिल्ली में रखेगें। कितना बड़ा मजाक है और कोई एजेन्सी फिक्स है तो वह जहां निर्माण करेगी वहां डायवर्सन बनायेगी, मगर जो सडक़ वायपास के कारण छूट गई है उसके गड्डे कौन भरेगा, इसका जबाव न तो म.प्र. सरकार के पास है न ही एन.एच.ए.आई. सहित मंत्रालय के पास है जिसमें शिवपुरी जिले के शहर पोर्सन और सूबतघाटी पोर्सन गुना वायपास की हालत इतनी ाराब है, कि कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है, इतनी दुष्वारियों के बाद भी जनता आज भी उन सवालों से अनुत्तरित है जिन्हें वह समय बेसमय चींख चिल्लाकर सुुनाती रहती है मगर माई बापों के नक्कारखाने से कोई आवाज नहीं आती, कि आ िार उन्हें इन खूनी सडक़ों और गड्डों से मुक्ती कब मिलेगी।  
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment